By अभिनय आकाश | Oct 31, 2026
आज दुनिया की नजरें एक बार फिर भारत पर टिकी है। वजह है समुंदर के रास्ते तैरता हुआ ईंधन। जिसके बिना दुनिया की अर्थव्यवस्था का जो पहिया है वो थम सकता है। यानी कि डीजल की वजह से। एक तरफ पश्चिम एशिया में तनाव है और दूसरी तरफ रूस यूक्रेन युद्ध के चलते दुनिया भर में डीजल का भीषण संकट गहराया हुआ है। दूसरी तरफ भारत ने इस वैश्विक संकट के बीच में एक नया मुकाम हासिल कर लिया है। अक्टूबर के महीने में भारत का जो डीजल निर्यात है वो 13 महीनों के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है और अब भारत दुनिया में समुद्र के रास्ते डीजल का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक बन चुका है। भारत ने इस रेस में रूस जैसे बड़े एक्सपोर्टर को भी पीछे छोड़ दिया है। अमेरिकी विदेश मंत्री जब हाल ही में भारत आए थे तो उन्होंने भारत को रिफाइनिंग सुपर पावर करार दिया था और यही सुपर पावर अब अपनी ताकत दिखा रही है। लेकिन सवाल यह उठता है कि जब देश अपनी जरूरत का 88% से ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है वो देश अचानक दुनिया का सबसे बड़ा डीजल सप्लायर कैसे बन गया और क्या इस भारी निर्यात से भारत की अर्थव्यवस्था को फायदा हो रहा है। कमोडिटी मार्केट एनालिटिक्स फर्म कैप्लर के ताजा आंकड़ों के मुताबिक अक्टूबर के महीने में भारत ने 71 मिलियन बैरल पर डे डीजल निर्यात किया है। यह आंकड़ा पिछले महीने यानी कि सितंबर के मुकाबले 19.6% ज्यादा है। और अगर पिछले साल की अक्टूबर से हम इसकी तुलना करें तो यह 8.1% की बढ़त है। और इस पूरे एक्सपोर्ट के बड़े खेल में जो सबसे बड़ा खिलाड़ी दिखाई देता है वो निजी क्षेत्र की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्री है।
यूरोप और अमेरिका जैसे बड़े बाजारों में जब सप्लाई की कमी हुई तो कीमतें आसमान छूने लगी। रिफाइनिंग मार्जिन यानी कि क्रूड ऑयल से डीजल बनाने का जो मुनाफा है वो सुपर नॉर्मल स्तर पर पहुंच गया। भारत के पास जामनगर जैसी दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी है जो 100% से अधिक क्षमता पर काम कर रही है। भारत ने तुरंत इस मौके को भुनाया और यूरोप से लेकर अफ्रीका और अमेरिका तक डीजल की आपूर्ति को शुरू कर दिया। इसलिए भारतीय डीजल एक्सपोर्ट इतना बढ़ा है। लेकिन यहां इस खबर का सबसे पेचीदा आर्थिक पहलू सामने आता है। जिसे समझना बहुत जरूरी होता है। बाहर से देखने में यह लगता है कि भारत तेल बेचकर बहुत सारा पैसा कमा रहा है। लेकिन यह बात आधी सच है क्योंकि सच यह है कि डीजल बनाने के लिए जो कच्चा तेल भारत खरीद रहा है, वह भी बहुत महंगे दामों पर आ रहा है।
भारत अपनी जरूरत का 88% से ज्यादा कच्चा तेल इंपोर्ट करता है। ऑल pries.com के अनुसार भारत को क्रूड इंपोर्ट के लिए औसतन $123 प्रति बैरल तक की ऊंची कीमत चुकानी पड़ रही है। वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में भारत का क्रूड ऑयल इंपोर्ट बिल जो था वो $90 अरब डॉलर तक पहुंच गया। जो पिछले साल की इसी अवधि से $29 अरब डॉलर ज्यादा है। पहले भारत को रूस से भारी डिस्काउंट पर कच्चा तेल मिल रहा था। लेकिन अब वो डिस्काउंट लगभग खत्म हो चुका है और शिपिंग की जो लागत है वो भी बढ़ गई है। यानी कि कच्चा तेल भी महंगा हो गया है।