India Open 2026: दिल्ली की हवा पर विदेशी खिलाड़ियों की चिंता, आयोजन व्यवस्था पर उठे सवाल

By Ankit Jaiswal | Jan 16, 2026

जनवरी में दिल्ली कैसी होती है, यह यहां रहने वाले हर शख्स को पता है। सुबह की धुंध, गले में खराश और भारी हवा अब किसी पहेली की तरह नहीं लगती। शायद इसी वजह से इंडिया ओपन 2026 में उठा विवाद केवल बैडमिंटन तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह उस सोच पर भी सवाल खड़ा कर रहा है, जिसमें हालात को नियति मानकर तैयारी से समझौता कर लिया जाता है।

गौरतलब है कि लो ने यह भी कहा कि मलेशिया में उनकी फिटनेस अच्छी थी, लेकिन दिल्ली आते ही मौसम और हवा का फर्क साफ महसूस हुआ है। इस बयान का मतलब साफ था कि खिलाड़ी अपनी ट्रेनिंग, रिकवरी और खानपान पर जितना भी ध्यान दें, खराब हवा के लिए शरीर को तैयार नहीं किया जा सकता है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, चिकित्सा विशेषज्ञ भी इस चिंता को जायज मानते हैं। मुंबई के एक वरिष्ठ फेफड़ा रोग विशेषज्ञ का कहना है कि हाई-इंटेंसिटी खेलों में खिलाड़ियों को तेजी और गहराई से सांस लेनी पड़ती है, जिससे प्रदूषित हवा सीधे शरीर में जाती है। ऐसे में अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों तरह के खतरे बढ़ जाते हैं और खिलाड़ियों को अनावश्यक जोखिम में डालना उचित नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि खिलाड़ियों के लिए कम से कम 50 से नीचे का एक्यूआई होना चाहिए।

यह विवाद तब और गहरा गया जब डेनमार्क के एंडर्स एंटोनसेन ने ‘अत्यधिक प्रदूषण’ का हवाला देते हुए टूर्नामेंट से नाम वापस ले लिया। बता दें कि उन्होंने एक्यूआई के आंकड़े भी साझा किए और इसके बावजूद उन पर बैडमिंटन विश्व फेडरेसन की ओर से जुर्माना लगाए जाने की खबर सामने आई है। इससे पहले डेनमार्क की ही मिया ब्लिचफेल्ड्ट भी आयोजन स्थल की सफाई और हालात को लेकर नाराजगी जता चुकी हैं।

इसी बीच टूर्नामेंट के दौरान कोर्ट पर पक्षी की बीट गिरने से खेल रुकना और स्टैंड्स में बंदर दिखने जैसी घटनाओं ने हालात को और प्रतीकात्मक बना दिया है। इन घटनाओं ने उस आधिकारिक दावे को कमजोर कर दिया है, जिसमें सब कुछ सामान्य होने की बात कही जाती रही है। कुल मिलाकर, इंडिया ओपन 2026 अब केवल एक खेल आयोजन नहीं रह गया है, बल्कि यह इस सवाल का केंद्र बन गया है कि अंतरराष्ट्रीय खेलों की मेजबानी में स्वास्थ्य और योजना को कितनी गंभीरता से लिया जा रहा है।

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