UNSC सुधारों में देरी पर UN में भड़का भारत, कहा कुछ देशों के हितों के लिए नहीं रुकेगी प्रक्रिया

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Jul 29, 2026

संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत ने कहा है कि सुरक्षा परिषद में सुधार को लेकर अब तक 17 दौर की वार्ता हो चुकी है लेकिन कोई ठोस परिणाम नजर नहीं आया है। राजदूत ने कहा कि इस प्रक्रिया को कुछ देशों के ‘‘विभाजनकारी हितों’’ के कारण बाधित नहीं होने दिया जा सकता। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने सुरक्षा परिषद में सुधार से संबंधित अंतर-सरकारी वार्ता (आईजीएन) को अपने अगले सत्र तक जारी रखने का मंगलवार को फैसला किया।

इसे भी पढ़ें: ऑनलाइन ठगी केंद्रों पर काम कराने के लिए लोगों की तस्करी कर रहे आपराधिक नेटवर्क: संयुक्त राष्ट्र एजेंसी

भारत ने ‘सुरक्षा परिषद में समान प्रतिनिधित्व और इसकी सदस्य संख्या में वृद्धि के प्रश्न’ पर अंतर-सरकारी वार्ता को 81वें सत्र तक जारी रखने संबंधी मौखिक मसौदा निर्णय को अपनाने का समर्थन किया लेकिन उसने ठोस परिणाम हासिल करने की दिशा में प्रगति नहीं होने और कुछ सदस्य देशों द्वारा प्रक्रिया को बाधित करने के प्रयासों की कड़ी आलोचना की। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पर्वतनेनी हरीश ने मंगलवार को कहा, ‘‘पिछले सत्रों की तरह अंतर-सरकारी वार्ता का 80वां सत्र भी ऐसे किसी परिणाम या पहल पर सहमति बनाने में सफल नहीं रहा जिससे वास्तविक सुधारों को लागू करने का मार्ग प्रशस्त हो सके। विभिन्न विषयों पर हुई चर्चाओं में सदस्य देशों और समूहों ने मोटे तौर पर अपने पहले से ज्ञात रुख को ही दोहराया।’’ अंतर-सरकारी वार्ता को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र तक जारी रखने संबंधी मौखिक निर्णय को अपनाए जाने के अवसर पर हरीश ने भारतीय दर्शन का उल्लेख किया, जिसके अनुसार आत्मा मोक्ष प्राप्त करने से पहले जन्म और मृत्यु के चक्रों से गुजरती है तथा हर बार कुछ प्रगति करती है।

इसे भी पढ़ें: भारत के ऐलान से UN में भूचाल, 190 देशों में सन्नाटा

उन्होंने कहा, ‘‘अंतर-सरकारी वार्ता अब तक 17 चक्रों से गुजर चुकी है लेकिन दुख की बात है कि अभी तक मुक्ति नजर नहीं आ रही। दुनिया को और कितने समय तक इंतजार करना होगा?’’ भारत ने सुधार प्रक्रिया की धीमी गति की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देश न्यूयॉर्क में बैठकर हर सत्र में अपने पुराने रुख को दोहराते रहते हैं और इस बीच असल दुनिया में संयुक्त राष्ट्र को उद्देश्य के अनुरूप बनाने की उम्मीद कमजोर होती जाती है। हरीश ने कहा, ‘‘दुनियाभर में संघर्षों में सार्थक हस्तक्षेप करने में सुरक्षा परिषद की अक्षमता को लेकर सदस्य देशों और वैश्विक नागरिकों में साफ तौर पर निराशा है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक स्पष्ट और अत्यावश्यक है। इसे कुछ चुनिंदा सदस्य देशों के संकीर्ण और विभाजनकारी हितों के कारण बाधित नहीं होने दिया जा सकता।’’ उन्होंने कहा कि ऐसे सुधार हासिल करने का रास्ता स्पष्ट है- निर्धारित समयसीमा एवं लक्ष्यों के साथ लिखित मसौदे पर आधारित वार्ता। भारत ने कहा कि इस तरह के गंभीर प्रयास का परिणाम सुरक्षा परिषद की स्थायी और अस्थायी, दोनों श्रेणियों में विस्तार के रूप में सामने आना चाहिए तथा इसमें ‘ग्लोबल साउथ’ को अधिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।

इसे भी पढ़ें: जलवायु परिवर्तन: अमीर देशों में बढ़ेगा एसी का इस्तेमाल, गरीब देशों में बढ़ेंगी मौतें, रिपोर्ट में दावा

‘ग्लोबल साउथ’ से तात्पर्य उन देशों से है जिन्हें अक्सर विकासशील, कम विकसित अथवा अविकसित के रूप में जाना जाता है और ये मुख्य रूप से अफ्रीका, एशिया और लातिन अमेरिका में स्थित हैं। हरीश ने कहा, ‘‘भारत इस प्रयास में योगदान देने के लिए पूरी तरह तैयार है। हमें पूरी उम्मीद है कि अंतर-सरकारी वार्ता का 81वां सत्र इस दिशा में एक नयी शुरुआत करेगा।’’ विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस महीने की शुरुआत में 2028-29 के कार्यकाल के लिए सुरक्षा परिषद की अस्थायी सीट पर भारत की उम्मीदवारी का आधिकारिक प्रचार अभियान शुरू किया था।

प्रमुख खबरें

CWG 2026: Harjinder Kaur और Gulveer Singh ने जीता Silver Medal, मुक्केबाजी में भारत का शानदार प्रदर्शन

Sawan 2026 में क्यों जरूरी है Satvic Diet? आयुर्वेद ने बताया कमजोर Digestive System का पूरा विज्ञान

बाघों की घटती आबादी पर विराम की चुनौती अभी भी बरक़रार?

Guru purnima 2026: गुरु पूर्णिमा पर्व है आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण