By अभिनय आकाश | Jan 23, 2026
ट्रंप के ईगो की वजह से दुनिया का सबसे शक्तिशाली सैन्य संगठन नाटो टूटने की कगार पर खड़ा है। लेकिन दूसरी तरफ पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब जैसे मुस्लिम मुल्क अलग इस्लामिक नाटो बनाने की तैयारी कर रहे हैं। जिस वक्त लग रहा है पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की की साझेदारी वाला इस्लामिक नेटो आकार ले रहा है। उस वक्त मिडिल ईस्ट की बड़ी पावर यूएई के राष्ट्रपति अचानक भारत के दौरे पर आए थे। यमन में सऊदी वर्सेस यूएई समर्थित तड़ाकों के विवाद के बीच तुर्की की ब्रदरहुड पॉलिसी से इत्तेफाक नहीं रखने वाले यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान का 24 घंटे से भी कम का भारत दौरा कोई सामान्य घटना नहीं है। कहा जा रहा है कि साउथ एशिया और मिडिल ईस्ट में इस्लामिक नेटो को संतुलित करने के लिए कुछ खास तैयारी की जा रही है।
विशेषज्ञ मानते हैं परमाणु बम रखने वाले पाकिस्तान तकनीक में आगे तुर्की और ऑयल रिच इकोनमी वाले सऊदी के संभावित सैन्य गठबंधन जिसे इस्लामिक नेटो कहा जा रहा है उसकी तोड़ भारत यूएई और इजराइल का सेकुलर सैन्य गठबंधन हो सकता है। भारत के यूएई और इजराइल दोनों देशों के साथ रणनीतिक संबंध मजबूत है। लेकिन मिडिल ईस्ट में यूएई वो असरदार देश है जो इजराइल के करीब है। इजराइल और यूएई ने ईरान के मिसाइल ड्रोन नेटवर्क और इस्लामिक संगठनों से खतरे के खिलाफ खुफिया जानकारी का आदानप्रदान बढ़ाया है। दोनों देशों के बीच 2000 से पहले लगभग शून्य द्विपक्षीय व्यापार था जो 2023-24 में बढ़कर $.5 अरब डॉलर के पास पहुंच गया है। 2020 में अब्राहम अकॉर्ड के बाद दोनों देशों के दूतावास खुले, सीधी उड़ाने शुरू हुई। पैटर्न और व्यापार भी तेज हुआ। इसके अलावा यूएई के तेल टर्मिनल, बंदरगाह और एयरपोर्ट जैसी अहम जगहों की साइबर सुरक्षा में इजराइल की तकनीक उपयोगी है। वहीं दोनों देशों के बीच ड्रोन रोधी सिस्टम और एयर डिफेंस पर तालमेल बढ़ा है। पर्दे के पीछे यूएई ने इजराइल, ईरान वॉर के दौरान भी इजराइल का सपोर्ट किया था।
वहीं दोनों देश धर्म से ज्यादा हित पर आधारित नीति चाहते हैं। टर्की और क़तर जैसे वैचारिक ब्लॉक्स का संतुलन बनाना चाहते हैं। यानी दोनों देश और करीब आ सकते हैं। यहां जिओपॉलिटिकल रूप से देखा जाए इसके सिग्नल्स हैं। भारत और यूएई के बीच की सेनाएं आपस में एक्सरसाइज करती हैं। भारत और इजराइल की भी करती हैं। इस्लामिक नेटो के खिलाफ अगर भारत यूएई और इजराइल का सेकुलर नेटो आकार लेता है तो दक्षिण एशिया और मिडिल ईस्ट में शक्ति संतुलन किस तरह से झुकेगा। आर्थिक शक्ति की बात करें तो भारत यूएई और इजराइल की संयुक्त इकॉनमी 5.6 ट्रिलियन डॉलर की है और संभावित इस्लामिक नेटो यानी तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी की संयुक्त इकॉनमी 2.9 ट्रिलियन की है। यानी भारत, यूएई, इजराइल के आधे से भी कम। संभावित सेुलर नेटो के पास $150 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है। जबकि इस्लामिक नेटो के पास सिर्फ 615 अरब डॉलर का भारत, इजराइल और यूएई के पास 16,85,000 सक्रिय सैनिक हैं। जबकि इस्लामिक नेटो के पास 136,000 संभावित सेलर नेटों के पास 1000 से ज्यादा लड़ाकू विमान हैं। जिसमें इजराइल के पांचवी पीढ़ी के हिप 35 जैसे आधुनिक फाइटर जेट भी शामिल हैं।