LAC पर तनाव के बीच तेजी से सामरिक रूप से मजबूत हो रहा है भारत

By योगेश कुमार गोयल | Oct 07, 2020

एलएसी पर जहां दोनों देशों की सेनाओं और हथियारों का जमावड़ा बढ़ रहा है, वहीं चीनी चुनौतियों का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए भारत द्वारा निरन्तर बड़े कदम उठाए जा रहे हैं। चीन के साथ चल रहे टकराव के बीच अब सेना द्वारा देश की उत्तरी तथा पूर्वी सीमाओं पर छह पिनाक रॉकेट रेजीमेंट बनाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। इसी के तहत डीआरडीओ द्वारा पिनाक रॉकेट और लांचरों का बड़े पैमाने पर उत्पादन करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इन 6 पिनाक रेजीमेंट्स में 114 लांचर तैनात होंगे, जिसके लिए टीपीसीएल तथा एलएंडटी से ऑटोमेटेड गन एमिंग एंड पोजिशनिंग सिस्टम और 45 कमांड पोस्ट्स खरीदे जाएंगे। इसके अलावा 330 वाहन बीईएमएल से खरीदे जाएंगे। पिनाक रॉकेट तथा लांचरों के बड़े स्तर पर उत्पादन की प्रक्रिया शुरू करने के बारे में डीआरडीओ अध्यक्ष डॉ. जी सतीश रेड्डी का कहना है कि पिनाक रॉकेट सिस्टम सेनाओं की आवश्यकता को पूरा करने में लंबा रास्ता तय करेगा। पिनाक रॉकेट को मल्टी-बैरल रॉकेट लांचर से छोड़ा जाता है, जो महज 44 सेकेंड के भीतर 12 पिनाक रॉकेट दागने में सक्षम है। पिनाक सिस्टम की एक बैटरी में छह लांच व्हीकल होते हैं, साथ ही लोडर सिस्टम, रडार और नेटवर्क सिस्टम से जुड़ी एक कमांड पोस्ट होती है। एक बैटरी के जरिये एक वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को पूरी तरह ध्वस्त किया जा सकता है।

रॉकेट दागने के लिए भारत के पास पहले ‘ग्राड’ नामक रूसी सिस्टम हुआ करता था।

डीआरडीओ द्वारा 1980 के दशक में उसी के विकल्प के तौर पर भगवान शिव के धनुष ‘पिनाक’ के नाम पर पिनाक रॉकेट सिस्टम विकसित करना शुरू किया गया था। पिनाक मिसाइल ‘पिनाक गाइडेड रॉकेट लांच सिस्टम’ का अपग्रेड संस्करण है। सतह से हवा में मार करने वाली यह मिसाइल मैदानी तथा अर्द्ध-रेगिस्तानी इलाकों में सैन्य टुकडि़यों की रक्षा में महत्वपूर्ण सहायता प्रदान देगी। मिसाइल परीक्षण के दौरान इस मिसाइल से 44 सैकेंड के भीतर कुल 12 गाइडेड रॉकेट दागे गए थे और सभी निशाने पूरी तरह अचूक रहे। भारत में वर्ष 1986 में पिनाक वैपन सिस्टम का निर्माण शुरू किया गया था और इसके प्रारंभिक प्रारूप का विकास डीआरडीओ द्वारा वर्ष 1995 में किया गया था। शुरूआती दौर में इसे दुश्मन की सेना के एयर टर्मिनल (वायुयान पत्तन) तथा संचार केन्द्र को ध्वस्त करने हेतु विकसित किया गया था, जिसे बाद के वर्षों में बहुउद्देशीय रॉकेट प्रणाली के रूप में विकसित किया गया और अब इसी रॉकेट प्रणाली को मिसाइल के रूप में विकसित किया गया है। वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय सेना ने पिनाक एमके-1 संस्करण का इस्तेमाल किया था, जिसने पहाड़ की चोटियों पर तैनात पाकिस्तानी चौकियों को बड़ी सटीकता के साथ निशाना बनाते हुए उन्हें तबाह किया था। पिनाक के जरिये बेहद सटीक तरीके से दुश्मन के बंकर तबाह किए जाने के कारण पाकिस्तानी सैनिक उन बंकरों से बाहर निकलने को विवश हुए थे, जिसके बाद भारतीय सेना ने उन्हें भून डाला था। कारगिल युद्ध में पिनाक की बड़ी सफलता के बाद इसे बड़ी संख्या में भारतीय सेना में शामिल कर लिया गया।

