By अभिनय आकाश | Oct 04, 2025
भारत के मुख्य न्यायाधीश, बीआर गवई ने ज़ोर देकर कहा कि भारत क़ानून के शासन से संचालित होने वाला देश है, जहाँ शासन संविधान और क़ानून के ज़रिए चलता है, न कि मनमानी या सत्ता के ज़रिए। मॉरीशस में क़ानून के शासन स्मारक व्याख्यान में बोलते हुए, मुख्य न्यायाधीश गवई ने कहा कि सत्ता में बैठे लोगों सहित हर व्यक्ति को क़ानून का पालन करना चाहिए। उन्होंने स्वीकार किया कि ऐतिहासिक रूप से, कानून के नाम पर अन्याय किया गया है, जैसे गुलामी या औपनिवेशिक कानून, लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वास्तविक कानून वह है जो न्याय, समानता और निष्पक्षता को कायम रखता है। मुख्य न्यायाधीश गवई ने 'बुलडोजर शासन' की भी आलोचना की और कहा कि बिना सुनवाई या कानूनी प्रक्रिया के किसी का घर गिराना कानून के शासन का उल्लंघन है।
केशवानंद भारती मामला (1973): न्यायालय ने फैसला सुनाया कि संसद संविधान के मूल ढांचे में बदलाव नहीं कर सकती।
मेनका गांधी मामला (1978): न्यायालय ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक कानून न्यायसंगत, निष्पक्ष और उचित होना चाहिए।
तीन तलाक मामला (2017): न्यायालय ने इस प्रथा को मनमाना और असंवैधानिक घोषित किया।
चुनावी बांड मामला (2024): न्यायालय ने राजनीतिक दलों के वित्तपोषण में पारदर्शिता की आवश्यकता पर बल दिया।