Vanakkam Poorvottar: Bangladeshi Infiltrators के खिलाफ सबसे बड़ा एक्शन शुरू, देशभर में अलर्ट, BSF और पुलिस एक्शन में

By नीरज कुमार दुबे | Jun 18, 2026

असम से लेकर गुजरात, पश्चिम बंगाल से लेकर गुरुग्राम तक जिस तरह अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों, दलालों और उन्हें संरक्षण देने वाले नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई तेज हुई है, उसने पूरे देश में हलचल मचा दी है। सबसे चौंकाने वाली घटना असम के कछार जिले में सामने आई, जहां भारतीय सीमा के भीतर से एक किसान को उठाकर बांग्लादेश ले जाया गया। इस घटना ने सीमा सुरक्षा और घुसपैठ के खतरनाक गठजोड़ को पूरी तरह उजागर कर दिया है।

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यह घटना केवल एक किसान के अपहरण की नहीं थी, बल्कि यह भारत की सीमा को चुनौती देने की खुली हिमाकत थी। करीब दस घंटे तक रंजीत दास को बांग्लादेश की सीमा के भीतर एक घर में बंधक बनाकर रखा गया। अपहरणकर्ताओं ने उन पर हमला भी किया और कहा कि वे किसी पुराने विवाद का बदला लेने के लिए उन्हें उठा लाए हैं। बाद में सीमा सुरक्षा बल और बांग्लादेश सीमा रक्षक बल के बीच कई दौर की बैठकें हुईं, जिसके बाद रात सवा नौ बजे किसान को वापस सौंपा गया। स्थानीय विधायक कमलाख्या डे पुरकायस्थ ने साफ कहा कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने खुद दिल्ली तक समन्वय कर किसान की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित कराई।

लेकिन सवाल यह है कि आखिर भारतीय सीमा के भीतर घुसकर किसी नागरिक का अपहरण करने की हिम्मत कहां से आई? देखा जाये तो इस प्रश्न का जवाब उन अवैध नेटवर्कों में छिपा है, जिन पर अब देशव्यापी शिकंजा कसना शुरू हुआ है।

गुजरात में चलाया गया अभियान डेल्टा हंट हाल के वर्षों की सबसे बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। इस अभियान में पांच सौ से अधिक संदिग्ध अवैध बांग्लादेशी पकड़े गए। छह हजार से अधिक संदिग्ध मोबाइल संपर्कों का विश्लेषण किया गया, शहरों और ग्रामीण इलाकों में एक साथ छापेमारी हुई और उन लोगों की पहचान की गई जो घुसपैठियों को नौकरी, आश्रय और नकली दस्तावेज उपलब्ध करा रहे थे। यह केवल गिरफ्तारी नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क को तोड़ने की निर्णायक शुरुआत मानी जा रही है।

पश्चिम बंगाल में भी स्थिति गंभीर बनी हुई है। वहां बनाए गए होल्डिंग सेंटरों में कई संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों को रखा गया है। बसीरहाट जैसे सीमावर्ती इलाकों में सबसे अधिक धरपकड़ हुई है। सीमा चौकियों पर लौटाए जा रहे लोगों की लंबी कतारें दिखाई दे रही हैं, जहां दस्तावेजों और पहचान की कड़ी जांच की जा रही है। राज्य सरकार अब दलालों और घुसपैठ कराने वाले गिरोहों के खिलाफ तेज कार्रवाई की तैयारी में है।

पूर्वोत्तर भारत में तो यह मुद्दा और अधिक संवेदनशील बन चुका है। असम ने अवैध घुसपैठ के खिलाफ पुशबैक नीति अपनाई है। अरुणाचल प्रदेश ने निगरानी बढ़ा दी है और मेघालय ने केंद्र से जनजातीय पहचान और सांस्कृतिक संतुलन बचाने के लिए सख्त कदम उठाने की मांग की है। इन राज्यों का मानना है कि लगातार हो रही घुसपैठ केवल सुरक्षा संकट नहीं, बल्कि जनसंख्या संतुलन बदलने की बड़ी साजिश भी है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि देश में अब डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट नीति लागू होगी। यानी पहचान करो, दस्तावेज खत्म करो और वापस भेजो। इसी कड़ी में सीमा पर बाड़ मजबूत की जा रही है और सीमा सुरक्षा बल तथा बांग्लादेश सीमा रक्षक बल के बीच उच्च स्तरीय वार्ताएं भी तेज हुई हैं। सरकार का संदेश साफ है कि अब अवैध घुसपैठ और उसके नेटवर्क को किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

इसी बीच, हरियाणा के गुरुग्राम से सामने आया खुलासा बेहद चौंकाने वाला है। यहां पुलिस ने तेरह अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़ा, जो शहर के निर्माण स्थलों पर बेहद जोखिम भरे काम कर रहे थे। जांच में सामने आया कि ठेकेदार उन्हें जानबूझकर ऊंची इमारतों पर मचान लगाने और जान जोखिम में डालने वाले कामों में लगाते थे, क्योंकि वे कम मजदूरी पर तैयार हो जाते थे। पुलिस को शक है कि यह पूरा नेटवर्क संगठित तरीके से काम कर रहा था।

पुलिस के अनुसार ये लोग पश्चिम बंगाल के कालियागंज सीमा क्षेत्र से एजेंटों की मदद से भारत में घुसे और फिर गुरुग्राम पहुंचे। सेक्टर उनहत्तर, सत्तर और एक सौ चार में निर्माण स्थलों और झुग्गियों में छापेमारी कर इन्हें पकड़ा गया। अब पुलिस उन ठेकेदारों और उपठेकेदारों की जांच कर रही है जिन्होंने अवैध रूप से रह रहे लोगों को रोजगार दिया। दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं और यह पता लगाया जा रहा है कि शहर में ऐसे कितने नेटवर्क सक्रिय हैं।

बहरहाल, देश के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर कब तक सीमाओं की आड़ लेकर अवैध घुसपैठिए भारत की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और सामाजिक ढांचे में सेंध लगाते रहेंगे? असम में किसान का अपहरण हो, गुजरात में पकड़े गए सैकड़ों संदिग्ध हों या गुरुग्राम में चल रहा अवैध श्रमिक नेटवर्क, हर घटना एक ही चेतावनी दे रही है कि खतरा केवल सीमा पर नहीं, बल्कि देश के भीतर गहराई तक फैल चुका है। अब यह लड़ाई केवल घुसपैठियों के खिलाफ नहीं, बल्कि उन पूरे तंत्रों के खिलाफ है जो लालच, राजनीति और मुनाफे के लिए देश की सुरक्षा को दांव पर लगा रहे हैं।

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