चीन से निर्भरता कम करने के लिए भारत की रणनीति तैयार

By अनुराग गुप्ता | Jul 23, 2020

नयी दिल्ली। चीन के साथ जारी सीमा विवाद के बीच में अब भारत चीन को घेरने की रणनीति पर काम कर रहा है। बता दें कि भारत ने व्यापार के क्षेत्र में चीन को चित करने के लिए अपनी रणनीतियां तैयार कर ली हैं। इस रणनीति के तहत चीन से धीरे-धीरे निर्भरता को कम कर दिया जाएगा और स्वदेशी उत्पादों को बढ़-चढ़कर आगे बढ़ाया जाएगा। बता दें कि सरकार ने बुधवार को चीन से आयात को लेकर स्पष्ट नीति तैयार की है।

अंग्रेजी अखबार इकोनॉमिक्स टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन पर दवाओं और मेडिकल डिवाइसेज के मामले में निर्भरता कम करने के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना को मंजूरी देने के साथ ही एक नोटिफिकेशन जारी किया है। बता दें कि सरकार ने जो रणनीतियां बनाईं हैं उनका मकसद सिर्फ और सिर्फ आयात को कम करना है। इसके लिए सरकार ने सामानों की दो अलग-अलग सूची तैयार की है। 

इस सूची में कम कीमत के साथ ज्यादा वॉल्यूम वाले सामान आते हैं। जैसे कि किचन का सामान, फर्नीचर, स्टेशनरी इत्यादि। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इनका आयात रोकने के लिए सरकार एंटी डंपिंग ड्यूटी, सेफगार्ड ड्यूटी का सहारा ले सकती है। ताकि घरेलू उद्योग को भी बढ़ावा दिया जा सके।

दूसरी सूची

इस सूची में ज्यादा कीमत वाले और अच्छी तकनीकि वाले उत्पाद शामिल हैं। जैसे कि मोबाइल फोन, ऑटो कलपुर्जे, आयरन, दवाइयां, सौर ऊर्जा के उपकरण इत्यादि। इन सामानों का आयात एकदम से नहीं रोका जा सकता इसलिए सरकार चरणबद्ध तरीके से इनका आयात कम करेगी। 

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इसके लिए सरकार पहले उन देशों की पहचान करेगा जहां से इन जरूरी सामानों को खरीदा जा सकें। इसके अलावा सरकार देश में उत्पादन को भी बढ़ावा देगी और आपूर्ति को कम करने का प्रयास करेगी।

6940 करोड़ की प्रोत्साहन राशि होगी खर्च

सरकार धीरे-धीरे निर्भरता को कम करने के लिए अब दवाइयों और मेडिकल डिवाइसेस का उत्पादन को बढ़ावा देगी। इस बाबत सरकार ने एक नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है। जिसके तहत दवाओं के उत्पादन और मेडिकल डिवाइसेस के लिए 6940 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि खर्च की जाएगी। 

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सरकार की इस योजना के तहत दवाओं का निर्माण करने वाली कम्पनियों को एंटीवायोटिक्स समेत 41 बल्क ड्रग्स का निर्माण देश में करना पड़ेगा। बता दें कि अभी पैरासिटामॉल से लेकर कई विटामिंस की दवाइयों को चीन से आयात किया जाता है। ऐसे में सरकार इस निर्भरता को समाप्त करने के लिए 6,940 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि खर्च करने जा रही है।

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