By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Jul 18, 2020
नयी दिल्ली। भारत ने विदेशों में रहकर यहां काम करने वाली ई-वाणिज्य कंपनियों पर 2 प्रतिशत सामान्यीकरण शुल्क (इक्वलाइजेशन लेवी) यानी डिजिटल कर लगाये जाने का बचाव किया है। उसने कहा कि इसकी प्रकृति भेदभावपूर्ण नहीं है और इसका मकसद उन कंपनियों पर कर लगाना है जिनका डिजिटल परिचालन के जरिये देश के बाजार के साथ गहरा संबंध हैं। अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि को दिये छह पृष्ठ के जवाब में भारत ने कहा कि शुल्क केवल उन्हीं कंपनियों पर लागू होती है जिनकी सालाना आय 2 करोड़ रुपये (करीब 2,67,000 डॉलर)से अधिक है। इस सीमा का कारण छोटी ई-वाणिज्य कंपनियों को इससे छूट देना है। भारत ने कहा, ‘‘यह अमेरिका की कंपनियों के खिलाफ भेदभाव नहीं करता क्योंकि यह समान रूप से उन सभी ई-वाणिज्य परिचालकों पर लगता है जिनका भारत में स्थायी तौर पर प्रतिष्ठान नहीं है। भले ही वे कंपनियां किसी भी देश की हों।’’