By अभिनय आकाश | Oct 30, 2026
पश्चिम एशिया में इस वक्त जो हालात बने हुए हैं, उसने पूरी दुनिया की सुरक्षा प्राथमिकताओं को बदल कर रख दिया है। ईरान से जुड़े तनाव, लगातार होते ड्रोन हमले और लाल सागर से लेकर फारस की खाड़ी तक मंडराते खतरे इन सब ने खाड़ी देशों को अपनी रक्षा तैयारियों पर नए सिरे से सोचने को मजबूर कर दिया है। लेकिन इसी तनाव के बीच एक ऐसी बड़ी खबर सामने आई है जिसने अंतरराष्ट्रीय डिफेंस मार्केट में भारत की बढ़ती धमक को साबित कर दिया है। भारत की एक डिफेंस कंपनी नोएडा स्थित आईजी डिफेंस ने ओमान की कंपनी एमएसए ग्लोबल के साथ एक ऐतिहासिक समझौता यानी एमओयू किया है। ओमान में भारत के घातक अटैक ड्रोंस और काउंटर ड्रोन सिस्टम्स का सह विकास और स्थानीय स्तर पर निर्माण और सबसे बड़ा आकर्षण है। भारत का 1000 कि.मी. रेंज वाला लॉन्ग रेंज वन वे स्ट्राइक ड्रोन। यानी अब भारतीय तकनीक ना केवल खाड़ी देशों के आसमान की सुरक्षा करेगी बल्कि ओमान की जमीन से तैयार होकर पूरे मिडिल ईस्ट के बाजार में उतरेगी। दरअसल खबर की बारीकियों में जाने से पहले उस पृष्ठभूमि को समझना जरूरी है जहां यह डील हुई है। हाल के महीनों में ईरान, उसके समर्थित गुटों और अन्य क्षेत्रीय ताकतों के बीच संघर्ष ने आधुनिक युद्ध का एक नया चेहरा दिखाया है और वह चेहरा है सस्ते, मारक और झुंड में हमला करने वाले ड्रोनस, चाहे तेल प्रतिष्ठानों पर हमले हो, वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाना हो या सैन्य ठिकानों पर प्रहार, ड्रोन्स ने पारंपरिक रक्षा प्रणालियों के सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है।
इस समझौते पर आईजी डिफेंस के फाउंडर और सीईओ बोधिसत्व संघप्रिया और ओमान की एमएसए ग्लोबल के चेयरमैन कर्नल एम एस एटवाल रिटायर्ड ने हस्ताक्षर किए। इस साझेदारी का सीधा उद्देश्य है भारत की स्वदेशी इंजीनियरिंग और रक्षा क्षमता को ओमान के औद्योगिक ढांचे के साथ जोड़ना। एमएसए ग्लोबल के चेयरमैन कर्नल अटवाल ने इस मौके पर साफ शब्दों में कहा कि खाड़ी में बदलते सुरक्षा माहौल ने यह साबित कर दिया है कि स्थानीय स्तर पर मजबूत रक्षा क्षमताएं विकसित करना कितना जरूरी हो गया है।
भारतीय इंजीनियरिंग और ओमान की विनिर्माण क्षमता का यह मेल आने वाले समय में पूरे जीसी सी क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करेगा। अब बात करते हैं उस कोर टेक्नोलॉजी की जिसे लेकर यह समझौता हुआ है। इस समझौते के तहत आईजी डिफेंस के तीन प्रमुख प्लेटफॉर्म्स को ओमान में सह विकसित और स्थानीय रूप से निर्मित करने की योजना है। चलिए अब जानते हैं वो तीन घातक हथियार जो ओमान में बनेंगे।