भारत में Fuel Crisis का खतरा! 10 साल के निचले स्तर पर तेल भंडार, Pakistan समेत कई एशियाई देश संकट में

By Ankit Jaiswal | May 10, 2026

हाल के दिनों में वैश्विक ऊर्जा बाजार को लेकर चिंताएं तेजी से बढ़ी हैं और इसकी सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में जारी तनाव माना जा रहा है। इसी बीच ताजा आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि दुनिया भर में कच्चे तेल का भंडार तेज़ी से घट रहा है, जिससे आने वाले समय में आपूर्ति संकट और कीमतों में उछाल का खतरा गहराता दिख रहा है।

विशेषज्ञों के मुताबिक मॉर्गन स्टेनली के आंकड़ों से पता चलता है कि एक मार्च से पच्चीस अप्रैल के बीच वैश्विक तेल भंडार में प्रतिदिन लगभग 48 लाख बैरल की गिरावट दर्ज की गई है, जो अब तक की सबसे तेज गिरावटों में से एक मानी जा रही है। इसमें करीब साठ प्रतिशत हिस्सेदारी कच्चे तेल की रही है, जबकि बाकी हिस्से में रिफाइंड उत्पाद शामिल हैं।

गौरतलब है कि ऊर्जा विशेषज्ञ लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि तेल भंडार पूरी तरह खत्म होने से पहले ही एक न्यूनतम स्तर पर पहुंच जाते हैं, जिसे संचालन के लिए जरूरी माना जाता है। जेपी मॉर्गन की विशेषज्ञ नताशा कानेवा के अनुसार तेल भंडार वैश्विक प्रणाली के लिए झटके को सहने का काम करते हैं, लेकिन हर बैरल का उपयोग नहीं किया जा सकता है।

एशियाई देशों पर इसका असर सबसे ज्यादा पड़ता दिख रहा है। मौजूद जानकारी के अनुसार इंडोनेशिया, वियतनाम, पाकिस्तान और फिलीपींस जैसे देश अगले कुछ हफ्तों में ईंधन संकट का सामना कर सकते हैं। वहीं चीन की स्थिति फिलहाल अपेक्षाकृत बेहतर बताई जा रही है। जापान और भारत जैसे बड़े देशों में भी तेल भंडार पिछले दस साल के न्यूनतम स्तर के करीब पहुंच गए हैं।

यूरोप में स्थिति थोड़ी अलग है, जहां जेट ईंधन की कमी सबसे बड़ी चुनौती बनती जा रही है। नीदरलैंड्स के एम्स्टर्डम-रॉटरडैम-एंटवर्प केंद्र पर जेट ईंधन का भंडार एक तिहाई तक घट चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर स्थिति लंबी चली तो आने वाले महीनों में वहां भी गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।

अमेरिका, जो वैश्विक स्तर पर आपूर्ति का बड़ा स्रोत माना जाता है, वहां भी तेल भंडार लगातार गिर रहे हैं। मौजूद जानकारी के अनुसार अमेरिकी भंडार पिछले चार हफ्तों से लगातार कम हो रहे हैं और डीजल व पेट्रोल के भंडार भी सामान्य स्तर से नीचे पहुंच चुके हैं।

इस पूरी स्थिति के बीच कई देशों ने अपने रणनीतिक भंडार का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के समन्वय में करीब 40 करोड़ बैरल तेल जारी करने की योजना बनाई गई है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम केवल अस्थायी राहत दे सकता है, क्योंकि इससे भविष्य के लिए सुरक्षा कवच और कमजोर हो जाएगा।

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