Prabhasakshi Exclusive: युद्ध के लिए खुद को तैयार कर रही है सेना! हजारों करोड़ के आधुनिक सैन्य साजोसामान और Advanced Towed Artillery Gun System क्यों खरीद रहा है भारत?

By नीरज कुमार दुबे | Mar 27, 2025

प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क के खास कार्यक्रम शौर्य पथ में इस सप्ताह हमने ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) से जानना चाहा कि रक्षा मंत्रालय ने हाल ही में 54 हजार करोड़ रुपये के सैन्य साजो सामान की खरीद को मंजूरी दी है। इसमें कौन-कौन से प्रमुख रक्षा उत्पाद शामिल हैं? इसके अलावा सीसीएस ने एटीएजीएस की खरीद के लिए 7,000 करोड़ रुपये के सौदे को मंजूरी दी है इसे कैसे देखते हैं आप? यहां सवाल यह भी है कि जब हम रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने की बात कर रहे हैं तब इतनी बड़ी सैन्य खरीद क्यों कर रहे हैं? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि भारत ने 54,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के सैन्य साजो सामान की खरीद को मंजूरी दी है इसमें हवाई हमला चेतावनी और नियंत्रण विमान प्रणाली, टॉरपीडो और टी-90 टैंकों के लिए इंजन शामिल हैं। उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्रालय ने बताया है कि एक महत्वपूर्ण कदम के तहत रक्षा खरीद परिषद (डीएसी) ने पूंजी अधिग्रहण प्रक्रिया के विभिन्न चरणों में समय सीमा को कम करने के लिए दिशानिर्देशों को भी मंजूरी दी है, ताकि इसे अधिक तेज, अधिक प्रभावी और कुशल बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि ‘अधिक प्रभावी खरीद प्रक्रिया संबंधी निर्णय 2025 को ‘‘सुधार वर्ष’’ के रूप में मनाने की रक्षा मंत्रालय की पहल के अनुरूप है।

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ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता वाली सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीएस) ने भारतीय सेना के लिए 7,000 करोड़ रुपये की लागत से ‘एडवांस्ड टोड आर्टिलरी गन सिस्टम’ (एटीएजीएस) खरीदने के लिए एक बड़े सौदे को मंजूरी दे दी है। उन्होंने कहा कि यह इस तरह की हॉवित्जर तोप के स्वदेशी निर्माण की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि एटीएजीएस पहली स्वदेशी रूप से डिजाइन, विकसित और निर्मित 155 मिमी तोप प्रणाली है तथा इसकी खरीद से भारतीय सेना की अभियानगत क्षमताओं में वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि इस तोप प्रणाली में 52 कैलिबर लंबी बैरल होती है, जो 45 किलोमीटर तक की मारक क्षमता प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि बताया जा रहा है कि इस सौदे के तहत कुल 307 तोप और तोप ले जाने वाले 327 वाहन खरीदे जाएंगे।

ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि भारत की पश्चिमी (पाकिस्तान) और उत्तरी (चीन) सीमाओं पर तोप प्रणाली की तैनाती से सशस्त्र बलों को महत्वपूर्ण रणनीतिक बढ़त मिलेगी, जिससे अभियानगत तैयारी और मारक क्षमता में वृद्धि सुनिश्चित होगी। उन्होंने कहा कि यह मंजूरी स्वदेशी रक्षा विनिर्माण और प्रौद्योगिकी प्रगति में भारत की बढ़ती ताकत को रेखांकित करती है। उन्होंने कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ पहल के प्रमाण एटीएजीएस को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और भारतीय निजी उद्योग भागीदारों के बीच सहयोग के माध्यम से विकसित किया गया है। उन्होंने कहा कि बताया जा रहा है कि इसके 65 प्रतिशत से अधिक उपकरण घरेलू स्तर पर ही प्राप्त किए गए हैं। उन्होंने कहा कि पुरानी हो चुकी 105 मिमी और 130 मिमी तोपों की जगह एटीएजीएस के आने से भारतीय सेना के तोपखाने के आधुनिकीकरण में महत्वपूर्ण मदद मिलने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि तोप प्रणाली के स्वदेशी उत्पादन से वैश्विक रक्षा निर्यात बाजार में भारत की स्थिति मजबूत होने की उम्मीद है, जिससे भविष्य में स्वदेशी रक्षा निर्यात का मार्ग प्रशस्त होगा।

ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि साथ ही रक्षा मंत्रालय ने भारत फोर्ज लिमिटेड और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड के साथ उन्नत टोड आर्टिलरी गन सिस्टम (एटीएजीएस) और हाई मोबिलिटी गन टोइंग वाहनों की खरीद के लिए लगभग 6,900 करोड़ रुपये की लागत वाले अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं। उन्होंने कहा कि इन सौदों के साथ चालू वित्तवर्ष में अब तक पूंजीगत खरीद के लिए मंत्रालय द्वारा कुल 1.40 लाख करोड़ रुपये के अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए गए हैं। उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि 155 मिमी/52 कैलिबर एटीएजीएस, पुरानी और छोटी कैलिबर की तोपों की जगह लेगी और भारतीय सेना की तोपखाने की क्षमताओं को बढ़ाएगी। उन्होंने कहा कि इस तोप प्रणाली की खरीद तोपखाना रेजिमेंटों के आधुनिकीकरण में मील का पत्थर है। इससे परिचालन तत्परता बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि अपनी असाधारण मारक क्षमता के लिए प्रसिद्ध एटीएजीएस, सटीक और लंबी दूरी के हमलों को सक्षम करके सेना की मारक क्षमता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि जहां तक रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की बात है तो आप इन रक्षा उत्पादों पर नजर डालेंगे तो पाएंगे कि अधिकांश घरेलू उत्पादकों से ही खरीदे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूरी तरह रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने में अभी समय लगेगा इसलिए हमें बाहर से भी रक्षा उत्पाद खरीदने ही होंगे ताकि आधुनिकता के मामले में हम किसी से पीछे नहीं रहें। उन्होंने कहा कि आज के युद्धक्षेत्र में वही टिके रह सकते हैं, जो स्थिति के अनुसार बदल सकते हैं और खुद को परिस्थितियों के अनुसार ढाल सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को इस चीज पर ध्यान देना चाहिए कि जो रक्षा खरीद वह कर रही है उसे पूरा होने में ज्यादा समय नहीं लगे। उन्होंने कहा कि अभी दो तीन साल तक किसी खरीद को पूरा होने में लग जाते हैं। उन्होंने कहा कि इसके अलावा हमें इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि जो रक्षा उत्पाद हम बना रहे हैं वह पूर्ण रूप से स्वदेशी हों। उन्होंने कहा कि घरेलू स्तर पर बनाये जा रहे किसी उत्पाद में विदेशी मशीनों की आवश्यकता की वजह से उत्पादन में देरी होती है। उन्होंने कहा कि आप तेजस को ही देख लीजिये। सेना और वायुसेना को उसकी जरूरत है लेकिन अमेरिकी कंपनी जीई से इंजन नहीं आ पाने के चलते उनका उत्पादन लटका हुआ है। उन्होंने कहा कि खबर है कि दो इंजन आ रहे हैं और 12 इंजन अगले साल आयेंगे। उन्होंने कहा कि घरेलू रक्षा उत्पादों के निर्माण के समय हमें तेजस को एक उदाहरण के रूप में रखना चाहिए।

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