West Asia Crisis के बीच भारत को ऊर्जा सुरक्षा की चिंता! 'इलेक्ट्रिक वाहन' अपनाना अब राष्ट्रीय मिशन, चीन पर निर्भरता घटाने पर जोर

By रेनू तिवारी | Jul 02, 2026

पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और संकट ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा और कच्चे तेल के आयात पर उसकी भारी निर्भरता को लेकर चिंताओं को गहरा कर दिया है। प्रधानमंत्री के सलाहकार तरुण कपूर ने बृहस्पतिवार को स्पष्ट किया कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए देश में इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) को तेजी से अपनाना और महत्वपूर्ण कलपुर्जों के मामले में चीन पर निर्भरता कम करना अब बेहद अपरिहार्य हो गया है। उन्होंने उद्योग मंडल एसोचैम (ASSOCHAM) द्वारा आयोजित ‘विकसित भारत के लिए भारत को इलेक्ट्रिक परिवहन केंद्र बनाना’ विषय पर एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह बात कही।

कपूर ने कहा, ‘‘ पश्चिम एशिया संकट के बाद यह और भी प्रासंगिक हो गया है। मैं कहूंगा कि अब हमारे देश के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाना सबसे आवश्यक कार्य बन गया है, जिसे हम सभी को मिलकर पूरा करना होगा।’’ उन्होंने कहा कि यदि भारत का कच्चे तेल का आयात कम होता है, तो इससे अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और रुपये की विनिमय दर में भी सुधार होगा। संकट के दौरान शेयर बाजारों के हालात पर उन्होंने कहा, ‘‘ ऊर्जा के मामले में हम बाहरी परिस्थितियों के प्रति इतने अधिक संवेदनशील हो गए हैं कि यह हम सभी के लिए अब चिंता का गंभीर विषय है। इसलिए अब यह हम सभी के लिए एक मिशन बन गया है।’’

कपूर ने कहा कि पेट्रोलियम का उपयोग पूरी तरह समाप्त करना संभव नहीं है, लेकिन इसमें कुछ कमी लाना भी बड़ा बदलाव ला सकता है। उन्होंने कहा, ‘‘ पेट्रोलियम की खपत में सिर्फ पांच प्रतिशत की कमी भी बड़ा अंतर पैदा कर सकती है और यह तभी संभव है, जब हम तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बढ़ें।’’ उन्होंने कहा कि भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों को धीरे-धीरे अपनाया गया है। दोपहिया और तिपहिया वाहनों के क्षेत्र में अच्छी प्रगति हुई है, लेकिन चारपहिया वाहनों के क्षेत्र में अभी लंबा सफर तय करना बाकी है। कपूर ने कहा, ‘‘ पेट्रोल की खपत सबसे ज्यादा दोपहिया वाहनों में होती है। देश में इस्तेमाल होने वाले कुल पेट्रोल का लगभग 60 प्रतिशत दोपहिया वाहन ही खर्च करते हैं। इसलिए इस श्रेणी में तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बदलाव लाना बेहद महत्वपूर्ण है।’’

उन्होंने कहा कि हाल में घोषित दिल्ली इलेक्ट्रिक वाहन नीति इस दिशा में सही कदम है। कपूर ने आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए कहा, ‘‘ हमें यह देखना होगा कि चीन पर हमारी निर्भरता कैसे कम हो।’’ उन्होंने कहा कि भारत के लिए आयात को पूरी तरह समाप्त करना संभव नहीं है, लेकिन कम-से-कम महत्वपूर्ण कलपुर्जों तथा आवश्यक खनिजों का घरेलू उत्पादन होना चाहिए, ताकि भविष्य में यदि चीन फिर से इन वस्तुओं के निर्यात पर प्रतिबंध लगाए तो उद्योग प्रभावित न हो।

इसे भी पढ़ें: Ayodhya Ram Mandir Donation Scam | वाराणसी की सुरक्षा एजेंसी से जुड़े तार, हाउसकीपिंग स्टाफ से कराई जा रही थी नोटों की गिनती

उन्होंने आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को हासिल करने के लिए उद्योग जगत को सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग का भरोसा भी दिया। इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कपूर ने कहा कि सरकार की ओर से इस दिशा में ‘‘तेज और लक्ष्य-आधारित’’रणनीति अपनाई जाएगी। उन्होंने कहा, ‘‘ अगले पांच वर्षों में देश की सड़कों पर इलेक्ट्रिक वाहनों की उपस्थिति इतनी अधिक होनी चाहिए कि पूरी दुनिया देखे कि भारत में इस क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव आया है।

प्रमुख खबरें

India-Japan Partnership: AI और Defence में ऐतिहासिक डील, भारत आएगा 10 अरब डॉलर का निवेश

Congress से फिर नाराज हुए Manish Tewari ! इस बार साफ साफ पूछा- प्रतिभा और क्षमता होना क्या सबसे बड़ा दोष है?

जम्मू-कश्मीर बैंक का कुल कारोबार तीन लाख करोड़ रुपये के पार, जमा में 16 प्रतिशत की वृद्धि

EPFO का बड़ा सुधारात्मक कदम: PF और पेंशन दावों के निपटान में देरी पर अधिकारियों को लगेगा 12% झटका, वेतन से कटेगा जुर्माना