By अभिनय आकाश | Oct 09, 2026
सऊदी अरब के दो बड़े एयरपोर्ट पर हुए हमलों ने एक बार फिर यमन की जंग को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। आभा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और राजधानी रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट को पिछले दो दिनों में निशाना बनाया गया। सऊदी अधिकारियों के मुताबिक इन हमलों में तीन लोगों की मौत हुई और 36 लोग घायल हुए। आभा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर दो लोगों की मौत और 28 लोग घायल हुए। जबकि किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर एक व्यक्ति की मौत और आठ लोग घायल हुए। इन हमलों की जिम्मेदारी यमन के हूती विद्रोहियों ने ली है। हूतियों ने रियाद के किंग खालिद एयरपोर्ट को बैलेस्टिक मिसाइल और ड्रोन से निशाना बनाने का दावा किया है। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन का कहना है कि उसने एक बैलेस्टिक मिसाइल को इंटरसेप्ट किया और बाद में हूं सैन्य ठिकानों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की। हालांकि दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र रूप से पूरी पुष्टि हर मामले में नहीं हो पाई है। भारत ने इसी घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना स्वीकार्य नहीं है। विदेश मंत्रालय ने हमलों में मारे गए लोगों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की।
यमन में सऊदी समर्थित सरकारी बलों ने हूतियों के खिलाफ बड़ा जवाबी अभियान शुरू किया है। खासतौर पर लाल सागर और बाबल मंदेव के आसपास के इलाकों में लड़ाई तेज हुई है। सऊदी नेतृत्व वाला गठबंधन यमन में सरकारी बलों को हवाई समर्थन दे रहा है। जबकि हूती अपने नियंत्रण वाले इलाकों से मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहे हैं। संघर्ष का दायरा केवल सऊदी एयरपोर्ट तक ही सीमित नहीं है। यमन के अदन इंटरनेशनल एयरपोर्ट को भी मिसाइल और विस्फोटक ड्रोन से निशाना बनाए जाने की खबर है। एक मिसाइल रनवे के पास उस समय गिरी जब काहिरा से आने वाली उड़ान के उतरने का समय था। यानी अब यमन के भीतर और उसके आसपास नागरिक विमानन भी सीधे युद्ध के जोखिम में आ गया है। ऐसे में भारत की प्रतिक्रिया केवल एक कूटनीतिक बयान नहीं है। भारत के लिए सऊदी अरब की स्थिरता और खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा सीधे महत्वपूर्ण है। बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक खाड़ी देशों में रहते और काम करते हैं। वहीं भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार के लिहाज से भी यह क्षेत्र बेहद अहम है। इस पूरे घटनाक्रम में ईरान का पहलू भी महत्वपूर्ण है। सऊदी अरब और उसके सहयोगी लंबे समय से हूतियों पर ईरान से हथियार, प्रशिक्षण और वित्तीय समर्थन मिलने का आरोप लगाते रहे हैं। हूती और ईरान इन आरोपों को खारिज करते हैं।