मोदी के दौर में जापान से बेहद मजबूत हुए हैं भारत के सामरिक और आर्थिक रिश्ते

By प्रह्लाद सबनानी | Mar 30, 2022

भारत और जापान के बीच आध्यात्मिक बंधुत्व एवं सांस्कृतिक सभ्यता पर आधारित आपसी संबंधो का एक लम्बा इतिहास रहा है। वैसे तो भारत और जापान के आपसी रिश्तों की नींव 1600 ईस्वीं तक पीछे चली जाती है परंतु हाल ही के समय में इन रिश्तों में बहुत गर्माहट आई है। आज भारत और जापान के आपसी रिश्ते बहुत गहरे स्तर पर चले गए हैं। वैसे पिछले 70 वर्षों से दोनों देशों के बीच आपसी आर्थिक रिश्ते अबाध रूप से चल रहे हैं और अब तो सामरिक दृष्टि से भी भारत और जापान एक दूसरे के बहुत करीब आ रहे हैं और यह बहुत ही महत्वपूर्ण है। भारत में सबसे अधिक विदेशी निवेश करने वाले कुछ बड़े देशों में जापान भी एक बड़े निवेशक के रूप में शामिल है। वहीं दूसरी ओर जापान में भारत के कुशल श्रमिकों की बहुत बड़ी संख्या कार्यरत है।

भारत में जापान का लगातार बढ़ रहा विदेशी निवेश भारत के लिए बहुत अच्छी खबर है। 3.5 लाख करोड़ येन की इतनी बड़ी राशि के निवेश के लक्ष्य को समय सीमा के अंदर हासिल करना जापान की भारत के प्रति गहरी आस्था को दर्शाता है। अब जापान ने यह घोषणा की है कि आगे आने वाले 5 वर्षों के दौरान जापान भारत में 5 लाख करोड़ येन का नया निवेश करेगा। इस समय भारत में लगभग 100 के आसपास जापान की बड़ी कम्पनियां पहले से ही कार्य कर रही हैं। इन कम्पनियों द्वारा भी भारत में अपने कार्य के विस्तार की योजना बनाई जा रही है। भारत द्वारा हाल ही में लागू की गई उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत भी जापान की कम्पनियों द्वारा बहुत बड़ी राशि का निवेश भारत में किया जा रहा है। क्लीन एनर्जी के क्षेत्र में भी जापान अपना निवेश भारत में बढ़ाने जा रहा है।

भारत और जापान के आपसी रिश्ते एक दूसरे पर गहरे विश्वास पर आधारित है। एक ओर जहां तकनीकी एवं नवोन्मेष के क्षेत्र में जापान ने भारत की बहुत मदद की है तो दूसरी ओर भारत ने जापान को सूचना तकनीकी (आईटी) के क्षेत्र में बहुत मदद की है। अभी हाल ही में  जापान में एक सर्वे किया गया था जिसमें यह तथ्य उभरकर सामने आया है कि आगे आने वाले समय में भारत, जापान का सबसे बड़ा आर्थिक साझीदार बनने की ओर अग्रसर है। 

चीन की विस्तरवादी नीतियों को देखते हुए वर्तमान समय में हिंद महासागर एवं प्रशांत महासागर क्षेत्र में जापान एवं भारत दोनों देशों के सामरिक सम्बंधों के बीच मजबूती आना आज की आवश्यकता बन गया है। अन्यथा चीन इस क्षेत्र में अपना दबदबा बढ़ाने में सफल हो जाएगा। आर्थिक क्षेत्र में भी चीन के साथ प्रतिस्पर्धा करने की दृष्टि से जापान और भारत मिलकर कार्य कर रहे हैं। भारत और जापान ने आपस में मिलकर बांग्लादेश में एक बड़े प्रोजेक्ट पर कार्य प्रारम्भ कर दिया है। इस प्रकार जापान और भारत मिलकर चीन का मुकाबला करने का प्रयास कर रहे हैं। यूक्रेन एवं रूस के बीच चल रहे युद्ध के बीच भारत, क्वॉड नामक संगठन में शामिल तीनों अन्य सदस्य देशों को, यह समझाने में सफल रहा है कि इस युद्ध को आपसी बातचीत से ही समाप्त किया जा सकता है एवं युद्ध किसी भी समस्या का स्थायी हल नहीं हो सकता है। भारत के इस विचार पर जापान ने तुरंत अपनी सहमति प्रदान की थी जिससे अन्य दो सदस्य देशों- आस्ट्रेलिया एवं अमेरिका, को भी इस विचार पर राजी करने में आसानी हुई थी और इस प्रकार क्वॉड ने इस युद्ध में खुले रूप में रूस अथवा यूक्रेन में से किसी भी देश का पक्ष नहीं लिया है। 4 देशों के क्वॉड नामक संगठन में भी भारत और जापान अपने आप को एक दूसरे के बहुत करीब पाते हैं। जब रूस और चीन के आपसी रिश्ते कुछ हद्द तक मजबूत होते जा रहे हैं ऐसे में सामरिक दृष्टि से भी देखा जाये तो जापान और भारत के रिश्ते भी मजबूत होने ही चाहिए।

इसे भी पढ़ें: यूक्रेन मामले पर हर राष्ट्र अपना स्वार्थ देख रहा है तो भारत क्या गलत कर रहा है?

