WFI का बड़ा बयान: Haryana के पहलवानों की रिकॉर्ड भागीदारी ने पक्षपात के आरोप झूठे साबित किए

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | May 10, 2026

 भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के अध्यक्ष संजय सिंह ने रविवार को कहा कि गोंडा में चल रहे राष्ट्रीय ओपन रैंकिंग टूर्नामेंट में हरियाणा के पहलवानों की भारी भागीदारी इस आरोप को खारिज करती है कि महासंघ राज्य के खिलाफ पक्षपात कर रहा है। उन्होंने हालांकि यह भी स्वीकार किया कि भारतीय कुश्ती अब भी डोपिंग की गंभीर समस्या से जूझ रही है, क्योंकि प्रतियोगिता स्थल पर इस्तेमाल की गई सिरिंज बरामद हुई हैं।

यह उन अनुभवी खिलाड़ियों के लिए भी बड़ा मंच है, जो रैंकिंग में पिछड़ने के बाद वापसी की कोशिश कर रहे हैं। इसी क्रम में 2019 विश्व चैंपियनशिप और 2023 एशियाई खेलों के रजत पदक विजेता दीपक पूनिया भी यहां प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। उनके साथ 125 किलोग्राम वर्ग में 2023 एशियाई चैंपियनशिप के कांस्य पदक विजेता अनिरुद्ध गुलिया भी हिस्सा ले रहे हैं। यह मुद्दा इसलिए भी अहम है क्योंकि 2021 में तत्कालीन डब्ल्यूएफआई प्रशासन ने राष्ट्रीय चैंपियनशिप में किसी भी राज्य से एक से अधिक टीमों को अनुमति नहीं देने की नीति लागू की थी। इसे व्यापक तौर पर हरियाणा को निशाना बनाने वाला कदम माना गया था, क्योंकि राज्य परंपरागत रूप से अपनी मजबूत प्रतिभा के दम पर ए और बी दोनों टीमें उतारता रहा है।

हरियाणा राज्य संघ ने उस समय इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा था कि राज्य को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। संजय सिंह ने कहा कि हरियाणा भारतीय कुश्ती की रीढ़ बना हुआ है और महासंघ चाहता है कि हर राज्य से मजबूत भागीदारी हो, खासकर अंतरराष्ट्रीय स्तर के पहलवान तैयार करने वाले राज्यों से। डब्ल्यूएफआई के अनुसार, रैंकिंग टूर्नामेंट की शुरुआत खास तौर पर हरियाणा के पहलवानों को दूसरा मौका देने के उद्देश्य से की गई, ताकि प्रतिभाशाली खिलाड़ी खुद को साबित कर सकें और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी दावेदारी बनाए रख सकें। सिंह ने कहा, “हरियाणा ने वर्षों से भारतीय कुश्ती में बड़ा योगदान दिया है।

हम चाहते हैं कि वहां और पूरे देश में यह खेल और मजबूत हो। आंकड़े खुद इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण हैं कि डब्ल्यूएफआई हरियाणा के खिलाफ नहीं है। अगर भेदभाव होता, तो हरियाणा के पहलवान इतनी बड़ी संख्या में यहां नहीं आते। ’’ उन्होंने कहा, ‘‘हरियाणा के पहलवान बड़ी संख्या में यहां जीतेंगे और राष्ट्रीय शिविर में वापसी का शानदार मौका हासिल करेंगे, जिससे उन्हें पूरे साल प्रशिक्षण से जुड़े लाभ मिल सकेंगे।” राष्ट्रीय ओपन रैंकिंग टूर्नामेंट के पहले दिन कई दिग्गज पहलवानों पर मुकाबले से पहले इंजेक्शन लेने के आरोप लगे हैं। प्रतियोगिता स्थल नंदिनी नगर के पुरुष शौचालय में इस संवाददाता को इस्तेमाल की गई कई सिरिंज मिलने के बाद यह मामला चर्चा में आया।

सिंह ने कहा, “हम लगातार जागरूकता फैलाने और दोषियों को पकड़ने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन यह सच है कि अभी और काम किए जाने की जरूरत है। डोपिंग मामलों के कारण कुश्ती की छवि को नुकसान पहुंचा है और हम चाहते हैं कि यह खेल पूरी तरह स्वच्छ बने।” हाल के वर्षों में भारतीय कुश्ती को डोपिंग उल्लंघनों के कारण कई बार शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा है, खासकर हैवीवेट वर्ग में।

कई नामी पहलवान डोप जांच में विफल रहने के बाद निलंबन झेल चुके हैं। विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (वाडा) की दिसंबर 2025 में जारी रिपोर्ट के अनुसार, भारत लगातार तीसरे वर्ष (2022, 2023 और 2024) डोपिंग उल्लंघनों के मामलों में दुनिया में पहले स्थान पर रहा है।

सिंह ने कहा, “हम कोचों और पहलवानों को जागरूक करने में सफल रहे हैं, लेकिन अभी भी कई लोग ‘शॉर्टकट’ अपनाना चाहते हैं। इस टूर्नामेंट में नाडा के अधिकारी मौजूद हैं। डब्ल्यूएफआई हर वर्ग के शीर्ष-10 पहलवानों को भागीदारी प्रमाणपत्र देता है, लेकिन आमतौर पर केवल पदक विजेताओं (चार खिलाड़ियों) का ही डोप टेस्ट होता है। अब शायद हमें नाडा से शीर्ष-10 सभी खिलाड़ियों की जांच कराने का आग्रह करना चाहिए। इससे कुछ प्रभाव पड़ेगा।

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