Jan Gan Man: भारत में छिप कर रह रहे Bangladeshis को ढूँढ़ने निकली Amit Shah की टीम, Demographic Change बर्दाश्त नहीं होगा

By नीरज कुमार दुबे | Jun 16, 2026

भारत में अवैध घुसपैठ और बदलते जनसंख्या संतुलन को लेकर अब केंद्र सरकार ने निर्णायक कदम उठाने की तैयारी कर ली है। सीमा क्षेत्रों से लेकर महानगरों और औद्योगिक शहरों तक फैले बांग्लादेशी घुसपैठियों के जाल की जांच अब एक उच्च स्तरीय समिति करेगी। मोदी सरकार का स्पष्ट संकेत है कि वर्षों से पहचान छिपाकर रह रहे और फैक्ट्रियों में काम कर रहे अवैध बांग्लादेशियों की अब खैर नहीं है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस पूरी प्रक्रिया को समयबद्ध अभियान का रूप देने की तैयारी शुरू कर दी है।

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को समिति और गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर साफ कर दिया कि यह केवल कागजी अभ्यास नहीं होगा। उन्होंने समिति को सीमा जिलों में जनसंख्या संरचना में आए बदलावों का गहराई से अध्ययन करने का निर्देश दिया। साथ ही महानगरों और औद्योगिक क्षेत्रों में जाकर यह पता लगाने को कहा गया है कि अवैध घुसपैठ का फैलाव किस स्तर तक पहुंच चुका है।

सूत्रों के अनुसार, वर्षों से बड़ी संख्या में बांग्लादेशी घुसपैठिए सीमा पार कर पहले सीमावर्ती इलाकों में ठिकाना बनाते रहे और बाद में दलालों तथा फर्जी दस्तावेज गिरोहों की मदद से महानगरों और औद्योगिक शहरों तक पहुंच गए। वहां उन्होंने आधार जैसे पहचान पत्र हासिल कर लिए और फैक्ट्रियों, निर्माण स्थलों तथा अन्य क्षेत्रों में काम करने लगे। यही कारण है कि अब जांच केवल सीमा तक सीमित नहीं रखी गई है, बल्कि शहरों और उद्योग क्षेत्रों को भी दायरे में लाया गया है।

हम आपको याद दिला दें कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने समिति के गठन के समय स्पष्ट कहा था कि देश के कई हिस्सों में जनसंख्या परिवर्तन सामान्य जन्म और मृत्यु दर के कारण नहीं, बल्कि बाहरी और असामान्य कारणों से हो रहे हैं। इनमें अवैध घुसपैठ, अनियमित जनसंख्या आवाजाही और प्रशासनिक लापरवाही प्रमुख कारण बताए गए हैं। गृह मंत्रालय का मानना है कि इन बदलावों का असर अब केवल सीमावर्ती क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शहरी केंद्रों, औद्योगिक गलियारों, आदिवासी इलाकों और सामाजिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों तक पहुंच चुका है।

सरकार के अनुसार, इस बदलाव का सीधा असर सार्वजनिक सेवाओं, स्थानीय प्रशासन, संसाधनों के वितरण और सामाजिक संतुलन पर पड़ रहा है। कई क्षेत्रों में स्थानीय आबादी खुद को असुरक्षित महसूस कर रही है। यही वजह है कि केंद्र सरकार अब इस पूरे मामले को राष्ट्रीय सुरक्षा और देश की संप्रभुता से जोड़कर देख रही है।

अमित शाह पहले भी कह चुके हैं कि जनसंख्या परिवर्तन केवल आंकड़ों का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, कानून व्यवस्था, सामाजिक ढांचे और आदिवासी समाज की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। उन्होंने कहा था कि समिति देशभर में हो रहे असामान्य जनसंख्या बदलावों का वैज्ञानिक अध्ययन करेगी और धार्मिक तथा सामाजिक समुदायों के स्तर पर हो रहे परिवर्तनों का भी विश्लेषण करेगी।

इस समिति में जनगणना आयुक्त के अलावा पूर्व आईएएस अधिकारी दुर्गा शंकर मिश्रा, पूर्व आईपीएस अधिकारी बालाजी श्रीवास्तव और डॉक्टर शामिका रवि को सदस्य बनाया गया है। गृह मंत्रालय के विदेशी प्रकोष्ठ से जुड़े संयुक्त सचिव को समिति का सदस्य सचिव नियुक्त किया गया है। समिति को एक वर्ष के भीतर अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपनी होगी।

समिति का सबसे महत्वपूर्ण काम अवैध प्रवासियों की पहचान, हिरासत और निष्कासन के लिए स्थायी और व्यवस्थित व्यवस्था सुझाना होगा। सरकार चाहती है कि ऐसी प्रणाली बने जो कानूनी, निष्पक्ष और समयबद्ध हो ताकि वर्षों से देश में रह रहे अवैध घुसपैठियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की जा सके।

समिति यह भी जांच करेगी कि किन आर्थिक अवसरों, सीमा पार गतिविधियों और सामाजिक परिस्थितियों के कारण असामान्य बसावट बढ़ी। खास तौर पर उन क्षेत्रों की पहचान की जाएगी जहां जनसंख्या संरचना व्यापक राष्ट्रीय प्रवृत्तियों से अलग दिशा में बदल रही है।

राजनीतिक दृष्टि से भी यह कदम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि असम, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल जैसे घुसपैठ प्रभावित राज्यों में भारतीय जनता पार्टी की सरकार और उसकी मजबूत राजनीतिक उपस्थिति है। ऐसे में आने वाले समय में अवैध बांग्लादेशियों के खिलाफ बड़े स्तर पर पहचान और निष्कासन अभियान चलने के संकेत साफ दिखाई दे रहे हैं। देखा जाये तो मोदी सरकार के तेवर से यह स्पष्ट है कि अब सीमा पार कर भारत में घुसकर पहचान बदलकर रहने वालों के दिन आसान नहीं रहने वाले। चाहे सीमा के गांव हों या महानगरों की फैक्ट्रियां, हर जगह अब जांच की आंच पहुंचने वाली है।

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