Ahmedabad के 'भामाशाह' Maganbhai Patel, झुग्गी के बच्चों के लिए दान की Mercedes, बदल रहे तकदीर

By प्रेस विज्ञपति | Jan 28, 2026

अहमदाबाद के सरखेज वार्ड के न्यू फतेहवाड़ी,आज़ादनगर इलाके में विकर सेक्शन के कई परिवार रहते हैं। इस इलाके के लोग टेम्पो चलाना,कबाड़,प्लंबिंग का काम जैसे कई मेहनत मजदूरीवाले काम करते हैं और इस परिवार की महिलाए सिलाई काम,घरकाम और मज़दूरी करके अपना गुज़ारा करती हैं।इस इलाके में सरकारी स्कुल दूर होने की वजह से इन परिवार के बच्चे प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने जाते हैं। परिवार की खराब आर्थिक स्थिति होने की वजह से ये बच्चे पढाई के साथ मजदूरी करने भी जाते हैं।इस इलाके में अभी भी रहने के लिए पक्की सड़क,पानी,बिजली और पक्के मकान जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी है।


यह बात गुजरात के जाने-माने उद्योगपति एव "भामाशा" के नाम से जानेवाले समाजसेवी  मगनभाई पटेल के ध्यान में आई। वे साल 2022 से इन परिवारों की मदद के लिए आए और इसी इलाके में "मधुरम" बंगले में रहनेवाले  मधुभाई शुक्ला (उम्र 92), जिन्होंने M.A.,MED किया है और अहमदाबाद की एक सरकारी स्कूल में 35 साल तक प्रिंसिपल रह चुके हैं, वे आज  मगनभाई पटेल और मती शांताबेन मगनभाई पटेल के आर्थिक सहयोग से इस इलाके में कई समाज सेवा के कार्य कर रहे हैं।मधुभाई शुक्ला की पत्नी मती हंसाबेन शुक्ला,जो एक सरकारी अस्पताल में नर्स थीं,अब रिटायर हो चुकी हैं और मधुभाई शुक्ला के साथ हेल्थ,एजुकेशन,सोशल सिक्योरिटी और न्याय विभाग संबंधित सभी कामों में शामिल हैं। मगनभाई पटेल के मार्गदर्शन और वित्तीय सहायता से उन्होंने अहमदाबाद के आज़ादनगर में स्थित अपने घर पर "मधुरम शिक्षण संस्कार सुधारणा केन्द्र" शुरू किया, जिसके चेयरमैन  मगनभाई पटेल  हैं।


आज मधुभाई शुक्ला इस स्लम एरिया के बच्चों को रोज़ाना मुफ़्त ट्यूशन दे रहे हैं और इन बच्चों में अच्छी पढ़ाई-लिखाई और अच्छे संस्कार डाल रहे हैं।  मगनभाई पटेल किसी भी कॉर्पोरेट कंपनी के CSR फंड एव समाजिक संस्था की वित्तीय सहायता लिए बिना सिर्फ अपने पैसो से इस इलाके के हज़ारों बच्चों को स्कूल बैग,नोटबुक, यूनिफ़ॉर्म,स्कूल फ़ीस वगैरह देकर शिक्षा के क्षेत्र में जो कार्य कर रहे है वह अविस्मरणीय है,परिणाम स्वरूप इस इलाके के बच्चों का पढ़ाई-लिखाई का स्तर बहुत बढ़ गया है। आज इस इलाके के बच्चे रोज़ाना इस संस्था में मुफ़्त ट्यूशन के लिए आते हैं। उनमें संस्कार भी आए हैं, वे अपने माता-पिता का आदर करना सीख गए हैं। वहीं, इन बच्चों के माता-पिता जिन्हें पान-मसाला, बीड़ी-सिगरेट, तंबाकू जैसी लत थी और वे अपने बच्चों को तंबाकू के पैकेट और मसाले खिलाकर तंबाकू का आदी बनाते थे, तब यह बात  मगनभाई पटेल के ध्यान में आई, तो उन्होंने इन बच्चों के माता-पिता की काउंसलिंग की और उन्हें एव उनके बच्चों की तंबाकू की लत छुड़वाई ऐसे कई उदाहरण हैं,इसके साथ  मगनभाई पटेलने राज्य एव देश में कई जगहों पर नशे पर फ्री सेमिनार भी आयोजित किए हैं।


