Indira Gandhi Death Anniversary: इंदिरा गांधी को कहा जाता था 'गूंगी गुड़िया', पीएम बनने के बाद देश ने सुनी सशक्त गूंज

By अनन्या मिश्रा | Oct 31, 2023

हमारे देश में कई ऐसी महिलाएं हैं जो नारी शक्ति की मिसाल हैं। इन महिलाओं का जीवन हर किसी के लिए प्रेरणा का स्त्रोत है। इन्हीं महिलाओं की सूची में एक नाम पूर्व पीएम इंदिरा गांधी का है। बता दें कि इंदिरा गांधी देश की पहली और इकलौती महिला प्रधानमंत्री थी। आज ही के दिन यानी की 31 अक्तूबर को इंदिरा गांधी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। देश की आजादी के इतने सालों में इंदिरा गांधी के बाद कोई भी महिला प्रधानमंत्री नहीं बनी। बतौर प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने कई दमदार फैसले लिए, जिससे पूरे देश में क्रांति फैल गई। आइए जानते हैं उनकी डेथ एनिवर्सरी के मौके पर इंदिरा गांधी के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...

भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के घर 19 नवंबर 1917 को इंदिरा गांधी का जन्म हुआ था। वैसे तो इंदिरा गांधी को राजनीति विरासत में मिली थी। लेकिन उनके अंदर गजब की राजनीतिक दूरदर्शिता थी। पं. नेहरु के बाद उनकी राजनीतिक विरासत को संभालते हुए इंदिरा गांधी ने खुद पर लगे 'गूंगी गुड़िया' के तमगे को हटाया। उन्होंने दमदार महिला के रूप में अपनी पहचान बनाई। बता दें कि ब्रिटिश शासन के खिलाफ इंदिरा ने महज 11 वर्ष की आयु में बच्चों की वानर सेवा का गठन किया। औपचारिक तौर पर साल 1938 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हुईं और पिता नेहरु के साथ राजनीतिक कार्यों में हाथ बंटाने लगीं।

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संभाली पिता की विरासत

पं. नेहरु के निधन के बाद इंदिरा गांधी के हाथों में कांग्रेस पार्टी की जिम्मेदारी आ गई। इंदिरा गांधी लाल बहादुर शास्त्री के मंत्रिमंडल में सूचना एवं प्रसारण मंत्री रहीं। वहीं शास्त्री की मौत के बाद उनको पीएम पद का दावेदार बनाया गया। जिससे की पं. नेहरु के उत्तराधिकारी के तौर पर इंदिरा गांधी को राजनीति में उतारा जा सके। उस समय तक इंदिरा गांधी को 'गूंगी गुड़िया' कहा जाता था। लेकिन जब साल 1966 में इंदिरा गांधी को देश की प्रधानमंत्री बनने का मौका मिला। तब देश ने इस मूक गुड़िया के फैसलों की गूंज को सुना। 

कांग्रेस का विभाजन

कांग्रेस पार्टी के कई नेता यह समझ चुके थे कि इंदिरा गांधी मूक गुड़िया या फिर कोई साधारण महिला नहीं है। राजनीति में इंदिरा गांधी का कोई काट नहीं था। उन्हें राजनीति में रोक पाना काफी मुश्किल था। इस स्थिति को समझने के बाद कांग्रेस सिंडिकेट इंदिरा को पद से हटाने की तैयारी करने लगा। जिसके जवाब में इंदिरा गांधी ने पार्टी का विभाजन कर दिया। बता दें कि यह उस दौर की राजनीति का सबसे दबंग और हिटलरशाही फैसला साबित हुआ था।

आपातकाल

इंदिरा गांधी के शासनकाल में वैसे तो कई बड़े फैसले लिए गए। लेकिन जो सबसे बड़ा और विवादास्पद फैसला आपातकाल रहा। बता दें कि साल 1971 में इंदिरा गांधी पर मशीनरी के दुरुपयोग का आरोप लगा था। जिसके बाद 1975 के लोकसभा चुनाव को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया। वहीं इंदिरा गांधी पर भी चुनाव ना लड़ने का प्रतिबंध लगा दिया गया तो विपक्ष भी इंदिरा गांधी से इस्तीफे की मांग करने लगा। इस मामले से निपटने के लिए इंदिरा गांधी ने विपक्ष और कोर्ट के खिलाफ जाकर देश में आपातकाल की घोषणा कर दी। मीडिया की आजादी पर रोक लगा दी और कई बड़े फेरबदल किए। आपातकाल को इतिहास का सबसे काला दिन माना जाता है।

मौत

31 अक्टूबर 1984 की शाम को इंदिरा गांधी के 2 सिख गार्डों ने उनपर ताबड़तोड़ गोली की बौछार कर दी। इंदिरा गांधी की हत्या से पूरा देश अवाक् रह गया था। बताया जाता है कि इंदिरा गांधी को अपनी मौत का पूर्वाभास हो गया था। क्योंकि वह डॉक्टर कृष्ण प्रसाद माथुर से अक्सर कहा करती थी कि किसी दुर्घटना में उनकी अचानक मौत हो सकती है। हांलाकि उनकी यह बात सच साबित हुई।

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