Indore Water Contamination | लैब रिपोर्ट से पुष्टि, पाइपलाइन में लीकेज के कारण 14 लोगों की हुई मौत, 200 लोग अभी भी अस्पताल में भर्ती

By रेनू तिवारी | Jan 02, 2026

इंदौर में पानी में मिलावट: लगातार आठवें साल भारत का सबसे स्वच्छ शहर चुने गए इंदौर में दूषित पीने के पानी से भागीरथपुरा इलाके में डायरिया और उल्टी फैलने के बाद एक गंभीर नागरिक संकट खड़ा हो गया है। इस घटना ने शहर में नागरिक निगरानी और पानी की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इंदौर नगर निगम (IMC) के अधिकारियों के अनुसार, भागीरथपुरा में मुख्य पानी की सप्लाई पाइपलाइन में लीकेज का पता चला है।

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इंदौर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने गुरुवार को पत्रकारों को बताया कि शहर के एक मेडिकल कॉलेज द्वारा तैयार की गई एक लैब रिपोर्ट में भागीरथपुरा इलाके में एक पाइपलाइन में लीकेज के कारण पीने के पानी में मिलावट की पुष्टि हुई है, जहां से यह प्रकोप शुरू हुआ था। उन्होंने रिपोर्ट के विस्तृत नतीजों का खुलासा नहीं किया।

अधिकारियों ने बताया कि भागीरथपुरा में एक पुलिस चौकी के पास मुख्य पीने के पानी की सप्लाई पाइपलाइन में एक लीकेज का पता चला, जिसके ऊपर एक शौचालय बनाया गया था। उन्होंने कहा कि लीकेज के कारण इलाके में सप्लाई होने वाला पानी दूषित हो गया।

अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय दुबे ने कहा कि अधिकारी किसी भी अन्य लीकेज की जांच के लिए भागीरथपुरा में पूरी पीने के पानी की पाइपलाइन की बारीकी से जांच कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि निरीक्षण के बाद गुरुवार को पाइपलाइन के ज़रिए घरों में साफ पानी की सप्लाई की गई, लेकिन निवासियों को एहतियात के तौर पर इसे उबालकर ही पीने की सलाह दी गई है। पानी के सैंपल भी लिए गए हैं और जांच के लिए भेजे गए हैं।

इस घटना का ज़िक्र करते हुए दुबे ने कहा कि राज्य सरकार भविष्य में ऐसे प्रकोपों ​​को रोकने के लिए पूरे राज्य के लिए एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर जारी करेगी। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर स्थिति का जायजा लेने के लिए भागीरथपुरा का दौरा किया।

स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि गुरुवार को भागीरथपुरा में 1,714 घरों के सर्वे के दौरान 8,571 लोगों की जांच की गई। इनमें से उल्टी और दस्त के हल्के लक्षण वाले 338 लोगों को उनके घरों पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।

अधिकारी ने आगे बताया कि पिछले 8 दिनों में 272 मरीज़ों को स्थानीय अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जिनमें से 71 को डिस्चार्ज कर दिया गया है। फिलहाल, 201 मरीज़ अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें से 32 इंटेंसिव केयर यूनिट में हैं।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसे "आपातकाल जैसी स्थिति" बताया

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अस्पतालों का दौरा किया और एक हाई-लेवल रिव्यू मीटिंग की अध्यक्षता की, जिसमें उन्होंने इस प्रकोप को "आपातकाल जैसी स्थिति" बताया। उन्होंने कहा कि प्रशासन की तरफ से किए गए कोऑर्डिनेटेड प्रयासों से कई मरीजों को समय पर इलाज मिला। सरकार के अनुसार, हजारों निवासियों की स्क्रीनिंग की गई, जिसमें कई संदिग्ध मामले सामने आए। ज़्यादातर अस्पताल में भर्ती मरीजों की हालत स्थिर बताई गई। यादव ने कहा, "राज्य सरकार लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगी। जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी," और अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे शहर भर में पीने के पानी और सीवर लाइनों की जांच करें ताकि ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। 

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