By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Apr 27, 2026
भारत और न्यूजीलैंड वस्तुओं एवं सेवाओं के द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने तथा निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए एक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर सोमवार को यानी आज हस्ताक्षर करेंगे। यह समझौता दोनों पक्षों द्वारा सहमत वास्तविक तय तारीख से लागू होगा। इस समझौते के मुख्य रणनीतिक लाभ को समझें- मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए)- एफटीए दो या अधिक देशों के बीच एक आर्थिक व्यवस्था है जिसमें वे आपस में व्यापार होने वाली अधिकतम वस्तुओं पर सीमा शुल्क समाप्त करने या काफी हद तक कम करने पर सहमत होते हैं।
16 मार्च 2025 : वार्ता फिर से शुरू 22 दिसंबर 2025 : वार्ता पूरी होने की घोषणा 27 अप्रैल 2026 : एफटीए पर हस्ताक्षर होने तय इस समझौते में 20 पाठ शामिल हैं जिनमें वस्तुओं का व्यापार, मूल नियम, सेवाएं, सीमा शुल्क एवं व्यापार सुगमता, एसपीएस, टीबीटी, व्यापार उपाय, विवाद निपटान और कानूनी प्रावधान शामिल हैं। भारत के लिए लाभ- भारत के सभी उत्पाद जिनमें श्रम-प्रधान क्षेत्र जैसे कपड़ा, प्लास्टिक, चमड़ा और इंजीनियरिंग सामान शामिल हैं.. न्यूजीलैंड में शून्य शुल्क पर प्रवेश करेंगे। वहां औसत आयात शुल्क केवल 2.3 प्रतिशत है।
न्यूजीलैंड ने 15 वर्ष में 20 अरब डॉलर के निवेश (एफडीआई) का वादा किया है। भारत को आईटी, आईटी-आधारित सेवाएं, पेशेवर सेवाएं, शिक्षा, वित्तीय सेवाएं, पर्यटन, निर्माण और अन्य व्यावसायिक सेवाओं सहित कई उच्च-मूल्य सेवा क्षेत्रों में अवसर मिले हैं। कुशल भारतीय पेशेवरों के लिए अस्थायी रोजगार प्रवेश वीजा का नया मार्ग खुलेगा जिसमें किसी भी समय 5,000 वीजा का कोटा होगा और अधिकतम तीन साल तक रहने की अनुमति होगी। भारत से वाइन एवं स्पिरिट्स का निर्यात शुल्क-मुक्त होगा जबकि न्यूजीलैंड की वाइन भारत में रियायती शुल्क पर आएगी जिसे 10 वर्ष में धीरे-धीरे कम किया जाएगा।
न्यूजीलैंड के लिए लाभ- भारत ने अपने ऑस्ट्रेलिया समझौते के मॉडल पर 70 प्रतिशत शुल्क श्रेणियों (उत्पाद श्रेणियों) पर बाजार पहुंच दी है। एफटीए लागू होने के पहले दिन से न्यूजीलैंड के 54.11 प्रतिशत निर्यात पर भारत में शून्य शुल्क मिलेगा। इनमें भेड़ का मांस, ऊन, कोयला और वन एवं लकड़ी उत्पाद शामिल हैं। सेब, कीवी, मनुका शहद और एल्ब्यूमिन (दूध एल्ब्यूमिन सहित) जैसे कृषि उत्पादों पर शुल्क में रियायत (लेकिन कोटा एवं न्यूनतम आयात मूल्य (एमआईपी) के साथ) मिलेगी। मसल्स और सैल्मन जैसे समुद्री उत्पादों पर शुल्क सात वर्ष में समाप्त होगा।
लोहा, इस्पात और स्क्रैप एल्युमिनियम की कई वस्तुओं पर शुल्क 10 वर्षों या उससे कम समय में समाप्त किया जाएगा। एवोकाडो और पर्सिमन पर आयात शुल्क 10 वर्ष में खत्म किया जाएगा। संवेदनशील वस्तुएं- किसानों और सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) के हितों की रक्षा के लिए भारत ने दुग्ध, पशु उत्पाद, सब्जियां, चीनी, तांबा और एल्युमिनियम जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में कोई शुल्क रियायत नहीं दी है। दुग्ध (दूध, क्रीम, व्हे, दही, पनीर आदि), पशु उत्पाद (भेड़ के मांस को छोड़कर) सब्जियां (प्याज, चना, मटर, मक्का, बादाम आदि), चीनी, कृत्रिम शहद, पशु/वनस्पति/सूक्ष्मजीव वसा व तेल, हथियार व गोला-बारूद, रत्न व आभूषण, तांबा व उससे बने उत्पाद, एल्युमिनियम व उससे बने उत्पाद इसमें शामिल नहीं हैं।
निवेश- न्यूजीलैंड ने 15 वर्ष में भारत में 20 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीए) लाने का वादा किया है। अप्रैल 2000 से दिसंबर 2025 के बीच भारत को लगभग 8.9 करोड़ डॉलर का ही एफडीआई प्राप्त हुआ था। भारत के लिए एफटीए का महत्व- यह समझौता भारत को एक उच्च-आय, नियम-आधारित प्रशांत बाजार तक पहुंच मजबूत करने में मदद करेगा और उसकी हिंद-प्रशांत आर्थिक रणनीति को समर्थन देगा। न्यूजीलैंड के लिए यह दुनिया की तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक में अधिक सुरक्षित प्रवेश का अवसर देता है।
न्यूजीलैंड में तीन लाख से अधिक भारतीय मूल के लोग (करीब पांच प्रतिशत आबादी) व्यापार और निवेश के लिए मजबूत कड़ी प्रदान करते हैं। आसान वीजा और कम शिक्षा लागत से सेवाओं आदि से व्यापार को बढ़ावा मिल सकता है। द्विपक्षीय व्यापार- वित्त वर्ष 2024-25 में द्विपक्षीय वस्तु व्यापार 1.3 अरब डॉलर रहा (निर्यात 71.1 करोड़ मिलियन डॉलर, आयात 58.71 करोड़ डॉलर)।
2024 में कुल वस्तु एवं सेवा व्यापार लगभग 2.4 अरब डॉलर रहा जिसमें सेवाओं का व्यापार 1.24 अरब डॉलर था। भारत के निर्यात में विमान ईंधन, दवाएं, मोटर वाहन, पेट्रोलियम उत्पाद, रेडीमेड कपड़े और मशीनरी शामिल हैं। आयात में लकड़ी एवं लकड़ी उत्पाद, लोहा-इस्पात, कच्ची ऊन, डेयरी उत्पाद, स्क्रैप धातु, कोयला और कृषि से जुड़े उत्पाद शामिल हैं।