By अंकित सिंह | Oct 09, 2026
भारतीय सेना की स्पोर्ट्स टीम ने एशियन गेम्स 2026 में अब तक का अपना सबसे बेहतरीन प्रदर्शन किया और रिकॉर्ड 20 मेडल (6 गोल्ड, 8 सिल्वर और 6 ब्रॉन्ज़) जीते। एक रिलीज़ के अनुसार, 15 अलग-अलग खेलों में सेना के 62 एथलीटों के प्रदर्शन ने भारत के कुल मिलाकर चौथे स्थान पर रहने में अहम भूमिका निभाई और देश के खेल इतिहास में कई नए अध्याय जोड़े। ये छह गोल्ड मेडल, 2022 एशियन गेम्स में आर्मी के गोल्ड मेडल की संख्या से 100 प्रतिशत ज़्यादा हैं।
इसके बाद, अलग-अलग खेलों के लिए खास ट्रेनिंग सेंटर्स में एथलीटों को तैयार किया जाता है। उन्हें अत्याधुनिक सुविधाएं, खास कोचिंग, टेक्निकल और साइंटिफिक सपोर्ट, ज़रूरी उपकरण, कॉम्पिटिशन का अनुभव और लगातार मोटिवेशन मिलता है। इसका मकसद सिर्फ़ टैलेंट खोजना नहीं है, बल्कि खिलाड़ियों को ऐसा माहौल और सपोर्ट देना है जिससे वे अपनी काबिलियत को बेहतरीन परफ़ॉर्मेंस में बदल सकें। यह इकोसिस्टम खिलाड़ियों को मकसद के साथ ट्रेनिंग करने, सबसे ऊंचे लेवल पर मुक़ाबला करने और संस्थान के सपोर्ट से कामयाबी की राह पर आगे बढ़ने का मौका देता है।
खेलों में शानदार प्रदर्शन की आर्मी की एक लंबी और गौरवशाली परंपरा रही है। भारतीय हॉकी के इतिहास के सबसे बड़े नामों में से एक, मेजर ध्यानचंद, इस विरासत की एक अहम पहचान बने हुए हैं। हाल के समय में, लेफ्टिनेंट कर्नल नीरज चोपड़ा जैसे खिलाड़ियों ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया है, वे इंटरनेशनल एथलेटिक्स में सबसे ऊंचे मुकाम तक पहुंचे हैं और भारतीय खेलों को दुनिया भर में पहचान दिलाई है।
एशियन गेम्स 2026 में भारतीय सेना की सफलता, सेना प्रमुख के 'विजय' (VIJAY) विज़न को साकार करती है, जिसमें 'योद्धा' को बदलाव के केंद्र में रखा गया है। खेल के मैदान में उतरने वाला योद्धा उसी अनुशासन, सहनशक्ति, दृढ़ संकल्प और जीतने के जज़्बे का प्रतीक है जो एक सैनिक की पहचान होते हैं। ये उपलब्धियाँ प्रतिभा को निखारने और व्यक्तिगत क्षमता को राष्ट्रीय स्तर की उत्कृष्टता में बदलने के प्रति सेना की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। पदकों से कहीं बढ़कर, खेल में हिस्सा लेने वाला हर योद्धा देश की उम्मीदों को साथ लेकर चलता है; यह साबित करते हुए कि भले ही मैदान बदल जाए, लेकिन योद्धा का जज़्बा हमेशा एक जैसा ही रहता है।