प्रस्तावित अमेरिकी शुल्क पर भारत ने जताई कड़ी आपत्ति, कहा- द्विपक्षीय वार्ता से निकले समाधान

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Jul 11, 2026

भारत ने अमेरिका के साथ व्यापार से जुड़े मुद्दों को एकतरफा कदमों के बजाय आपसी और द्विपक्षीय बातचीत के माध्यम से सुलझाने की जरूरत पर बल दिया है। इसी कड़ी में भारत ने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) से प्रस्तावित 12.5 प्रतिशत के भारी-भरकम शुल्क पर फिर से विचार करने का आग्रह किया है। भारत का कहना है कि बंधुआ मजदूरी से संबंधित मामलों पर यूएसटीआर द्वारा 'धारा 301' के तहत की गई जांच में कई तरह की विसंगतियां और बुनियादी खामियां मौजूद हैं।

यूएसटीआर की वेबसाइट पर उपलब्ध सुनवाई के विवरण के अनुसार, भारतीय पक्ष ने कहा है कि अमेरिकी प्रशासन का यह फैसला देशव्यापी शुल्क लगाने का कोई भी तार्किक कारण नहीं बताता। यह प्रक्रिया अनुचित रूप से भारत सहित 46 अलग-अलग अर्थव्यवस्थाओं को एक ही श्रेणी में लाकर खड़ा कर देती है। भारत ने यह भी रेखांकित किया कि इस जांच की पद्धति ही दोषपूर्ण है, क्योंकि यह केवल कुछ चुनिंदा मामलों और सामान्य व्यापारिक प्रवृत्तियों के आधार पर निष्कर्ष निकालती है, जबकि इसमें देश-विशिष्ट या क्षेत्र-विशिष्ट स्तर पर कोई पुख्ता प्रमाण नहीं दिए गए हैं।

इसके अतिरिक्त, भारतीय पक्ष ने कहा कि इस जांच में ऐसा कोई भी तथ्य साबित नहीं हो पाया है कि भारत में आयात प्रतिबंध की कमी की वजह से अमेरिकी उद्योगों को नुकसान पहुंचाने वाला कोई गलत या अनुचित प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिल रहा है। बृज मोहन मिश्रा ने आग्रह किया कि यूएसटीआर अपनी रिपोर्ट की कमियों को देखते हुए प्रस्तावित शुल्क के फैसले की समीक्षा करे। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत आपसी व्यापार से जुड़ी किसी भी विशेष चिंता को दूर करने के लिए यूएसटीआर के साथ सतत संवाद और परामर्श बनाए रखने के लिए हमेशा तैयार है।

इस सुनवाई के दौरान कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) की ओर से पक्ष रखते हुए वाशिंगटन स्थित भारतीय दूतावास के प्रथम सचिव श्रेयांश गुप्ता ने चावल आयात से जुड़े आरोपों को खारिज किया। उन्होंने भारत में कथित तौर पर बंधुआ मजदूरी से उत्पादित चावल के आयात पर की गई टिप्पणियों का पुरजोर विरोध किया। गुप्ता ने बताया कि भारत का चावल आयात बेहद सीमित दायरे में होता है और यह केवल खास किस्मों की जरूरतों को पूरा करने तक ही सीमित रहता है। साथ ही, इस तरह के आयातित चावल के निर्यात पर कड़े नियामक नियंत्रण भी लागू हैं।

दूसरी ओर, देश के प्रमुख उद्योग संगठनों फिक्की (FICCI) और सीआईआई (CII) ने भी इस प्रस्तावित शुल्क का कड़ा विरोध किया है। इन व्यापारिक संगठनों का कहना है कि अमेरिकी प्रशासन के इस कदम से न केवल भारतीय निर्यातकों पर बल्कि स्वयं अमेरिकी कंपनियों और आम उपभोक्ताओं पर भी अतिरिक्त लागत का बड़ा बोझ बढ़ेगा। गौरतलब है कि यूएसटीआर ने इस साल मार्च में 'धारा 301' के तहत यह जांच शुरू की थी और अंतिम फैसला लेने से पहले सभी संबंधित पक्षों से मिलीं टिप्पणियों पर विचार किया जाएगा।

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