India-Oman FTA लागू, भारतीय Exports के लिए Middle East का दरवाजा खुला, Zero-Duty का मिलेगा लाभ

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Jun 02, 2026

भारत और ओमान के बीच मुक्त व्यापार समझौता खाड़ी क्षेत्र की अस्थिरता के बीच भारत की ऊर्जा एवं आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करेगा। विशेषज्ञों ने यहराय जताई है। दोनों देशों के बीच यह व्यापार समझौता एक जून से लागू हो गया है। शोध संस्थान सीआरएफ के अध्यक्ष शिशिर प्रियदर्शी ने कहा, ‘‘ पहला, यह अस्थिर क्षेत्र में भारत की ऊर्जा एवं आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करता है। ओमान लंबे समय से खाड़ी में भारत के सबसे भरोसेमंद साझेदारों में से एक रहा है।’’

प्रियदर्शी ने कहा, ‘‘ इसलिए इस मुक्त व्यापार समझौते का महत्व केवल द्विपक्षीय व्यापार आंकड़ों से कहीं अधिक है। यह महत्वपूर्ण आर्थिक संबंधों को सुरक्षित करने, भारतीय उद्योग के लिए नए अवसर उत्पन्न करने और यह संकेत देने के बारे में है कि भारत वैश्विक व्यापार एवं संपर्क के अगले चरण को आकार देने में अग्रणी भूमिका निभाना चाहता है।’’ अंतरराष्ट्रीय व्यापार विशेषज्ञ एवं हाई-टेक गियर्स के चेयरमैन दीप कपूरिया ने भी इसी तरह के विचार व्यक्त करते हुए कहा कि इस व्यापार समझौते के लागू होने से भारत को न केवल ओमान बल्कि पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र में अपनी बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने में मदद मिलेगी।

उन्होंने कहा, ‘‘ इस समझौते के लागू होने की तारीख से ओमान को सभी निर्यात पर शून्य-शुल्क बाजार पहुंच, सरल नियामकीय प्रक्रियाएं और कम अनुपालन आवश्यकताओं के साथ भारतीय निर्यातक विभिन्न उत्पाद श्रेणियों में अपनी उपस्थिति बढ़ाने के लिए अच्छी स्थिति में हैं।’’ कपूरिया ने कहा कि हालांकि ओमान अपेक्षाकृत छोटा बाजार है लेकिन यह इंजीनियरिंग, दवा, कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, समुद्री उत्पाद, वस्त्र, रसायन, इलेक्ट्रॉनिक, रत्न एवं आभूषण जैसे प्रमुख क्षेत्रों में निर्यात के अवसर प्रदान करता है।

आर्थिक शोध संस्थान ‘ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव’ (जीटीआरआई) के अनुसार, भारत के लिए ओमान के साथ व्यापार समझौता रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि मस्कट का अधिकतर तट होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर स्थित है। इससे क्षेत्रीय संघर्ष, व्यवधान या भू-राजनीतिक अस्थिरता के दौरान भी ओमान, भारत के लिए एक भरोसेमंद व्यापार और ऊर्जा मार्ग बना रह सकता है। वित्त वर्ष 2025-26 में ओमान को भारत का निर्यात लगभग चार अरब अमेरिकी डॉलर रहा। इसमें पेट्रोल (78.1 करोड़ डॉलर) और नेफ्था (74.6 करोड़ डॉलर) जैसे परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पाद प्रमुख रहे।

इसके बाद कैल्साइंड एल्युमिना (27.7 करोड़ डॉलर), लौह एवं इस्पात उत्पाद (23 करोड़ डॉलर), मशीनरी (17.8 करोड़ डॉलर) और चावल (16.7 करोड़ डॉलर) का स्थान रहा। दूसरी ओर, 2025-26 में भारत ने ओमान से 7.2 अरब अमेरिकी डॉलर का आयात किया। इसमें कच्चा तेल (1.6 अरब डॉलर), तरलीकृत प्राकृतिक गैस (1.2 अरब डॉलर) और उर्वरक (84.3 करोड़ डॉलर) की मात्रा सबसे अधिक रही।

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