By अभिनय आकाश | Jun 12, 2025
भारत और अमेरिका के रिश्तों में इन दिनों सबकुछ सामान्य नहीं चल रहा है। भले ही कभी-कभार कूटनीतिक मुस्कानें तस्वीरों में दिख जाती हो। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है। एक ओर अमेरिका चीन के साथ दुर्लभ खनिजों की डील कर रहा है। मैगनेट्स और मिनिरल्स की सप्लाई पर समझौते हो रहे हैं। दूसरी ओर भारत से आने वाले ऑटोमोबाइल्स व ऑटोपार्टस पर भारी भरकम टैरिफ लगाकर दबाव बनाया जा रहा है। भारत ने इस कदम को अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों के खिलाफ माना और सीधे डब्ल्यूटीओ में शिकायत दर्ज करा दी।भारत का कहना है कि ये टैरिफ सेफगार्ड मेजर्स हैं। जबकि अमेरिका ने इसका सीधा खंडन करते हुए कहा कि हमने कोई सेफगार्ड नहीं लगाया और इसलिए बातचीत का कोई आधार ही नहीं बनता।
भारत ने कहा था कि अमेरिका सुरक्षा उपायों को लागू करने का निर्णय लेने के लिए सुरक्षा उपायों पर समझौते (एओएस) के प्रावधान के तहत सुरक्षा उपायों पर डब्ल्यूटीओ समिति को सूचित करने में विफल रहा। अमेरिका ने पिछले साल वैश्विक स्तर पर 89 अरब डॉलर के ऑटो पार्ट्स का आयात किया, जिसमें मैक्सिको का हिस्सा 36 अरब डॉलर, चीन का 10.1 अरब डॉलर और भारत का सिर्फ 2.2 अरब डॉलर का था। वाशिंगटन ने सुरक्षा उपायों के नाम पर स्टील और एल्युमीनियम पर अमेरिकी टैरिफ का मुकाबला करने के लिए सेब, बादाम, नाशपाती, एंटी-फ्रीजिंग तैयारियों, बोरिक एसिड और लोहे और स्टील से बने कुछ उत्पादों सहित 29 अमेरिकी उत्पादों पर जवाबी शुल्क लगाने के नई दिल्ली के प्रस्ताव पर भी इसी तरह की प्रतिक्रिया दी है। नई दिल्ली ने डब्ल्यूटीओ को बताया कि इन उपायों से अमेरिका में 7.6 अरब डॉलर के आयात प्रभावित होंगे।