अभी हाल ही के समय में दिनांक 19 मार्च 2022 को जापान के प्रधानमंत्री माननीय फुमियो किशिदा दो दिन की भारत यात्रा पर आए थे। अपनी इस यात्रा के दौरान जापान के प्रधानमंत्री ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय आर्थिक, सामरिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को और अधिक मजबूत बनाने सहित अन्य कई मुद्दों पर चर्चा हुई। इसी चर्चा के दौरान जापान के प्रधानमंत्री ने यह घोषणा भी की कि जापान अगले पांच सालों के दौरान भारत में 42 अरब डॉलर का निवेश करेगा। यह यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इस वर्ष दोनों देशों के राजनयिक संबंधों की 70वीं वर्षगांठ मनायी जा रही है। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कुल छह समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं। जापान लंबे समय से भारत के शहरों के बुनियादी ढांचे के विकास में मदद कर रहा है। भारत जापान आर्थिक साझेदारी में पिछले कई वर्षों में अभूतपूर्व प्रगति हुई है। आज भारत, जापान एवं चीन एशिया के तीन बड़े आर्थिक पावर हाउस हैं। इनमें से दो देश भारत और जापान आपस में मिलकर कार्य कर रहे हैं जबकि चीन एकला चलो की नीति पर चल रहा है उसके जापान एवं भारत दोनों ही देशों से बहुत अच्छे रिश्ते नहीं हैं। जापान आज भारत के कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर कार्य कर रहा है। इसी क्रम में मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल प्रोजेक्ट में अच्छी प्रगति हो रही है। आज दोनों देश आपस में मिलकर “वन टीम- वन प्रोजेक्ट” के दृष्टिकोण के साथ काम कर रहे हैं। उक्त दृष्टिकोण को अपनाने के चलते जापान के साथ भारत की आर्थिक साझेदारी और भी ज्यादा मजबूत हुई है। दोनों देशों की साझेदारी से इंडो-पेसिफिक क्षेत्र और पूरे विश्व में ही शांति स्थापित करने में मदद मिलेगी। अब तो दक्षिण कोरिया भी प्रयासरत है कि भारत के साथ अपने आर्थिक रिश्ते और अधिक मजबूत करे। जापान, भारत के साथ यदि दक्षिण कोरिया भी जुड़ जाता है तो त्रिपक्षीय आर्थिक, सामरिक और सांस्कृतिक सम्बन्धों को और अधिक मजबूत करने में मदद मिलेगी। 

निवेश के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों में भी जापान के साथ रिश्ते तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। जैसे, सप्लाई चैन के क्षेत्र में भी दोनों देश अब मिलकर कार्य कर रहे हैं। प्राग्रेस, प्रॉस्पेरिटी और पार्ट्नर्शिप भारत जापान सम्बन्धों के मूल में हैं। हालांकि सप्लाई चैन के क्षेत्र में वियतनाम, इंडोनेशिया, थाईलैंड, म्यांमार आदि देशों ने जापान के साथ मिलकर अधिक लाभ उठाया है परंतु अब भारत भी इस क्षेत्र में आगे आकर लाभ उठाने का प्रयास कर रहा है। शुरुआती दौर में तो चीन ने भी सप्लाई चैन के क्षेत्र में बहुत अधिक लाभ प्राप्त किया परंतु अब परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं। भारत ने जब से उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना की घोषणा की है तभी से जापानी कम्पनियां न केवल विनिर्माण के क्षेत्र में अपनी नई इकाईयों को भारत में लगाने पर विचार कर रही हैं बल्कि सप्लाई चैन के क्षेत्र में भी वे भारत में ही आना चाहती हैं।

बदली हुई परिस्थितियों में व्यापार एवं उद्योग अब दूरसंचार पर ही संचालित होने वाला है अतः साइबर सुरक्षा का महत्व भी बहुत बढ़ता जा रहा है। भारत और जापान ने साइबर सुरक्षा के लिए आपस में जानकारी का आदान-प्रदान करने का निर्णय भी लिया है। इस दृष्टि से साइबर सुरक्षा के सम्बंध में किया गया समझौता बहुत महत्वपूर्ण समझौता साबित होने जा रहा है। एक ओर सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में भारत बहुत मजबूत स्थिति में है तो दूसरी ओर जापान हार्डवेयर के क्षेत्र में बहुत मजबूत स्थिति में है। दोनों देशों की क्षमताएं आपस में जुड़कर पूरे विश्व के लिए बहुत महत्वपूर्ण परिणाम दे सकती हैं। अतः अब दोनों देश यदि मिलकर कार्य करते हैं तो सूचना तकनीकी के क्षेत्र में पूरे विश्व पर अपना राज्य स्थापित कर सकने की क्षमता रखते हैं।

-प्रह्लाद सबनानी 

सेवानिवृत्त उप महाप्रबंधक

भारतीय स्टेट बैंक

प्रमुख खबरें

Tennis Ball Exercise से बढ़ाएं अपना Focus और Brain Speed; विशेषज्ञों ने बताए इसके अद्भुत स्वास्थ्य फायदे

Houthi Rebels का Eye for an Eye एक्शन, Bab al-Mandeb Strait में Saudi Arabia की समुद्री नाकेबंदी का किया ऐलान

Video: पहला नेशनल अवॉर्ड जीतने के बाद Mahakaleshwar Temple पहुंचे Kartik Aaryan, लिया बाबा का आशीर्वाद

MP Assembly में UCC Bill पास, CM Mohan Yadav ने बताया Golden Day, कहा- अब सबको मिलेगा समान अधिकार