By अभिनय आकाश | Oct 10, 2026
अमेरिकी बिजनेसमैन एलन मस्क भारत में सेटेलाइट आधारित स्टार लिंक इंटरनेट सर्विस शुरू करना चाहते हैं। लेकिन उनका मकसद पैसे कमाना नहीं है। उनकी नजर अरबों भारतीयों के डाटा पर है। डिजिटल युग में कहा जाता है कि डाटा इज द न्यू ऑयल यानी डाटा नया तेल है। यानी डाटा तेल से भी ज्यादा कीमती है। एक तरफ एललेन मस्क की नजर करोड़ों भारतीयों के डाटा पर है तो वहीं भारत ने इसी डाटा को सुरक्षित करने के लिए पहली बार लेजर लाइट से एक्सपेरिमेंट कर दिखाया है। भारत ने हवा में लेजर लाइट की मदद से एक ऐसा डिजिटल डाटा भेजा है जिसे दुनिया का कोई भी हैकर ना तो रास्ते में देख सकता है और ना ही चुरा सकता है। डिजिटल सुरक्षा के क्षेत्र में यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है और भारत ने अपने बल पर इसका पहला सफल परीक्षण कर लिया है। आज आप इंटरनेट कंप्यूटर या डिजिटल दुनिया में जो कुछ कर रहे हैं वो सब कुछ डाटा के रूप में रिकॉर्ड हो रहा है। आपका नाम, आपका फोन नंबर, आपकी उम्र, आपकी तस्वीर, आपके द्वारा देखा गया YouTube वीडियो या Amazon पर सर्च किया गया कोई भी सामान। यह सब डाटा है। सोचिए आपके पास अगर किसी इंसान की इतनी जानकारी होगी, उसकी पसंद, नापसंद और उसके व्यवहार को देखने की चाबी होगी तो आप उस व्यक्ति को कंट्रोल कर सकते हैं। सोचिए कि भारत के 140 करोड़ लोगों की ऐसी ही जानकारी आपके पास हो तो आप देश में क्या-क्या नहीं कर सकते।
5.56 km का यह प्रयोग इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें सैटेलाइट-आधारित क्वांटम कम्युनिकेशन के लिए ज़रूरी कई तकनीकों का परीक्षण किया जाता है। वायुमंडल में क्षैतिज रूप से यात्रा करने वाले लेज़र या क्वांटम सिग्नल को अशांति, धूल, शोर और अलाइनमेंट (संरेखण) जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ज़मीन पर इन चुनौतियों का परीक्षण करने से तकनीक को अंतरिक्ष के लिए तैयार करने में मदद मिलती है। ISRO इस पर पहले से ही काम कर रहा है। आने वाले टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेशन मिशन के लिए इसका 'क्वांटम टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेशन इन स्पेस' (QuTDS) पेलोड तैयार करके, टेस्ट करने के बाद सौंप दिया गया है। इस पेलोड में एक ऑप्टिकल सिस्टम है जो किसी दूसरे स्टेशन की ओर इशारा कर सकता है और क्वांटम सिग्नल भेज सकता है।