By Ankit Jaiswal | Aug 03, 2026
भारत के मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की रफ्तार जुलाई में कुछ धीमी जरूर पड़ी है, लेकिन उद्योग अभी भी विस्तार के रास्ते पर बना हुआ है। ताजा सर्वेक्षण के अनुसार नए ऑर्डर मिलने की गति कमजोर हुई है, जिससे उत्पादन और कच्चे माल की खरीद पर असर पड़ा है। हालांकि विदेशी बाजारों से मांग बढ़ने और लागत का दबाव कम होने से उद्योगों को कुछ राहत मिली है।
सर्वेक्षण में कहा गया है कि जुलाई का यह स्तर अगस्त 2021 के बाद सबसे कम है। नए ऑर्डर मिलने की रफ्तार भी पिछले चार वर्षों में दूसरी सबसे कमजोर रही है। कई कंपनियों ने बताया कि विज्ञापन गतिविधियों और बाजार में बनी हुई मांग से बिक्री को कुछ सहारा मिला, लेकिन कठिन कारोबारी माहौल और कुछ प्रमुख उत्पादों में ग्राहकों की घटती रुचि के कारण वृद्धि सीमित रही है।
गौरतलब है कि घरेलू मांग की तुलना में विदेशी बाजारों से बेहतर संकेत मिले हैं। नए निर्यात ऑर्डर पहले की तुलना में तेज गति से बढ़े हैं। कंपनियों ने कनाडा, मिस्र, इंडोनेशिया, केन्या, नेपाल, दक्षिण अफ्रीका, थाईलैंड और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों से बेहतर मांग मिलने की जानकारी दी है। इससे निर्यात आधारित उद्योगों का भरोसा मजबूत हुआ है।
एचएसबीसी की मुख्य भारत अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने कहा कि आपूर्ति श्रृंखला की स्थिति में सुधार देखने को मिला है और आपूर्तिकर्ताओं से सामग्री मिलने में लगने वाला समय कम हुआ है। हालांकि पश्चिम एशिया में फिर बढ़े तनाव ने उद्योगों की चिंताओं को पूरी तरह खत्म नहीं होने दिया है। इसी कारण कई कंपनियां भविष्य की संभावित बाधाओं को देखते हुए कच्चे माल और तैयार उत्पादों का अतिरिक्त भंडार तैयार कर रही हैं।
मौजूद जानकारी के अनुसार, परिवहन खर्च बढ़ने के बावजूद कुल लागत दबाव पिछले पांच महीनों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। इसके बावजूद कई कंपनियों ने अपने लाभ को सुरक्षित रखने के लिए उत्पादों की बिक्री कीमतों में हल्की बढ़ोतरी की है। इससे संकेत मिलता है कि कंपनियां बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों तक पहुंचा रही हैं।
बता दें कि रोजगार सृजन की रफ्तार भी लगातार तीसरे महीने धीमी रही है। जुलाई में नई नियुक्तियों की गति पिछले 29 महीनों की सबसे कमजोर रही। वहीं उपभोक्ता वस्तुओं के क्षेत्र में नए ऑर्डर और उत्पादन दोनों की वृद्धि अपेक्षाकृत कमजोर रही, जबकि मध्यवर्ती और पूंजीगत वस्तुओं का प्रदर्शन बेहतर रहा है।