Indian Hockey Team का शर्मनाक प्रदर्शन, World Cup Selection पर दिग्गजों ने उठाए गंभीर सवाल

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Aug 25, 2026

विश्व कप में 51 साल बाद पदक जीतने का सपना लेकर गई भारतीय पुरूष हॉकी टीम के सेमीफाइनल में पहुंचने में भी नाकाम रहने के बाद पूर्व दिग्गजों ने युवा खिलाड़ियों को मौका नहीं देने और उसी कोर ग्रुप के साथ लगातार खेलने पर सवाल उठाये हैं। अर्जेंटीना से 3 -5 से हारने के बाद भारत की सेमीफाइनल की उम्मीदें भी खत्म हो गई और इससे वे कमजोरियां भी उजागर हुई जो पेरिस ओलंपिक के बाद से लगातार चली आ रही थी।

पेरिस ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने के बाद संन्यास लेने वाले गोलकीपर पी आर श्रीजेश ने जूनियर खिलाड़ियों को समय पर मौके नहीं दिये जाने का हवाला देते हुए से कहा ,‘‘सीनियर खिलाड़ियों के जाने के बाद उनकी जगह कौन लेगा। क्या हमने दूसरी जमात तैयार की है। लॉस एंजिलिस ओलंपिक में दो ही साल बचे हैं और उससे पहले करीब तीस अंतरराष्ट्रीय मैच ही होंगे। क्या ओलंपिक के लिये इससे खिलाड़ी तैयार हो सकते हैं। नहीं।’’उन्होंने कहा ,‘‘ विश्व कप की टीम में भी भी वही कोर खिलाड़ी हैं जबकि मनमीत सिंह, आमिर अली, रोशन कुजूर, तालेम प्रियब्रत, रोहित, अर्शदीप जैसे कई प्रतिभाशाली जूनियर इंतजार ही कर रहे हैं।’’

पूर्व ओलंपियन जगबीर सिंह ने कहा कि चयन के कुछ फैसले बेहतर हो सकते थे। उन्होंने कहा ,‘‘ जूनियर खिलाड़ियों को सही समय पर मौके मिलने चाहिये और चयन के कुछ फैसले बेहतर हो सकते थे। तैयारी ओलंपिक से ओलंपिक की होनी चाहिये। कोचिंग स्टाफ ने अनुभव को ही तरजीह दी जो काम नहीं आया। भारत के पास यह सर्वश्रेष्ठ मौका था लेकिन प्रदर्शन में निरंतरता नहीं दिखी। हर दस मिनट में डिफेंस चरमरा रहा था।’’

ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता कप्तान रहे वासुदेवन भास्करन ने कहा ,‘‘ मैने पिछले चार साल में किसी भारतीय फॉरवर्ड को अच्छा खेलते नहीं देखा। बैक पास कहां थे, गोल पर कितने हमले किये और फुल प्रेस जाने के समय मिडफील्ड पूरा खाली छोड़ दिया।’’ उन्होंने कहा ,‘‘ हमने नये खिलाड़ियों को मौके ही नहीं दिये। नीदरलैंड की पेरिस ओलंपिक टीम के छह स्वर्ण पदक विजेता खिलाड़ी विश्व कप टीम में नहीं थे। हम हमदर्दी, पिछले रिकॉर्ड और आंकड़ों पर ही टीम चुन लेते हैं। कम से कम छह जूनियर खिलाड़ियों को प्रो लीग में आजमाना चाहिये था।’’

उन्होंने यह भी कहा कि जूनियर विश्व कप कांस्य पदक विजेता कोच श्रीजेश से सलाह क्यो नहीं ली गई जबकि दूसरे देशों में जूनियर कोच सबसे अहम होते हैं जो सीनियर कोचों को राय देते हैं। वहीं एक और दिग्गज परगट सिंह का मानना है कि भारतीय हॉकी का आंतरिक ढांचा इतना कमजोर है कि प्रतिभायें निकलती ही नहीं है। उन्होंने कहा ,‘‘ अच्छी घरेलू स्पर्धायें नहीं होने से हमारे पास अच्छी बेंच स्ट्रेंथ नहीं है। यूरोप में कई डिविजन की लीग होती है जो हमारे यहां नहीं है।

पहले बेटन कप, आगा खान कप, बांबे गोल्ड कप, मुरूगप्पा कप, नेहरू हॉकी से अच्छी प्रतिभायें निकलती थी। सारा ढांचा ही खराब कर दिया है। इसके अलावा नये खिलाड़ियों को मौका देना था तो दो साल पहले ही बदलाव की शुरूआत कर देनी चाहिये थी।’’

एक अन्य ओलंपियन ने कहा कि क्षेत्रीय स्तर पर सफलता मिलने के बाद बड़े टूर्नामेंटों की नाकामी भूल जाते हैं जो चिंता का सबब है। उन्होंने कहा ,‘‘ एशियाई स्तर पर ही खुद का आकलन हो जाता है कि एशियाई चैम्पियंस ट्रॉफी जीत ली और एशिया कप जीत लिया तो हो गया। यूरोपीय टीमों के सामने टायं टायं फिस्स। यही कहानी चली आ रही है। प्रो लीग में नौ टीमों में आठवें नंबर पर रहते हैं।

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