Turkey के दुश्मन के घर में शेर की तरह दहाड़ने लगे भारत के खूंखार हथियार, हिले कई देश!

By अभिनय आकाश | May 29, 2026

28 मई 2026 येरेवान की पहाड़ियों से टकरा कर जब भारतीय हथियारों की गूंज निकली तो यह केवल एक सैन्य प्रदर्शन नहीं था। यह एक नए विश्व व्यवस्था यानी कि न्यू वर्ल्ड ऑर्डर का उदय था। दुनिया ने देखा कि कैसे एक देश जो साल 2020 के युद्ध में अपने अस्तित्व की अंतिम सांसे गिन रहा था आज भारत के अजय अस्त्रों के दम पर शेर की तरह दहाड़ रहा है। दरअसल आर्मेनिया के लिए सबसे बड़ा खतरा था आसमान से बरसती मौत यानी तुर्की के टीबी2 ड्रोंस और टीबी2 ड्रोंस ने साल 2020 में अर्मेनिया में तबाही मचाई थी। लेकिन भारत ने उन्हें दिया आकाश वन1। यह सिस्टम सिर्फ एक मिसाइल नहीं यह सुपर कंप्यूटर ऑन व्हील्स है। यह एक साथ 10 लक्ष्यों को ट्रैक कर सकता है और 30 कि.मी. की रेंज में आने वाले किसी भी दुश्मन को राख बना सकता है। जब परेड में यह मिसाइलें गुजरी तो अज़रबजान के पायलटो के बीच खौफ का मैसेज चला गया। अब अर्मेनिया का आसमान नो फ्लाइंग ज़ोन बन चुका है। परेड की सबसे बड़ी दहशत का नाम था पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर यानी कि एमबीआरएल। यह वो हथियार है जिसने कारगिल की चोटियों पर पाकिस्तानियों के परखच्चे उड़ा दिए थे। अर्मेनिया को दिया गया गाइडेड पिनाका 75 से 90 कि.मी. तक मार कर सकता है, वार कर सकता है। इसकी एक ही बैटरी महज 44 सेकंड में 12 रॉकेट दाग कर पूरे के पूरे दुश्मन सैन्य एयर बेस को या यूं कह लें बेस को नक्शे से मिटा सकती है। 

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अब जब पाकिस्तानी जनरल तुर्की के ड्रोनों की तारीफ करते थकते नहीं है, तो उन्हें अर्मेनिया में तैनात भारतीय तकनीक की याद जरूर आती होगी। अब यह भारत की स्मार्ट पावर है। दुश्मन को उसके घर में ही ढेर कर लेना। देखा जाए तो आज से 12 साल पहले भारत दुनिया का सबसे बड़ा हथियार खरीददाता था। हम अपनी सुरक्षा के लिए दूसरों के सामने हाथ फैलाते थे। लेकिन साल 2014 के बाद नीतियां बदली। साल 2013 से 14 निर्यात मात्र 686 करोड़ था। साल 2025-26 में निर्यात 38,424 करोड़ यानी कि 4.1 बिलियन डॉलर है। यह 34 गुना की बढ़ोतरी कोई इत्तेफाक नहीं है। यह मेक इन इंडिया की उस जिद का नतीजा है जिसने भारत को आज 100 से ज्यादा देशों का रक्षा साझेदार बना दिया है। यानी भारत के हथियार 100 देशों में पहुंच चुके हैं। अब इन हथियारों के पीछे डीआरडीओ के उन हजारों वैज्ञानिकों की मेहनत है जिन्होंने दशकों तक प्रतिबंधों और सीमित संसाधनों के बावजूद हार नहीं मानी। एपीजे अब्दुल कलाम साहब का वह सपना आज सच हो रहा है जहां भारत अपनी रक्षा के लिए आत्मनिर्भर है। आज जब अर्मेनिया का सैनिक भारतीय गन चलाता है तो वह हमारे वैज्ञानिकों के गौरव को पूरी दुनिया में फैलाता है। अर्मेनिया तो सिर्फ एक मोर्चा है। 

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दक्षिण चीन सागर में भारत की ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल ने चीन के ड्रैगन की नींद उड़ा दी है। फिलीपींस को दी गई इस मिसाइल ने साबित कर दिखाया है कि भारत अब छोटे देशों का सबसे बड़ा और विश्वसनीय सुरक्षा कवच बन चुका है। इतना ही नहीं वियतनाम और इंडोनेशिया भी अब भारत की ओर उम्मीद से देख रहे हैं और खबरें दोस्तों यह आ रही है कि अर्मेनिया अब भारत से प्रलय बैलास्टिक मिसाइल और ब्रह्मोस लेने पर विचार कर रहा है। और अगर दोस्तों ऐसा हो गया तो यह पूरा क्षेत्र भारत की शक्ति के प्रभाव में आ जाएगा। अजरान और उसके समर्थकों के लिए यह एक चेकमेड जैसा होगा जिसका उसके पास कोई तोड़ नहीं होगा। अब सवाल है कि दुनिया भारत की ओर क्यों भाग रही है? क्योंकि भारतीय हथियार पश्चिमी हथियारों के मुकाबले काफी सस्ते हैं। लेकिन उनकी मारक क्षमता रूसी हथियारों से भी घातक है और इसका प्रमाण है अर्मेनिया के यह हथियार। भारत रगड तकनीक देता है जो रेगिस्तान की गर्मी और पहाड़ों की ठंड दोनों में काम करती है और यही भारतीय जादू है जो रक्षा बाजार में हलचल मचाए जा रहा है। 

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