By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Nov 03, 2026
(योषिता सिंह) संयुक्त राष्ट्र, तीन नवंबर भारत और इजराइल ने क्षेत्रीय एवं उपक्षेत्रीय स्तर पर पारंपरिक हथियारों पर नियंत्रण से संबंधित पाकिस्तान और बेलारूस के मसौदा प्रस्ताव के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र महासभा में मतदान किया। भारत ने कहा कि देशों की सुरक्षा संबंधी चिंताएं केवल क्षेत्रीय सीमाओं तक सीमित नहीं होती हैं। सामान्य और पूर्ण निरस्त्रीकरण : क्षेत्रीय एवं उपक्षेत्रीय स्तर पर पारंपरिक हथियारों पर नियंत्रण शीर्षक वाले इस मसौदा प्रस्ताव को सोमवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा की प्रथम समिति ने मंजूरी दी।
भारत के वोट की वजह बताते हुए संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के प्रथम सचिव अनमोल शेर बेदी ने कहा कि पारंपरिक हथियारों पर नियंत्रण एक वैश्विक मुद्दा है। संयुक्त राष्ट्र महासभा की प्रथम समिति में भारत के मतदान के स्पष्टीकरण के दौरान बेदी ने कहा, हम इस बात से पूरी तरह सहमत नहीं हैं कि इस मुद्दे पर मुख्य रूप से क्षेत्रीय और उपक्षेत्रीय संदर्भों में ही आगे बढ़ा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत ने अपनी पिछली स्थिति के अनुरूप इस प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया है।
भारत ने प्रस्ताव में संयुक्त राष्ट्र निरस्त्रीकरण आयोग से ऐसे सिद्धांत तैयार करने पर विचार करने के अनुरोध पर भी सवाल उठाया, जो पारंपरिक हथियारों पर क्षेत्रीय समझौतों के लिए रूपरेखा का काम कर सकें। बेदी ने कहा, हमने इस अनुरोध को कुछ जिज्ञासा के साथ देखा है। उन्होंने कहा कि आयोग 1993 में क्षेत्रीय निरस्त्रीकरण पर दिशानिर्देश और सिफारिशें, 1999 में पारंपरिक हथियार नियंत्रण एवं निरस्त्रीकरण पर दिशानिर्देश और 2017 में पारंपरिक हथियारों के क्षेत्र में व्यावहारिक विश्वास बहाली उपायों पर सिफारिशें सर्वसम्मति से पहले ही स्वीकार कर चुका है।
बेदी ने कहा, इसका मतलब है कि इसी विषय पर इसी आयोग में सर्वसम्मति से तीन नतीजे पहले ही सामने आ चुके हैं, जबकि अब उसी आयोग से नए सिरे से शुरुआत करने को कहा जा रहा है। उन्होंने कहा, हम यह समझने में असमर्थ हैं कि जिस विषय पर पहले ही व्यापक विचार-विमर्श हो चुका है, उस पर फिर से चर्चा की जरूरत क्यों है, जब तक कि इसका उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र की निरस्त्रीकरण व्यवस्था को व्यस्त रखना नहीं है। बेदी ने क्षेत्रीय या उपक्षेत्रीय स्तर पर रक्षा क्षमताओं के बीच संतुलन बनाए रखने के प्रस्ताव के दृष्टिकोण पर भी आपत्ति जताई।
उन्होंने कहा, इसमें यह मान लिया गया है कि देशों की सुरक्षा संबंधी चिंताएं विनम्रतापूर्वक उनकी क्षेत्रीय सीमाओं पर समाप्त हो जाती हैं। ऐसा नहीं है। उन्होंने कहा, जैसा कि सभी जानते हैं, सुरक्षा संबंधी चिंताएं सीमित रूप से परिभाषित क्षेत्रों और उपक्षेत्रों से आगे तक फैली होती हैं।
इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी क्षेत्र या उपक्षेत्र में संतुलन बनाए रखने की अवधारणा अवास्तविक प्रतीत होती है। प्रस्ताव में कहा गया है कि पारंपरिक हथियारों पर नियंत्रण का प्रयास मुख्य रूप से क्षेत्रीय और उपक्षेत्रीय संदर्भों में किया जाना चाहिए, क्योंकि शीत युद्ध के बाद के दौर में शांति और सुरक्षा के लिए अधिकांश खतरे मुख्य रूप से एक ही क्षेत्र या उपक्षेत्र में स्थित देशों के बीच पैदा होते हैं। इसमें क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा को हथियारों और सैन्य बलों के न्यूनतम संभव स्तर पर मजबूत करने के उद्देश्य से समझौतों को बढ़ावा देने की इच्छा भी जताई गई है।
भारत ने दक्षिण एशिया के संदर्भ में पारंपरिक हथियार नियंत्रण से संबंधित प्रस्तावों का उल्लेख करने वाले एक पैराग्राफ के खिलाफ भी अलग से मतदान किया। इस पैराग्राफ में विभिन्न क्षेत्रों में की गई पहलों, जिनमें कुछ लातिन अमेरिकी देशों के बीच परामर्श और दक्षिण एशिया के संदर्भ में पारंपरिक हथियार नियंत्रण के प्रस्ताव शामिल हैं, का विशेष रूप से उल्लेख किया गया था। इसमें क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए पारंपरिक हथियार नियंत्रण की प्रासंगिकता को भी स्वीकार किया गया था।
प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि सैन्य दृष्टि से महत्वपूर्ण देशों और अधिक सैन्य क्षमता वाले देशों की क्षेत्रीय सुरक्षा संबंधी समझौतों को बढ़ावा देने में विशेष जिम्मेदारी है।