तालिबान के सत्ता में काबिज होने के बाद पहली बार काबुल पहुंचे भारतीय अधिकारी, मानवीय सहायता अभियान का लेंगे जायजा

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Jun 02, 2022

नयी दिल्ली। अफगानिस्तान में मानवीय सहायता अभियान एवं आपूर्ति का जायजा लेने के लिए भारत से विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ राजनयिक की अगुवाई में एक दल काबुल गया है जो वहां सत्तारूढ़ तालिबान के वरिष्ठ सदस्यों से मुलाकात कर भारत की ओर से भेजी गयी सहायता के बारे में चर्चा करेगा। विदेश मंत्रालय से बृहस्पतिवार को जारी एक बयान में यह जानकारी दी गई। अफगानिस्तान की सत्ता पर तालिबान के काबिज होने के बाद भारत से उस देश में यह पहली उच्च स्तरीय यात्रा है। इस दल का नेतृत्व पाकिस्तान, अफगानिस्तान, ईरान (पीएआई) के लिये वरिष्ठ राजनयिक जे पी सिंह कर रहे हैं। यह दल तालिबान के वरिष्ठ सदस्यों से मुलाकात करेगा। 

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बयान के अनुसार,‘‘ विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव (पीएआई) के नेतृत्व में अधिकारियों का एक दल अभी काबुल में है, जो अफगानिस्तान में हमारे मानवीय सहायता आपूर्ति अभियान का जायजा लेगा। ’’ इसमें कहा गया है कि यह दल मानवीय सहायता में शामिल विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेगा और संभवत: उन स्थानों पर भी जाएगा जहां भारतीय कार्यक्रम अथवा परियोजनाएं लागू की जा रही हैं। मंत्रालय ने बताया कि अफगानिस्तान के लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए भारत अब तक 20 हजार मीट्रिक टन गेहूं, 13 टन दवा, कोविड रोधी टीके की पांच लाख खुराक, गर्म कपड़े आदि वहां भेज चुका है। यह सामग्री काबुल में इंदिरा गांधी बाल अस्पताल, डब्ल्यूएचओ, डब्ल्यूईपी जैसी संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों को सौंपी गई हैं।

मंत्रालय ने कहा,‘‘ हमने अफगानिस्तान के लोगों के साथ हमारी विकास साझेदारी को जारी रखते हुए भारत में निर्मित कोवैक्सीन की 10 लाख खुराक ईरान को दी ताकि ईरान में रहने वाले अफगानिस्तान के शरणार्थियों को खुराकें दी जा सकें।’’ इसमें कहा गया है,‘‘ यूनीसेफ को अफगान लोगों के लिए पोलियो के टीके की छह करोड़ खुराक और दो टन आवश्यक दवाओं की आपूर्ति की गई है।’’ बयान के अनुसार, भारत से अफगानिस्तान को और चिकित्सा सहायता और खाद्यान्न की खेप भेजे जाने की प्रक्रिया चल रही है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत की ओर से की जा रही सहायता की अफगानिस्तान में व्यापक सराहना हो रही है। इसमें कहा गया है कि भारत के अफगानिस्तान के साथ ऐतिहासिक एवं सभ्यता से जुड़े संबंध हैं और ये हमारे रूख का मार्गदर्शन करेंगे।

गौरतलब है कि भारत, अफगानिस्तान के घटनाक्रम पर चिंता व्यक्त करता रहा है। भारत ने नवंबर में अफगानिस्तान के मुद्दे पर एक क्षेत्रीय वार्ता की मेजबानी की थी जिसमें रूस, ईरान, कजाखस्तान, किर्गिजस्तान, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, उज्बेकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों ने हिस्सा लिया था। इस वार्ता में हिस्सा लेने वाले देशों ने यह सुनिश्चित करने के लिये काम करने का संकल्प लिया था कि अफगानिस्तान वैश्विक अतंकवाद की पनाहगाह नहीं बने। इन देशों ने अफगानिस्तान में ‘ खुली एवं सच्चे अर्थो में समावेशी’ सरकार के गठन का आह्वान किया था जिसमें अफगानिस्तान के सभी वर्गो का प्रतिनिधित्व हो।

दिल्ली में अफगानिस्तान के विषय पर हुई क्षेत्रीय सुरक्षा वार्ता के अंत में जारी एक घोषणापत्र में कहा गया था कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल किसी तरह की आतंकी गतिविधियों के वित्त पोषण, पनाह, प्रशिक्षण या योजना बनाने के लिये नहीं किया जाना चाहिए। भारत, अफगानिस्तान में निर्बाध रूप से मानवीय सहायता प्रदान करने की वकालत करता रहा है ताकि उस देश में मानवीय संकट को दूर किया जा सके। भारत ने अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता को अभी तक मान्यता प्रदान नहीं की है।

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