रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी क्रांति का शंखनाद, 101 अस्त्र बनाएगा हिन्दुस्तान

By अभिनय आकाश | Aug 10, 2020

चीन से जारी तनातनी के बीच भारत ने बड़ा कदम उठाया है। आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा वस्तुओं का उत्पादन बढ़ाने के लिए 101 उपकरणों के आयात पर रोक लगाने का ऐलान कर दिया है। ये उपकरण भारत खुद बनाएगा यानी देसी हथियार से अब भारत अपने दुश्मनों को सबक सिखाएगा। 12 मई 2020 को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आत्मनिर्भर भारत बनने की बात कहते हुए कहा था कि ये भव्य इमारत, पांच पिलर्स पर खड़ी होगी। पहला पिलर Economy, दूसरा पिलर Infrastructure, तीसरा पिलर System, चौथा पिलर हमारी Demography और पांचवा पिलर Demand है।

सूची में मिसाइलें, जहाज, रॉकेट लांचर शामिल

अधिकारियों के अनुसार, 101 वस्तुओं की सूची में टोएड आर्टिलरी बंदूकें, कम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें, क्रूज मिसाइलें, अपतटीय गश्ती जहाज, इलेक्ट्रॉनिक युद्धक प्रणाली, अगली पीढ़ी के मिसाइल पोत, फ्लोटिंग डॉक, पनडुब्बी रोधी रॉकेट लांचर और कम दूरी के समुद्री टोही विमान शामिल हैं। सूची में बुनियादी प्रशिक्षण विमान, हल्के रॉकेट लांचर, मल्टी बैरल रॉकेट लांचर, मिसाइल डेस्ट्रॉयर, जहाजों के लिये सोनार प्रणाली, रॉकेट, दृश्यता की सीमा से परे हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलें अस्त्र-एमके 1, हल्की मशीन गन व आर्टिलरी गोला-बारूद (155 एमएम) और जहाजों पर लगने वाली मध्यम श्रेणी की बंदूकें भी शामिल हैं। 

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69 उपकरणों के आयात पर दिसंबर से रोक

सैन्य मामलों के मंत्रालय (डीएमए) और रक्षा मंत्रालय ने 101 सामानों की लिस्ट बनाई है और इनके आयात पर रोक लगाई है। 101 उपकरणों और हथियारों की सूची में से 69 के आयात पर तो दिसंबर 2020 से ही रोक लग जाएगी। कई दौरे की बातचीत के बाद सूची तैयार की है।

 

 

तीनों सेनाओं, रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ), रक्षा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रमों, आयुध कारखाना बोर्ड और निजी उद्योगों सहित सभी संबंधित पक्षों के साथ कई दौर की बातचीत के बाद यह सूची तैयार की गई है। तीनों सैन्य सेवाओं ने अप्रैल, 2015 से अगस्त 2020 के बीच 3.5 लाख करोड़ रुपये की अनुमानित लागत पर ऐसी वस्तुओं की लगभग 260 योजनाओं का अनुबंध दिया। इन 101 वस्तुओं के आयात पर लगी नयी रोक से यह अनुमान है कि अगले पांच से सात वर्षों में घरेलू उद्योग को लगभग चार लाख करोड़ रुपये के अनुबंध मिलेंगे। इस अवधि के दौरान (अगले पांच से सात साल) इनमें से थलसेना और वायुसेना दोनों के लिये लगभग 1,30,000 करोड़ रुपये की वस्तुओं तथा नौसेना के लिये 1,40,000 करोड़ रुपये की वस्तुओं की खरीद का अनुमान लगाया गया है।’’ 

सूची में पहिये वाले बख्तरबंद लड़ाकू वाहन (एएफवी) भी शामिल हैं, जिनके लिये अमल की सांकेतिक तिथि दिसंबर, 2021 है। थलसेना के द्वारा पांच हजार करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से ऐसे 200 वाहनों के अनुबंध दिये जाने के अनुमान हैं। इसी तरह नौसेना के द्वारा दिसंबर, 2021 की सांकेतिक अमल तारीख के साथ पनडुब्बियों की खरीद के अनुमान हैं। नौसेना करीब 42 हजार करोड़ रुपये की लागत से छह ऐसी पनडुब्बियों के अनुबंध दे सकती है। वायुसेना के लिये हल्के लड़ाकू विमान एमके 1ए को सूची में शामिल करने का निर्णय लिया गया है, जिनके लिये अमल की सांकेतिक तारीख दिसंबर, 2020 होगी। वायुसेना के द्वारा 85 हजार करोड़ रुपये से अधिक की अनुमानित लागत पर 123 ऐसे विमानों के अनुबंध दिये जाने के अनुमान हैं।’’ एक सरकारी दस्तावेज के अनुसार, 69 वस्तुओं पर आयात प्रतिबंध दिसंबर, 2020 से लागू होगा, जबकि अन्य 11 वस्तुओं पर प्रतिबंध दिसंबर 2021 से लागू होगा। दिसंबर, 2022 से आयात प्रतिबंधों के लिये चार वस्तुओं की एक अलग सूची की पहचान की गयी है, जबकि आठ वस्तुओं के दो अलग-अलग खंडों पर प्रतिबंध दिसंबर, 2023 और दिसंबर, 2024 से लागू होगा। लंबी दूरी के लैंड अटैक क्रूज मिसाइलों पर आयात प्रतिबंध दिसंबर, 2025 से लागू होगा। 

 

 52000 करोड़ घरेलू व विदेशी पूंजीगत खरीद में विभाजित

रक्षा मंत्रालय ने 2020-21 के पूंजीगत खरीद बजट को घरेलू व विदेशी पूंजीगत खरीद में विभाजित किया है। चालू वित्त वर्ष में घरेलू खरीद के लिये करीब 52 हजार करोड़ रुपये का एक अलग बजट बनाया गया है। इस सूची में शामिल किये गये उपकरणों का घरेलू विनिर्माण तय समयसीमा के भीतर सुनिश्चित करने के लिये सभी आवश्यक कदम उठाये जायेंगे। इन उपायों में रक्षा सेवाओं के द्वारा उद्योग जगत को ऊपर उठाने का एक समन्वित तंत्र भी शामिल होगा। 

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