Diesel का क्रेज खत्म? SUV Market में अब भी बादशाहत, लेकिन BS-7 Norms से बढ़ेगी चुनौती

By Ankit Jaiswal | May 10, 2026

भारत में कार बाजार का रुझान पिछले कुछ वर्षों में काफी बदला है, जहां छोटे शहरों और शहरी ग्राहकों ने पेट्रोल, सीएनजी और बिजली से चलने वाले वाहनों की ओर रुख किया है, वहीं दूसरी तरफ बड़ी गाड़ियों के शौकीनों के बीच डीजल की पकड़ अब भी बनी हुई है। खासकर एसयूवी पसंद करने वाले ग्राहक आज भी डीजल इंजन को प्राथमिकता दे रहे हैं।

गौरतलब है कि कड़े उत्सर्जन नियमों और कंपनियों के पेट्रोल, सीएनजी और बिजली आधारित विकल्पों पर ध्यान देने के कारण डीजल धीरे-धीरे छोटे वाहनों से बाहर हो गया है। अब यह ईंधन मुख्य रूप से बड़ी गाड़ियों में सिमटता जा रहा है, जहां ग्राहक ताकत, लंबी दूरी और बेहतर माइलेज को ज्यादा महत्व देते हैं।

इंडस्ट्री एक्सपर्ट का मानना है कि आने वाले समय में लागू होने वाले नए उत्सर्जन मानक यानी बीएस-7 डीजल वाहनों के लिए चुनौती बन सकते हैं। मौजूद जानकारी के अनुसार इन नियमों के कारण डीजल गाड़ियों की लागत में काफी बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे उनकी कीमत 30 हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक बढ़ सकती है।

महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसी कंपनियां, जो लंबे समय से डीजल एसयूवी बाजार में मजबूत स्थिति बनाए हुए हैं, इस बदलाव का फायदा उठा रही हैं। कंपनी के स्कॉर्पियो, थार और बोलेरो जैसे मॉडल की मांग लगातार बनी हुई है। हालांकि कंपनी अब केवल एक ईंधन पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग तकनीकों पर काम कर रही है।

कंपनी के वाहन विभाग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी नलिनीकांत गोल्लागुंटा ने कहा है कि ग्राहकों की जरूरतें अलग-अलग होती हैं, इसलिए कंपनी पेट्रोल, डीजल और बिजली सभी विकल्पों पर ध्यान दे रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पारंपरिक ईंधन वाले वाहन अभी भी कई ग्राहकों के लिए जरूरी बने हुए हैं।

लक्जरी कार बाजार में भी डीजल की मांग पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। मर्सिडीज बेंज इंडिया के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी संतोष अय्यर के अनुसार पिछले तिमाही में उनकी बिक्री का आधे से ज्यादा हिस्सा डीजल मॉडलों से आया है। उन्होंने बताया कि ग्राहक कुल खर्च, रखरखाव और पुनर्विक्रय मूल्य को ध्यान में रखकर फैसला लेते हैं।

ऑटो उद्योग से जुड़े जानकारों रवि भाटिया का कहना है कि अब डीजल सस्ता विकल्प नहीं, बल्कि प्रदर्शन और क्षमता का प्रतीक बन गया है। उनके अनुसार एक करोड़ रुपये तक की एसयूवी खरीदने वाला ग्राहक भी बेहतर ताकत और लंबी दूरी की सुविधा के कारण डीजल को चुन रहा है।

हालांकि सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि बीएस-7 नियम लागू होने के बाद डीजल की यह मजबूत पकड़ कितनी टिकेगी। कीमत बढ़ने पर क्या ग्राहक डीजल के साथ बने रहेंगे या फिर सीएनजी, हाइब्रिड और बिजली जैसे विकल्पों की ओर बढ़ेंगे, यह आने वाला समय तय करेगा। फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि भारत में डीजल अब सस्ते ईंधन के बजाय ताकत और प्रदर्शन से जुड़ा विकल्प बन चुका है।

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