India-Pak Ceasefire: Trump की मध्यस्थता झूठी! पूर्व CDS बोले- DGMOs ने किया फैसला

By अंकित सिंह | Aug 26, 2026

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस दावे को पूर्व चीफ ऑफ़ डिफेंस स्टाफ़ जनरल अनिल चौहान ने खारिज कर दिया है कि उन्होंने 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम में मध्यस्थता की थी। जनरल चौहान ने कहा कि यह समझौता सीधे दोनों देशों के मिलिट्री ऑपरेशन्स के डायरेक्टर जनरल (DGMOs) के बीच हुआ था। मंगलवार को नई दिल्ली में विवेकानंद इंटरनेशनल फ़ाउंडेशन के एक कार्यक्रम में बोलते हुए, चौहान ने कहा कि वह सीज़फ़ायर के सिर्फ़ मिलिट्री पहलू के बारे में ही बात कर सकते हैं, लेकिन यह साफ़ था कि इस फ़ैसले में कोई तीसरा पक्ष शामिल नहीं था।

उन्होंने कहा कि यह खास जानकारी अमेरिकियों तक कैसे पहुँची कि हमारे घोषणा करने से पहले ही उन्होंने ट्वीट कर दिया? सच कहूँ तो मुझे पक्का नहीं पता, लेकिन यह हमारी तरफ़ से लीक नहीं हुई थी। उन्होंने आगे कहा कि दोनों पक्षों ने अपनी DGMO-स्तर की बातचीत के बारे में गोपनीयता बनाए रखी थी और कहा कि उन्हें लगता है कि यह जानकारी पाकिस्तानी पक्ष की ओर से लीक हुई होगी। ट्रंप ने बार-बार 10 मई, 2025 को हुए उस सीज़फ़ायर का श्रेय खुद को दिया है, जिसने 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिनों तक चली सैन्य लड़ाई को खत्म किया।

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10 मई को ट्रंप ने सोशल मीडिया पर घोषणा की कि भारत और पाकिस्तान "पूरी तरह और तुरंत सीज़फ़ायर" के लिए सहमत हो गए हैं। उन्होंने इसे अमेरिका की मध्यस्थता में हुई लंबी बातचीत का नतीजा बताया। तब से अमेरिकी राष्ट्रपति ने बार-बार लड़ाई रुकने का श्रेय अमेरिका के कूटनीतिक और आर्थिक दबाव को दिया है। अपने इस दावे के ताज़ा वर्शन में, ट्रंप ने 31 जुलाई को कहा कि भारत और पाकिस्तान बहुत गुस्से में थे और अमेरिका की ओर से भारी टैरिफ लगाने की धमकी ने लड़ाई खत्म करने में मदद की।

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