घर पर कितना Gold रखने की इजाजत देती है सरकार? नया सोना खरीदना नहीं है मगर पुराने सोने को रखने के नियम क्या हैं?

By नीरज कुमार दुबे | May 14, 2026

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देशवासियों से अगले एक वर्ष तक सोना खरीदने से बचने की अपील की। उनका कहना था कि देश को गैर जरूरी आयात कम करने और अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने पर ध्यान देना चाहिए। प्रधानमंत्री की इस अपील के बाद देश में एक बार फिर सोना रखने के नियमों और इससे जुड़े कानूनी प्रावधानों पर चर्चा तेज हो गई है। देखा जाये तो भारत में सोना केवल आभूषण नहीं बल्कि बचत, निवेश और सामाजिक प्रतिष्ठा का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है। आर्थिक अनिश्चितता, महंगाई और बाजार में उतार चढ़ाव के समय लोग सोने को सुरक्षित निवेश के रूप में देखते हैं। यही कारण है कि गांव से लेकर शहर तक भारतीय परिवारों में सोने की मजबूत मांग बनी रहती है।

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सीबीडीटी के नियमों के अनुसार विवाहित महिलाओं के पास 500 ग्राम तक सोने के आभूषण होने पर उन्हें जब्त नहीं किया जाएगा। अविवाहित महिलाओं के लिए यह सीमा 250 ग्राम तय की गई है। वहीं पुरुषों के लिए, चाहे वे विवाहित हों या अविवाहित, 100 ग्राम तक सोने के आभूषण रखने की सीमा निर्धारित है। इन सीमाओं के भीतर पाए गए आभूषणों को सामान्य परिस्थितियों में आयकर अधिकारी जब्त नहीं कर सकते।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी व्यक्ति ने अपने सोने का विवरण संपत्ति कर विवरणी में दिया है, या वह सोने के वैध स्रोत का संतोषजनक प्रमाण प्रस्तुत कर देता है, तो ऐसे आभूषण जब्त नहीं किए जाएंगे। इसके अलावा पारिवारिक परंपरा, सामाजिक स्थिति और रीति रिवाजों को देखते हुए अधिकारियों को अधिक मात्रा में सोना होने पर भी विवेकाधिकार इस्तेमाल करने का अधिकार दिया गया है।

लेकिन यदि कोई व्यक्ति अपने पास मौजूद सोने का वैध स्रोत नहीं बता पाता, या उसका जवाब संतोषजनक नहीं माना जाता, तो उस पर भारी कर लगाया जा सकता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार ऐसे मामलों में लगभग 78 प्रतिशत तक कर वसूला जा सकता है, जिसमें अधिभार और उपकर भी शामिल होता है। इसके अतिरिक्त 10 प्रतिशत तक जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

इस बीच सोने पर बढ़ी आयात शुल्क दरों ने बाजार की चिंता और बढ़ा दी है। उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि आयात शुल्क बढ़ने से सोने की खुदरा कीमतों में तेजी आएगी, जिसका सबसे ज्यादा असर मध्यम वर्ग और सीमित बजट वाले ग्राहकों पर पड़ेगा। माना जा रहा है कि निकट भविष्य में सोने की बिक्री में गिरावट देखने को मिल सकती है।

जानकारों का कहना है कि भारत अपनी घरेलू जरूरतों का लगभग पूरा सोना आयात के जरिये पूरा करता है। वित्त वर्ष 2026 में देश का सोना आयात बढ़कर 72 अरब डॉलर तक पहुंच गया था, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह 58 अरब डॉलर था। ऐसे में आयात शुल्क में वृद्धि का सीधा असर कीमतों पर पड़ना तय माना जा रहा है।

सेन्को गोल्ड के प्रबंध निदेशक सुवंकर सेन का कहना है कि आयात शुल्क बढ़ने से कीमतों में तत्काल असर दिखाई देगा और कई ग्राहक फिलहाल खरीदारी टाल सकते हैं। उनके अनुसार निकट अवधि में बिक्री की मात्रा में 10 से 15 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है।

मालाबार समूह के अध्यक्ष एमपी अहमद का कहना है कि पहली बार सोना खरीदने वाले ग्राहकों को नई कीमतों के अनुसार खुद को ढालने में समय लगेगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि पुराने सोने के बदले नया आभूषण लेने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ेगी और आगे चलकर यही खरीदारी का प्रमुख तरीका बन सकता है।

ज्वेलरी कारोबार से जुड़े उद्योगपति डॉ. जॉय अलुक्कास का मानना है कि भारत में शादी और त्योहारों के साथ सोने का गहरा सांस्कृतिक और भावनात्मक रिश्ता है, इसलिए दीर्घकाल में मांग पूरी तरह कमजोर नहीं होगी। उनका कहना है कि अब ग्राहक सोने को केवल गहनों के रूप में नहीं बल्कि सुरक्षित निवेश के रूप में भी देखने लगे हैं।

इसी परिस्थिति को देखते हुए कई कंपनियां पुराने सोने के बदले नया आभूषण देने वाली योजनाओं पर जोर दे रही हैं। कल्याण ज्वेलर्स ने गोल्ड फोर इंडिया नाम से अभियान शुरू किया है, जिसके तहत ग्राहकों को पुराने, टूटे या अनुपयोगी आभूषण बदलकर नया सोना खरीदने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। साथ ही कम शुद्धता वाले 18 कैरेट आभूषणों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि कम मात्रा में शुद्ध सोने का उपयोग हो सके।

रत्न और आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद ने भी अपने सदस्यों से कम कैरेट वाले आभूषणों की बिक्री बढ़ाने और सोने की ईंटों तथा सिक्कों में निवेश को हतोत्साहित करने की अपील की है। परिषद का मानना है कि सोने की ईंटों और सिक्कों का आयात कुल आयात का लगभग 20 से 30 प्रतिशत हिस्सा है, जिसे कम करना जरूरी है।

कुल मिलाकर प्रधानमंत्री की अपील, आयात शुल्क में वृद्धि और सरकार की निगरानी ने सोने के बाजार को एक नए मोड़ पर ला खड़ा किया है। एक ओर सरकार आयात कम कर अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर भारतीय समाज में सोने की सांस्कृतिक अहमियत के कारण इसकी मांग पूरी तरह खत्म होने की संभावना नहीं दिखती। माना जा रहा है कि आने वाले समय में सोने की खरीदारी का तरीका जरूर बदल सकता है, जहां लोग पुराने आभूषण बदलने, हल्के गहने खरीदने और सोच समझकर निवेश करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। बहरहाल, आइये देखते हैं इस पूरे मामले पर ज्वैलर्स क्या कह रहे हैं।

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