 मगनभाई पटेल की वित्तीय सहायता और  मधुभाई शुक्ला की एजुकेशनल गाइडेंस से इस इलाके के बच्चों की पढ़ाई में दिलचस्पी में काफी सुधार हुआ है। हाल ही में,इस स्लम एरिया के स्कूल के करीब 50 से ज़्यादा बच्चों को मगनभाई पटेलने स्कुल बेग और स्टेशनरी किट बांटी।उनके साथ उनकी बहन मती विजुबेन पटेल, जन्म: 8.6.1956 (उम्र लगभग 70 वर्ष), जिन्होंने वर्ष 1978 में गुजरात यूनिवर्सिटी महिला कॉलेज,राजकोट से बी.ए.मनोविज्ञान की डिग्री प्राप्त की है।उन्हें वर्ष 1978 में अमेरिका का ग्रीन कार्ड मिला और वे अमेरिका गए।उन्होंने वहा प्राइवेट कम्पनीओ में जॉब की और 20 वर्षों तक अमेरिकी सरकार में एक जूनियर ऑफिसर के रूप में काम किया है।मती विजुबेन की शादी 7 अक्टूबर 1978 को USA की डलास यूनिवर्सिटी से MBA की डिग्री प्राप्त  जयभाई पटेल से हुई,वे भी इस संस्था की मुलाकात के लिए आये थे। अमेरिका से आए इस दंपतिने इस संस्था का दौरा किया तो वे काफी प्रभावित हुए और इस दंपत्तिने चार बच्चों की स्कूल फीस 4500 रुपए भरी और जो बच्चे फीस न दे पाने के कारण स्कूल नहीं जा पाते थे और बालश्रम करने लगे थे अब वे स्कूल जा रहे हैं। इस स्थिति को देखकर मती विजुबेनने अमेरिका में एक समूह बनाया और हर महीने 1000 US$ इकट्ठा कर इस सेवा में दान करने का संकल्प लिया। यहां बताना जरूरी है कि 92 वर्षीय मधुभाई शुक्ला जो इस झुग्गी क्षेत्र के बच्चों के विकास के लिए लगातार काम कर रहे हैं,उन्होंने अपने एक इंटरव्यू के दौरान बताया कि इस इलाके में एक मजदूर महिला अपने दो बच्चों के साथ रहती है  उसका नशेड़ी पति रोज शराब पीकर आता था और उसके साथ मारपीट करता था अभी हाल ही में उसके पति का अवसान हुआ और उसके बच्चो को पालने की जिम्मेदारी उस पर आ गई तब इस महिलाने भीख मांगकर या प्रॉस्टिट्यूशन से अपने बच्चो को पालने का फैसला कर लिया था। यह महिला दिमागी तौर पर इतनी टूट चुकी थी कि उसने सुसाइड करने जैसा फैसला ले लिया था। जब मधुभाई शुक्लाने मगनभाई पटेल को इस दयनीय और दिल दहला देनेवाली स्थिति के बारे में बताया,तो मगनभाई पटेलने बिना एक पल बर्बाद किए तुरंत इस महिला से मुलाकात की और उसे एक ऑटोमैटिक सिलाई मशीन डोनेट की और उसे घर चलाने के लिए कुछ पैसे भी दिए। इसके साथ ही उन्होंने उसके दोनों बच्चों की स्कुल फ़ीस भरी और इस महिला का काउंसेलिंग कर के जिंदगी जीने के लिए और मुश्किलों का सामना करने की हिम्मत दी। आज यह महिला सिलाई के काम से हर दिन करीब 400 से 500 रुपये कमा रही है और खुशहाल ज़िंदगी जी रही है। मगनभाई पटेलने ऐसी सैकड़ों गरीब और मजदूर महिलाओं को अपने खर्चे पर रोजगार के साधन उपलब्ध करा कर मदद की है। जिसके बारे में अगर यहां बताया जाए तो एक किताब बन सकती है।

ऐसी स्थिति आज भी देश के कई राज्यों में देखने को मिल रही है, यहां बात माइक्रो ऑब्जर्वेशन की हैं। गरीब, मजदूर और मेहनतकश परिवारों के विकास की जिम्मेदारी न केवल सरकार की है, बल्कि अगर देश के प्रमुख सामाजिक संगठन,विभिन्न NGOs, MLA, सांसदों के फंड एव देश की कॉर्पोरेट कंपनियों के CSR फंड का इस्तेमाल इस गरीब,मजदूर और आर्थिक रूप से पिछड़े परिवार एव अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए किया जाए तो यह देश के विकास में एक बड़ा योगदान माना जाएगा। साथ ही साथ ऐसे पदाधिकारी और आर्थिक रूप से सक्षम नागरिक केंद्र और राज्य सरकारों की विभिन्न योजनाए,सामाजिक न्याय और सुरक्षा विभाग के तहत विभिन्न योजनाए, डेयरी,कृषि,स्वास्थ्य,आवास,खाद्य और राशन,कुटीर उद्योग,खादी ग्रामोद्योग, महिला उद्यमी,सखी मंडल जैसी 40 से अधिक योजनाए है जिसका का लाभ इन श्रमिक वर्ग तक लाभ पहुंचाने के लिए सरकार के साथ मिलकर एक ब्रिज का काम करें और फंड उपलब्ध कराये तो यह समस्या काफी हद तक हल हो सकती है और एक मंदिर बनाने जैसा शुभ कार्य माना जाएगा और "वसुधैव कुटुम्बकम" का सूत्र  सही मायने में चरितार्थ हुआ कहा जाएगा।


