बोरिया बिस्तर लेकर भाग रहे घुसपैठिये बता रहे TMC का सच! कई लोगों के पास मिले Voter, PAN और AADHAR Card

स्थानीय अधिकारियों के अनुसार सैकड़ों बांग्लादेशी नागरिकों का विवरण तैयार किया जा चुका है। इनमें से अनेक लोगों ने स्वयं स्वीकार किया कि वह वर्षों पहले दलालों और बिचौलियों की मदद से अवैध रूप से भारत में दाखिल हुए थे।
पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के हाकिमपुर सीमा क्षेत्र से सामने आई तस्वीरें उस गंभीर समस्या का प्रत्यक्ष प्रमाण हैं जिस पर वर्षों से बहस होती रही है। सीमा के निकट सैकड़ों बांग्लादेशी नागरिक अपने सामान और परिवार के साथ वापस लौटने के लिए एकत्रित हो रहे हैं। प्रशासन द्वारा की जा रही पहचान जांच, पंजीकरण और निरोध केंद्रों की व्यवस्था ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राज्य में अवैध घुसपैठ के विरुद्ध अब कठोर कार्रवाई का दौर शुरू हो चुका है।
स्थानीय अधिकारियों के अनुसार सैकड़ों बांग्लादेशी नागरिकों का विवरण तैयार किया जा चुका है। इनमें से अनेक लोगों ने स्वयं स्वीकार किया कि वह वर्षों पहले दलालों और बिचौलियों की मदद से अवैध रूप से भारत में दाखिल हुए थे। कोई रोजगार की तलाश में आया, कोई बचपन में परिवार के साथ सीमा पार कर लाया गया। कई लोगों ने यह भी माना कि हाल के महीनों में दस्तावेजों की जांच, पुलिस की सक्रियता और कानूनी कार्रवाई के भय ने उन्हें वापस लौटने के लिए मजबूर कर दिया।
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सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अनेक लोगों के पास आधार, राशन कार्ड, पैन कार्ड और अन्य दस्तावेज भी पाये जा रहे हैं। कुछ ने तो वर्षों तक चुनाव में मतदान करने की बात भी कही है। यह स्थिति उन गंभीर सवालों को जन्म देती है जिनका उत्तर प्रशासनिक और राजनीतिक व्यवस्था को देना होगा। यदि अवैध रूप से आए लोग वर्षों तक विभिन्न दस्तावेज प्राप्त करते रहे, तो यह व्यवस्था की खामियों का भी विषय है।
लौट रहे बांग्लादेशी घुसपैठियों ने खुले तौर पर यह भी बताया कि किस प्रकार दलालों के संगठित गिरोह रात के अंधेरे में सीमा सुरक्षा बल की गश्त पर नजर रखते थे और जैसे ही निगरानी में थोड़ी सी ढील दिखाई देती थी, घुसपैठियों को भारत में दाखिल करा दिया जाता था। कुछ लोगों ने तो यहां तक दावा किया कि महज दस मिनट के भीतर सीमा पार कराई जा सकती थी। इन बयानों से स्पष्ट है कि अवैध घुसपैठ कोई आकस्मिक घटना नहीं थी, बल्कि इसके पीछे एक सुनियोजित और संगठित तंत्र सक्रिय था, जिसने राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती खड़ी की।
देखा जाये तो मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार ने जिस स्पष्टता के साथ अपनी नीति रखी है, वह हर बंगालवासी को भा रही है इसलिए लोग सरकार की काफी सराहना कर रहे हैं। राज्य सरकार ने सभी जिलों में डिटेंशन सेंटर स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू की है। साथ ही सीमा सुरक्षा बल के लिए भूमि उपलब्ध कराने और सीमा पर बाड़ लगाने की गति भी तेज कर दी गयी है। शुभेन्दु सरकार का संदेश साफ है कि जो लोग कानूनी रूप से भारत में रहने के पात्र नहीं हैं, उनकी पहचान होगी, उनके नाम हटाए जाएंगे और उन्हें वापस भेजा जाएगा।
साथ ही सीमा क्षेत्र से आई एक और महत्वपूर्ण खबर ने जनता की भावना को स्पष्ट कर दिया है। कूचबिहार जिले के सतग्राम मानवारी क्षेत्र के निवासियों ने स्वेच्छा से अपनी तैंतीस डेसिमल भूमि सीमा सुरक्षा बल को सौंप दी है ताकि भारत बांग्लादेश सीमा पर बाड़ का कार्य पूरा हो सके। ग्रामीणों ने साफ कहा कि अवैध घुसपैठ, तस्करी और खेती को होने वाले नुकसान से वे लंबे समय से परेशान थे। यह कदम बताता है कि सीमा सुरक्षा केवल सरकारी एजेंसियों का विषय नहीं बल्कि आम नागरिकों की भी प्राथमिकता बन चुकी है।
देखा जाये तो जो लोग अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने की सोच रहे हैं, उनके लिए यह घटनाक्रम स्पष्ट चेतावनी है। भारत एक संप्रभु राष्ट्र है और उसकी सीमाओं, कानूनों तथा नागरिकता व्यवस्था का सम्मान करना हर व्यक्ति का दायित्व है। अवैध रास्तों, दलालों और फर्जी पहचान के सहारे यहां बसने की कोशिश अब पहले जैसी आसान नहीं रहेगी। कानून की पकड़ लगातार मजबूत हो रही है और प्रशासनिक तंत्र अधिक सक्रिय दिखाई दे रहा है।
फिलहाल हाकिमपुर सीमा पर जमा घुसपैठियों की भीड़ एक बड़ा संदेश दे रही है। शुभेन्दु अधिकारी सरकार ने जिस दृढ़ता के साथ अवैध घुसपैठ के विरुद्ध अभियान शुरू किया है, उसने यह संकेत दे दिया है कि बंगाल की सीमा नीति अब निर्णायक मोड़ में प्रवेश कर चुकी है। निश्चित रूप से आने वाले समय में यह अभियान राज्य की राजनीति, सुरक्षा व्यवस्था और सामाजिक विमर्श तीनों पर गहरा प्रभाव डालेगा।
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