Kartavya Path पर इस बार होगा युद्ध भूमि जैसा अहसास! Air Force Sindoor Formation आकाश में और Phased Battle Array Format में Indian Army सबको चौंकाएगी

By नीरज कुमार दुबे | Jan 23, 2026

इस बार की गणतंत्र दिवस परेड सिर्फ कदमताल बैंड और झांकियों का आयोजन नहीं होगी बल्कि यह कर्तव्य पथ को प्रतीकात्मक युद्ध भूमि में बदल देने वाला अनुभव बनेगी। दर्शकों को ऐसा अहसास होगा मानो वह किसी सैन्य अभ्यास या वास्तविक संघर्ष की झलक देख रहे हों जहां आकाश में लड़ाकू विमान युद्ध क्रम में होंगे और जमीन पर सेना उसी क्रम में आगे बढ़ेगी जैसे दुश्मन से सामना करते समय बढ़ती है। इस बार की परेड परंपरा और प्रतीक से आगे जाकर शक्ति, संकल्प और तैयारी का जीवंत प्रदर्शन होगी जो साफ बताएगी कि भारत अब अपने गणतंत्र का उत्सव सिर्फ फूलों से नहीं बल्कि दृढ़ इच्छाशक्ति और युद्ध तत्परता के साथ मनाता है।

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हम आपको बता दें कि पहली बार फ्लाइपास्ट को दो चरणों में विभाजित किया गया है। इनमें 16 फाइटर जेट, चार ट्रांसपोर्ट विमान और नौ हेलिकॉप्टर शामिल हैं। वज्रांग, वरुण, अर्जन, गरुड, प्रहार और ध्वज जैसे नामों वाले गठन वायु सेना की मारक क्षमता, समुद्री निगरानी, त्वरित परिवहन और आक्रमण क्षमता को प्रदर्शित करेंगे। फ्लाइपास्ट में पी 8 आई समुद्री निगरानी विमान, सी 130 जे और सी 295 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, अपाचे और लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर भी शामिल होंगे। यह पूरा हवाई प्रदर्शन जमीन पर दिखाए जा रहे फेज्ड बैटल एरे प्रारूप से जुड़ा होगा।

साथ ही इस बार परेड में थल सेना भी पहली बार फेज्ड बैटल एरे फॉर्मेशन में कर्तव्य पथ पर उतरेगी। इसका अर्थ है कि सेना की टुकड़ियां और स्वदेशी प्लेटफार्म उसी क्रम में आगे बढ़ेंगे जैसे वह वास्तविक युद्ध में तैनात होते हैं। सबसे आगे टोही, उसके बाद लॉजिस्टिक्स और फिर अग्रिम मोर्चे की इकाइयां रहेंगी। सभी सैनिक युद्धक पोशाक और साजो सामान के साथ नजर आएंगे। इसी क्रम में नई भैरव लाइट कमांडो बटालियन का भी गणतंत्र दिवस परेड में पदार्पण होगा। हम आपको बता दें कि यह बटालियन पिछले वर्ष अक्टूबर में गठित की गई थी और इसका उद्देश्य पैदल सेना और विशेष बलों के बीच की खाई को पाटना है। परेड में कुल 18 मार्चिंग कंटिंजेंट, 13 बैंड और 30 झांकियां होंगी। वायु सेना के बैंड में पहली बार नौ महिला अग्निवीर भी शामिल होंगी जो लैंगिक समानता की दिशा में एक ठोस संदेश है।

इस वर्ष परेड की प्रमुख थीम वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने की होगी। कर्तव्य पथ पर बने एन्क्लोजर में इसके शुरुआती पदों पर आधारित चित्र और पुष्प सज्जा होगी तथा इसके रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को श्रद्धांजलि दी जाएगी। हम आपको बता दें कि इस बार गणतंत्र दिवस पर मुख्य तथा विशिष्ट अतिथियों के रूप में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष Ursula von der Leyen और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष Antonio Costa उपस्थित रहेंगे। इस बार एक और महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि वीवीआईपी जैसे लेबल समाप्त कर दिए गए हैं। सभी एन्क्लोजर भारतीय नदियों के नाम पर होंगे जबकि बीटिंग रिट्रीट समारोह में भारतीय वाद्य यंत्रों के नाम पर एन्क्लोजर के नाम रखे जाएंगे।

देखा जाये तो गणतंत्र दिवस की परेड में ऑपरेशन सिंदूर को केंद्र में लाकर भारत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत पर हमला अब सैन्य प्रतिक्रिया को जन्म देता है। फेज्ड बैटल एरे का प्रयोग यह बताता है कि भारत अब परेड को खिलौना प्रदर्शन नहीं बल्कि युद्ध के अभ्यास जैसा मंच बना रहा है। यह सेना की मानसिकता में आए बदलाव का संकेत है जहां दिखावा नहीं तैयारी प्राथमिकता है। भैरव कमांडो बटालियन का पदार्पण भविष्य के युद्धों की झलक देता है। तेज हल्की और घातक इकाइयां आने वाले संघर्षों की जरूरत हैं। कुल मिलाकर गणतंत्र दिवस 2026 ऐलान है कि सिंदूर आसमान में है और उसका संदेश साफ है। जो आंख उठाएगा उसे जवाब मिलेगा और वह भी पूरी तैयारी के साथ।

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