By रेनू तिवारी | Feb 01, 2026
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा बयान देते हुए दावा किया है कि भारत अब ईरान के बजाय वेनेजुएला से कच्चे तेल (Crude Oil) का आयात करेगा। फ्लोरिडा जाते समय 'एयरफोर्स वन' विमान में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि इस सौदे को लेकर एक "सहमति" बन चुकी है। भारत आ रहा है, और वे ईरान से खरीदने के बजाय वेनेजुएला से तेल खरीदने जा रहे हैं। तो, हमने पहले ही डील का कॉन्सेप्ट बना लिया है।"
ट्रंप की यह टिप्पणी अमेरिका से मिले संकेतों के बाद आई है कि नई दिल्ली को जल्द ही वेनेजुएला का कच्चा तेल खरीदने की इजाज़त दी जा सकती है। अमेरिकी नेता भारत को रूसी इंपोर्ट के बदले वेनेजुएला के तेल पर विचार करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं, जो यूक्रेन में युद्ध के बीच मॉस्को को मिलने वाले फंड को सीमित करने के वाशिंगटन के बड़े प्रयास का हिस्सा है।
इसके अलावा, ट्रंप ने बताया कि चीन भी वेनेजुएला का तेल खरीदने के लिए अमेरिका के साथ बातचीत कर सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने वेनेजुएला में सीधे तौर पर भूमिका निभाने का दावा किया है, जिससे देश की उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज को तब तक अंतरिम नेता के रूप में काम करने की इजाज़त दी गई है, जब तक वाशिंगटन की मांगें - खासकर वेनेजुएला के तेल तक पहुंच देना - पूरी नहीं हो जातीं। इस बीच, रोड्रिग्ज ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात की, और ऊर्जा, व्यापार और निवेश में द्विपक्षीय संबंधों को गहरा करने के तरीकों पर चर्चा की।
ट्रंप के इस बयान से ठीक पहले कूटनीतिक स्तर पर भी बड़ी हलचल देखी गई:-
शुक्रवार की वार्ता: वेनेजुएला की उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से बात की।
मुख्य एजेंडा: दोनों नेताओं के बीच ऊर्जा, व्यापार और निवेश में द्विपक्षीय संबंधों को गहरा करने के तरीकों पर विस्तार से चर्चा हुई।
महत्वपूर्ण बिंदु: यदि भारत वेनेजुएला से तेल खरीद शुरू करता है, तो यह वैश्विक तेल बाजार और भारत की 'एनर्जी सिक्योरिटी' की दिशा में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत अपनी तेल जरूरतों के लिए वेनेजुएला की ओर रुख करता है, तो इससे ईरान और रूस पर उसकी निर्भरता कम होगी। हालांकि, यह देखना दिलचस्प होगा कि वेनेजुएला के तेल की कीमतें और शिपिंग लागत भारत के लिए कितनी किफायती रहती है।