Women’s Hockey World Cup के लिए तैयार Young Brigade: Ishika और Sakshi का संघर्ष और बड़े सपने

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Aug 12, 2026

 पहली बार हॉकी स्टिक थामी थी तो देश के लिये विश्व कप खेलने का सपना देखा था और अब उसे पूरा होते देखने को बेताब भारतीय महिला हॉकी की युवा ब्रिगेड ‘नर्वस’ भी है तो रोमांचित भी। पहली बार विश्व कप खेलने जा रही इशिका, लालथांटलुआंगी, साक्षी राणा, शिल्पी डबास और सुनेलिटा टोप्पो जैसी भारतीय महिला हॉकी खिलाड़ियों के शानदार सफर के पीछे कई चुनौतियां और कुर्बानियां रही हैं। इशिका ने से कहा ,‘‘ विश्व कप में खेलना हर खिलाड़ी का सपना होता है। सचमुच लग रहा है कि सपना सच होने जा रहा है।’’

उन्होंने कहा ,‘‘ मैं शब्दों में बयां नहीं कर सकती कि कैसा महसूस कर रही हूं। यह मौका मेरा ही नहीं , मेरे पूरे परिवार का है। लेकिन असल काम अब शुरू होता है और मैं देश के लिये शत प्रतिशत देना चाहती हूं।’’ स्कूल और हॉकी अभ्यास के बीच भाग दौड़ करने वाली इस खिलाड़ी ने जीवन में संतुलन बनाना काफी जल्दी सीख लिया था। अपने सीनियर्स की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा ,‘‘ हमारे सीनियर शानदार है।

उन्होंने मुझे दबाव का सामना करना सिखाया और रोज मैदान के भीतर और बाहर नयी सीख देते हैं।’’ 19 वर्ष की मिडफील्डर साक्षी ने कहा ,‘‘ मैं रोमांचित भी हूं और नर्वस भी क्योंकि यह मेरा पहला विश्व कप है। लेकिन मुझे लगता है कि नर्वस होना अच्छा है। मैं इस पल का पूरा मजा लेकर मैदान पर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना चाहती हूं।’’ उनका लक्ष्य डिफेंस और फॉरवर्ड के बीच बेहतरीन सेतु का काम करने का है। डबास का सफर इसलिये भी खास रहा है क्योंकि उन्हें काफी इंतजार करना पड़ा। उन्होंने कहा,‘‘ मुझे बहुत बड़ा प्लेटफार्म मिला है। खुश भी हूं और नर्वस भी हूं।’’

अब तक के सफर के बारे में पूछने पर इस खिलाड़ी ने कहा ,‘‘ सबसे बड़ा चैलेंज यही रहा था कि अभी तक शिविर में ही नहीं बुलाया गया था। हॉकी इंडिया लीग के दूसरे सत्र के बाद शिविर में चुना गया। आने वाले खिलाड़ियों को यही सलाह दूंगी कि हार मत मानो, मेहनत करते रहो , कभी तो मौका जरूर मिलेगा।’’ विश्व कप की तैयारी के बारे में उन्होंने कहा ,‘‘ मुझे सीनियर्स और कोचों ने सलाह दी कि अपना स्वाभाविक खेल खेलो , हम मदद के लिये हमेशा हैं। वे अपना अनुभव साझा करते हैं और अच्छे प्रदर्शन के लिये पुश करते हैं।’’

छठी कक्षा से हॉकी खेल रही डबास को यह खेल विरासत में मिला है क्योंकि उनके मां , पिता , भाई सभी हॉकी खेलते थे।’’ उन्नीस साल की टोप्पो ने कहा ,‘‘ मेरी ताकत स्पीड है और इसे टीम के फायदे के लिये इस्तेमाल करना है। मैं विंग खेलती हूं तो जितना जल्दी हो सके स्ट्राइकर को गेंद दूंगी ताकि वह गोल कर सके।मैने जो ट्रेनिंग की है, उसका पूरा उपयोग कर सकूं यही लक्ष्य है।’’ उन्होंने अपनी तरह की उदीयमान खिलाड़ियों से कहा ,‘‘जीवन में बहुत चुनौतियां आयेंगी, हॉकी छोड़ने का भी मन करेगा लेकिन अपने पर भरोसा रखकर मेहनत करते रहो , मेहनत रंग जरूर लायेगी।

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