भारत ने बॉर्डर पर ताना रूसी रडार, निशाने पर J-20 विमान?

By अभिनय आकाश | Jun 30, 2026

रूस का नेब्बू यूएम रडार यह सिर्फ लोहे और बिजली का ढांचा नहीं है बल्कि यह वो तीसरी आंख है जो बादलों के पीछे छिपे चीन के J20 और समंदर में घात लगाए J35 के अदृश्य कवच को राख कर सकती है। जब वायु शक्ति 2026 में इसकी झलक दिखी तो बीजिंग के वॉर रूम में सन्नाटा पसर गया। दरअसल चीन ने पिछले एक दशक में अपनी वायु सेना को पूरी तरह से बदल दिया है। उसका J20 माइल्टी ड्रैगन अब केवल एक प्रोटोटाइप नहीं बल्कि एक हकीकत है जो लद्दाख से लेकर अरुणाचल तक भारतीय सीमाओं के करीब मंडरा रहा है। चीन का दावा है कि यह विमान किसी भी रडार की पकड़ में नहीं आता है। लेकिन खतरा यहीं खत्म नहीं होता है। चीन अब अपने विमान वाहक पोतों के लिए जे 35 को तैयार कर रहा है। अब जरा कल्पना कीजिए हिंद महासागर के बीचों-बीच में एक ऐसा विमान उड़ान भर रहा है जो हमारे रडार पर दिखाई ही ना दे। साथ ही पाकिस्तान की नजरें भी चीन के इसी J35 पर टिकी है। यानी भारत के सामने टू फ्रंट स्ट्रेंथ वार का खतरा खड़ा हो चुका है। इस बढ़ते अंधेरे को चीरने के लिए भारत को चाहिए था एक ऐसा रडार जो सिर्फ देखे नहीं बल्कि दुश्मन के स्ट्रेंथ को बेअसर कर दे। 

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नेबो यूएम अकेले काम नहीं करता। यह भारत के एरोस्पेस डिफेंस कमांड का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। अब बात करते हैं भारत के सिस्टम ऑफ सिस्टम्स की जिसका सबसे बड़ा पॉइंट है टारगेट यू इन। नेबो यूएम पहले दुश्मन को दूर से पकड़ता है। इसके बाद आता है डाटा ट्रांसफर। यह डाटा तुरंत S400 ट्रप मिसाइल सिस्टम या हमारे रफाल फाइटर जेट को भेज दिया जाता है। इसके बाद आता है सटीक निशाना। क्योंकि S400 के पास अपनी मिसाइलें छोड़ने के लिए सटीक लोकेशन चाहिए। नेबो यूएम उसे वह अर्ली वार्निंग देता है जो जीत और हार के बीच का अंतर तय करती है। इसके अलावा भारत के स्वदेशी रडार नेत्रा और फोल्कन के साथ मिलकर यह एक ऐसा डिजिटल जाल बुनता है जिससे ड्रैगन का बचना नामुमकिन है। आधुनिक युद्ध में रडार का सबसे बड़ा दुश्मन है एंटी रेडिएशन मिसाइल। लेकिन नेबो यूएम को पकड़ना मुश्किल है। यह बाज 69098 * 8 भारी ट्रकों पर सवार है। यह रडार कुछ ही मिनटों में तैनात हो सकता है और सिग्नल देने के तुरंत बाद अपनी जगह बदल सकता है। इस सूट एंड स्कूट तकनीक की वजह से चीन की मिसाइलें खाली जमीन पर गिरेंगी। जबकि हमारा रडार सुरक्षित दूसरी जगह से दुश्मन पर नजर रख रहा होगा। 

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भारत द्वारा नेबो यूएम की तैनाती सिर्फ एक खरीद नहीं बल्कि यह एक रणनीतिक बयान भी है। यानी कि स्ट्रेटेजिक स्टेटमेंट। अब आपने यह सब तो समझ लिया लेकिन दोस्तों अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक पुरानी कहावत है। कोई भी देश ना तो स्थाई दोस्त होता है और ना ही स्थाई दुश्मन केवल हित ही स्थाई होते हैं। लेकिन भारत और रूस के रिश्तों में इस परिभाषा को कई बार चुनौती दी गई है। दशकों से बदलते वैश्विक समकर्णों शीत युद्ध के उतार-चढ़ाव और हालिया भू राजनीतिक उथल-पुथल के बावजूद दिल्ली और मॉस्को के बीच का पुल आज भी अडिग खड़ा है। भारत और रूस यानी तत्कालीन सोवियत संघ की दोस्ती की सबसे मजबूत आधारशिला 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान रखी गई थी। जब भारत एक तरफ पाकिस्तान से जंग लड़ रहा था और दूसरी तरफ अमेरिका और ब्रिटेन जैसे पश्चिमी देशों के दबाव का सामना कर रहा था। तब सोवियत संघ ने भारत के साथ शांति मित्रता और सहयोग की संधि की। 

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