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पिनाक वैपन सिस्टम के उन्नत संस्करण ‘पिनाक एमके-2’ में विशिष्ट गाइडेंस किट लगाई गई है, जो एडवांस नेविगेशन तथा कंट्रोल सिस्टम से लैस है। इसका नेविगेशन ‘इंडियन रीजनल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम’ (आईआरएनएसएस) के जरिये किया जाता है, जिसे ‘नाविक’ भी कहा जाता है। नाविक से लैस होने के बाद पिनाक की सटीक मारक क्षमता में वृद्धि हो गई है। दरअसल पिनाक के पुराने संस्करण में गाइडलाइन सिस्टम नहीं था और अब इसे एडवांस गाइडलाइन सिस्टम से लैस किए जाने के बाद इसके जरिये भारतीय सेना दुश्मन के किसी भी तरह के हमले का जवाब देने में सक्षम हो गई है। पिनाक के पुराने वर्जन में किए गए इन बदलावों के बाद इसकी मारक दूरी, क्षमता और लक्ष्य को भेदने की सटीकता काफी बढ़ गई है। 214 मिलीमीटर बैरल वाले 12 रॉकेट से लैस पिनाक वैपन सिस्टम का पहला संस्करण जहां अपने लक्ष्य पर 40 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से हमला करने में सक्षम था, वहीं नया संस्करण लक्ष्य पर 80 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से हमला करने में सक्षम है।

प्रत्येक पिनाक मिसाइल सिस्टम 12 रॉकेटों से लैस होता है और हर रॉकेट पर 250 किलोग्राम का वारहेड लदा होता है। पिनाक एमके-1 संस्करण की मारक दूरी 40 किलोमीटर थी जबकि पिनाक एमके-2 की शुरूआती मारक दूरी को बढ़ाकर 65 किलोमीटर किया गया और मई 2018 में इसे बढ़ाकर 70 किलोमीटर कर दिया गया। अब इसे एडवांस नेविगेशन तथा कंट्रोल सिस्टम से लैस करने के बाद इसकी मारक दूरी 75 किलोमीटर हो गई है और भारतीय सेना हमारी सीमा से ही पिनाक मिसाइलों के जरिये हमला कर पाकिस्तान के लाहौर को पूरी तरह बर्बाद करने में सक्षम हो गई है। इसके अलावा एलएसी पर चीनी सेना के भी होश उड़ा सकती है। डीआरडीओ द्वारा 120 किलोमीटर मारक दूरी वाले ‘पिनाक एमके-3’ का विकास भी जारी है। सिर्फ 44 सेकेंड में 12 मिसाइलें अर्थात् 4 सेकेंड से भी कम समय में एक मिसाइल दागने में सक्षम पिनाक मिसाइल सिस्टम दुश्मन के लिए इतना खतरनाक है कि यह दुश्मन को संभलने का मौका दिए बगैर उस पर गाइडेड मिसाइलों की बौछार करते हुए उसे तबाह कर देता है। पिनाक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि टाटा ट्रक पर स्थापित होने के चलते इसे बड़ी आसानी से कहीं भी ले जाया जा सकता है और इसकी यही मोबिलिटी इसे बेहद अचूक और दुश्मन के लिए मारक बना देती है।

-योगेश कुमार गोयल

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार तथा सामरिक मामलों के विश्लेषक हैं)

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