By अंकित सिंह | Aug 11, 2026
मंगलवार को सूत्रों ने बताया कि सरकार 'विदेशी योगदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026' (FCRA) को विस्तृत जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेज सकती है। गौरतलब है कि इस विधेयक का मकसद एक तय अथॉरिटी के ज़रिए विदेशी योगदान और संपत्तियों की निगरानी, प्रबंधन और निपटान के लिए एक व्यापक ढांचा तैयार करना है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाक़ात के बाद मिज़ोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने कहा कि FCRA बिल पर 12 अगस्त को संसद में चर्चा और उसे पास करने की प्रक्रिया होगी, और इसे पिछली तारीख से लागू नहीं किया जाएगा।
कानून के समय-सीमा के बारे में पूछे जाने पर मुख्यमंत्री ने बताया कि शाह ने प्रतिनिधिमंडल को जानकारी दी कि 12 अगस्त को संसद में इस बिल पर बहस होगी। यह प्रस्तावित कानून 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था। फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल, 2026 सरकार को एक डेज़िग्नेटेड अथॉरिटी बनाने का अधिकार देता है। यह अथॉरिटी विदेशी योगदान और उससे बनाई गई संपत्तियों का मैनेजमेंट संभालेगी, जब किसी संगठन का FCRA रजिस्ट्रेशन रद्द हो जाए, सरेंडर कर दिया जाए या रिन्यू न होने की वजह से खत्म हो जाए।
स बिल में यह भी कहा गया है कि अगर संपत्ति कोई पूजा स्थल है, तो अथॉरिटी को यह पक्का करना होगा कि उसका धार्मिक स्वरूप बना रहे। इसके अलावा, प्रस्तावित कानून में एक्ट के उल्लंघन के लिए अधिकतम सज़ा को पांच साल की जेल से घटाकर एक साल करने का भी प्रावधान है। FCRA पोर्टल के अनुसार, 15 जुलाई 2026 तक 14,449 एक्टिव FCRA सर्टिफिकेट थे, 22,498 रद्द किए गए थे और 15,212 की समय-सीमा खत्म मानी गई थी।
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