By रेनू तिवारी | Sep 24, 2025
भारत में चीन के राजदूत शू फेइहोंग (Xu Feihong ) ने कहा कि उतार-चढ़ाव के बावजूद, चीन-भारत संबंध "मैत्रीपूर्ण सहयोग द्वारा परिभाषित" रहे हैं और उन्होंने संवाद, व्यापार और आदान-प्रदान को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। अमेरिकी प्रशासन की व्यापार और टैरिफ नीतियों के वैश्विक प्रभाव की पृष्ठभूमि में, चीनी राजदूत शू फेइहोंग ने मंगलवार को कहा कि भारत और चीन को वैश्विक दक्षिण के हितों की रक्षा करते हुए संयुक्त रूप से आधिपत्य और "टैरिफ और व्यापार युद्धों" का विरोध करना चाहिए।
शू ने कहा कि दोनों देशों को सीमा विवाद से वर्तमान भारत-चीन संबंधों को परिभाषित नहीं होने देना चाहिए और द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाया जाना चाहिए क्योंकि इसमें ‘अपार संभावनाएं’ हैं। कार्यक्रम में चीन की स्थापना की 76वीं वर्षगांठ के अवसर पर दिए अपने भाषण में शू ने कहा कि भारत और चीन के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वे “वर्चस्व, शक्ति केंद्रित राजनीति और किसी भी प्रकार के शुल्क तथा व्यापार युद्धों” का मिलकर विरोध करें, वैश्विक दक्षिण के साझा हितों की रक्षा करें और मानवता के लिए साझा भविष्य वाले समुदाय का निर्माण करें।
राजदूत की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच चीन के तिआनजिन शहर में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के इतर हुई बातचीत को तीन सप्ताह से अधिक हो चुके हैं।