SU-57 फाइटर जेट ले लो...एक से बढ़कर एक हथियारोें से भारत को लैस करने की तैयारी में पुतिन

By अभिनय आकाश | Feb 24, 2026

भारत अपनी वायु सेना की ताकत में इजाफा करने के लिए लगातार काम कर रहा है और हो सकता है कि आने वाले दिनों में वायुसेना के बेड़े में एक नया फाइटर इसमें जुड़ जाए और वो फाइटर ऐसा होगा जिससे दुश्मन के पसीने छूट जाए। वो फाइटर कौन है यह हम आपको बताते हैं और जिस फाइटर पर बात चल रही है उसमें भारत की पहली पसंद कौन है यह भी जान लीजिए। भारत की पहली पसंद है Sukhoi 57। यह फिफ्थ जनरेशन का फाइटर जेट है। इसकी जरूरत क्यों पड़ी यह भी हम आपको बताएंगे। लेकिन उससे पहले आप जान लीजिए कि हाल ही में फ्रांस के साथ राफेल जेट डील को मंजूरी मिलने के बाद भारत अब पांचवी पीढ़ी के स्टिल्थ फाइटर जेट खरीदने को औपचारिक रूप देने के लिए तैयार है। और जैसा कि हमने आपको बताया कि इसमें रूस का Sukhoi 57 पहली पसंद के तौर पर उभरा है। 

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ऐसे में रूसी सुखोई 57 को अंतरिम व्यवस्था के रूप में पहली पसंद बताया जा रहा है। लेकिन भारत के सामने एक दूसरा विकल्प भी है। दूसरा ऑप्शन भी है। अमेरिका की ओर से प्रस्तावित पांचवी पीढ़ी के जेट35 पर भी चर्चा हुई है। हालांकि इसके बारे में यह बताया जा रहा है कि इस पर बहुत ज्यादा विचार नहीं किया जा रहा क्योंकि भारत को ऐसे फाइटर के संचालन पर अमेरिकी प्रतिबंधों का डर है। इन प्रतिबंधों में भारतीय हथियारों को विमान में एकीकृत ना करना शामिल हो सकता है। सुखोई 30 एमटीआई की अगर बात की जाए तो इस बेड़े में ब्रह्मोस मिसाइलें भी शामिल है और इनका इस्तेमाल हमने देखा है कि ऑपरेशन सिंदूर में किया गया था। एकीकरण के बिना भारत पश्चिमी देशों से महंगे हथियार खरीदने के लिए मजबूर हो जाएगा। शायद यही वजह है कि अमेरिका के इस विकल्प पर ज्यादा विचार नहीं किया गया।

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अमेरिका की तरफ से अगर जेट F35 पर विचार किया गया तो उसमें जो प्रतिबंध अमेरिका की तरफ से लगाया गया है वो भी आप जान लीजिए कि क्यों इस पर बहुत ज्यादा विचार नहीं किया जा रहा है। सूत्रों ने बताया कि अमेरिका ने पाकिस्तानी वायुसेना पर F16 फाइटर के संचालन को लेकर कई प्रतिबंध लगा रखे हैं। इसके प्रत्येक उड़ान पर अमेरिका की निगरानी रहती है। यहां तक कि नियमित रखरखाव के लिए भी अमेरिकी इंजीनियर पाकिस्तान के हवाई अड्डों पर तैनात रहते हैं। यानी कि आप सोचिए कि अगर इस विमान पर बातचीत आगे बढ़ती है तो इस जेट विमान के लिए अमेरिका पर हमें निर्भर रहना पड़ेगा और साथ ही साथ अमेरिका की जो शर्तें हैं जो प्रतिबंध है वो भी भारत को माननी पड़ेंगी। इसलिए यह पसंद पहली पसंद नहीं है भारत के लिए। 

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