By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Sep 18, 2026
खेलों में लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे भारत के लिये यहां शनिवार से शुरू हो रहे 20वें एशियाई खेलों में कामयाबी की एक नयी कहानी लिखने की चुनौती होगी और अगले एक दशक में देश को शीर्ष दस देशों में लाने की भारत की आकांक्षा के लिये नींव का पत्थर रखने का दारोमदार खिलाड़ियों पर रहेगा। एशियाई खेलों में 43 खेलों में 11000 के करीब खिलाड़ी भाग लेंगे और 45 देश कम होने के बावजूद यहां प्रतिस्पर्धा का स्तर ओलंपिक से बड़ा होने वाला है।
जापान उम्मीद कर रहा होगा कि शनिवार को उद्घाटन समारोह के बाद चीजें व्यवस्थित हो जायेंगी। भारतीय टीम हांगझोउ में 2022 में हुए खेलों में रिकॉर्ड प्रदर्शन (106 पदक) को बेहतर करने के इरादे से यहां पहुंची है। पिछली बार भारत ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करके यह दिखा दिया था कि वह पारंपरिक रूप से पदक उम्मीद माने जाने वाले खेलों पर ही निर्भर नहीं है बल्कि उसके पास काफी गहराई है। भारत की आकांक्षा 2036 तक शीर्ष दस खेल देशों और 2047 तक शीर्ष पांच में शामिल होने की है। ये सभी दीर्धकालिन लक्ष्य है लेकिन बहु खेल आयोजनों से इसकी झलक मिल जाती है कि देश उस आकांक्षा को यथार्थ में बदलने की दिशा में किस गति से आगे बढ रहा है। इसलिये ये खेल सिर्फ पदक जीतने के बारे में नहीं है बल्कि भारतीय खेलों की गहराई की भी इसमें परख होगी।
उदीयमान प्रतिभाओं की क्षमता और संभावना को दबाव के पलों में प्रदर्शन में बदलने की काबिलियत भी कसौटी पर होगी। इसमें भारत के अभियान की अगुवाई ट्रैक और फील्ड एथलीट और निशानेबाज करेंगे। निशानेबाजी दल में युवा और अनुभवी खिलाड़ियों का अच्छा मिश्रण है जिनकी अगुवाई दो ओलंपिक पदक विजेता पिस्टल निशानेबाज मनु भाकर करेंगी। भारतीय दल में 30 निशानेबाज हैं जिनमें राइफल, पिस्टल और शॉटगन के धुरंधर शामिल हैं। एथलेटिक्स में दो बार के एशियाई खेल चैम्पियन और भारतीय एथलेटिक्स के सबसे बड़े सितारे नीरज चोपड़ा नहीं हैं। चोट के कारण वह इन खेलों में भाग नहीं ले पायेंगे लेकिन भारत के 74 सदस्यीय दल में पदक के कई दावेदार हैं।
उद्घाटन समारोह में मनु भाकर के साथ भारत के ध्वजवाहक शॉटपुट खिलाड़ी तेजिंदर पाल सिंह तूर की नजरें लगातार तीसरे स्वर्ण पद होंगी। लंबी कूद में मुरली श्रीशंकर, लंबी दूरी की दौड़ में गुलवीर सिंह, भालाफेंक में रोहित यादव, डेकाथलन में तेजस्विन शंकर और महिलाओं की लंबी कूद में एंसी सोजन पर नजरें रहेंगी। ऊंची कूद में सर्वेश कुशारे, बाधा दौड़ में ज्योति याराजी और त्रिकूद में प्रवीण चित्रावेल से भी उम्मीदें रहेंगी जो चोटों के बाद वापसी कर रहे हैं। भारत ने हांगझोउ में एथलेटिक्स में 29 पदक जीते थे जिनमें छह स्वर्ण, 14 रजत और नौ कांस्य शामिल हैं।
क्रिकेट में हरमनप्रीत कौर की अगुवाई में भारतीय टीम खिताब बरकरार रखने उतरेंगी। लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028 में क्रिकेट के पदार्पण के कारण एशियाई खेलों में स्वर्ण जीतना काफी अहम होगा। पुरूष टीम ने हांगझोउ में स्वर्ण पदक जीता था लेकिन अफगानिस्तान के खिलाफ फाइनल बारिश की वजह से नहीं हो सका था और ऊंची रैंकिंग के कारण भारत को खिताब मिला। अब भारतीय टीम मैदान पर जीतकर लगातार दूसरा खिताब अपने नाम करना चाहेगी। बैडमिंटन में सात्विक साइराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की जोड़ी सबसे प्रबल दावेदार है जिन्होंने पिछली बार स्वर्ण जीता था।
पी वी सिंधू के पास अनुभव है जबकि उन्नति हुड्डा और आयुष शेट्टी भी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना चाहेंगे। हॉकी में हरमनप्रीत सिंह की कप्तानी वाली पुरूष टीम विश्व कप और प्रो लीग की निराशा को भुलाकर एशियाई खेलों में लगातार दूसरा स्वर्ण जीतना चाहेगी। वहीं महिला टीम पिछली बार जापान से हारकर कांस्य पदक के साथ लौटी थी लेकिन विश्व कप में पांचवें स्थान पर रहने के बाद टीम आत्मविश्वास से भरी है और पदक का रंग बेहतर करना चाहेगी। तीरंदाजी, मुक्केबाजी और कबड्डी में भी पदक की प्रबल संभावनायें हैं।
महिला मुक्केबाजों ने ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में शानदार प्रदर्शन किया है। कबड्डी में एशिया में भारत का दबदबा हमेशा से रहा है। हांगझोउ ने भारतीय खेलों के लिये नये मानक तय किये। अब नागोया अगली चुनौती है। 2036 तक का सफर लंबा है लेकिन नागोया में भारत उसकी दिशा में एक और कदम रखने जा रहा है।