देश को आज़ाद हुए भले ही 75 साल हो गए हों, लेकिन देश के श्रमिक परिवारों की आर्थिक स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। आज देश में बड़ी-बड़ी इमारते,मॉल,बड़े-बड़े प्रोजेक्ट्स बन रहे हैं,अगर आप वहां काम करनेवाले पुरुष और महिलाओ की हालत देखेंगे,तो दिल पिघल जाएगा। वे अपने छोटे-छोटे बच्चों को ज़मीन पर लिटाकर काम करते हैं। इन मज़दूरों को उनकी मेहनत के हिसाब से कम मज़दूरी मिलती है क्योंकि कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम की वजह से इन मज़दूरों का केवल शोषण ही होता है। कम मज़दूरी की वजह से काम करनेवाली महिलाए और उनके छोटे बच्चों में कुपोषण देखने को मिलता है।

स्लम एरिया के इन बच्चों के फिजिकल और मेंटल डेवलपमेंट के लिए मगनभाई पटेल कैरम और शतरंज जैसे इनडोर गेम्स जैसी स्पोर्ट्स एक्टिविटीज़ ऑर्गनाइज़ करते हैं। इस एरिया के बच्चों की फिजिकल हेल्थ के लिए,मगनभाई पटेल की वित्तीय सहायता से योग शिबिर भी ऑर्गनाइज़ किए जाते हैं। इसके साथ ही, हर साल मगनभाई पटेल इस स्लम एरिया के बच्चों को खजूर,पिचकारी,पटाखे,पतंग इत्यादि देते हैं ताकि वे होली-धुलेटी,दिवाली,मकरसंक्रांति जैसे त्योहार मना सकें।इस एरिया की महिलाओं को रोजगारनोमुख बनाने के लिए मगनभाई पटेल की वित्तीय सहायता से उन्हें अक्सर सिलाई मशीनें और एम्प्लॉयमेंट ओरिएंटेड इक्विपमेंट भी बांटे जाते हैं।


 मगनभाई पटेल अक्सर इस इलाके में आते रहते हैं।यहां पर मनोदिव्यांग बच्चो की संस्था "चिन्मय" जहां पर करीब 50 से भी ज्यादा मेन्टली रिटार्डेड बच्चो की देखभाल की जा रही है। यहॉ पर उनका रहने एव खाने पिने का सम्पूर्ण ख्याल रखा जा रहे है। यहां पर इन बच्चो की मेडिकल सारवार के लिए 24 घंटे डॉक्टर भी रहते है ताकि आपातकालीन परिस्थिति में इन बच्चो की चिकित्सा हो सके। इस संस्था मे मनोदिव्यांग बच्चो की बढ़ती तादात देखकर "मधुरम" बंगले के पास करीब 1100 var के प्लॉट में मनोदिव्यांग बच्चों के लिए "चिन्मय" संस्था की एक ओर बिल्डिंग तैयार हो चुकी है,जिसका खात मुहर्त मगनभाई पटेलने किया था और इस मौके पर उन्होंने अपने और उनके ग्रुप की तरफ से करीब 51 लाख रुपये डोनेशन देने का फैसला भी किया। यहां खास बात यह है कि  मगनभाई पटेल की कोशिशों से एक डोनर की फाइनेंशियल मदद से 500 var यानी 1500 sq.var की तीन मंज़िला ईमारत तैयार हो चुकी है,जहां S.T. स्टैंड,रेलवे स्टेशन,बस स्टेशन से बेसहारा हालात में मिले मेंटली रिटार्डेड बच्चे और सामाजिक न्याय एव सुरक्षा विभाग से से भेजे गए अनट्रेंड मेंटली रिटार्डेड बच्चे,जिन्हें टॉयलेट और बाथरूम का भी पता नहीं होता ऐसे करीब 200 मनोदिव्यांग बच्चे इलाज किया जायेगा।इसके साथ ही,उनके रहने और खाने का भी इंतज़ाम किया गया है,जब कि करीब 400 मेंटली रिटार्डेड बच्चे की एप्लीकेशन पेंडिंग हैं,उन्हें भी आनेवाले समय में शामिल किया जाएगा। इस संस्था की मुलाकात के दौरान,मगनभाई पटेल मानसिक रूप से विकलांग बच्चों के साथ गरबा-रास खेलते हैं,उनके साथ प्यार से रहते हैं,उनका हौसला बढ़ाते हैं और घंटों उनके साथ बिताते हैं। अगले जून 2026 से इस संस्था में मानसिक रूप से विकलांग बच्चों की प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने की संभावनाए है। इस संस्था में ग्राउंड फ्लोर पर एक हॉल भी बनाया गया है,जिसमें मगनभाई पटेल के मार्गदर्शन और वित्तीय सहायता से एक सेवाकीय  प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा ताकि इस झुग्गी-झोपड़ी इलाके की करीब 40 से 50 महिलाएं सिलाई का काम और छोटे-मोटे घरेलू उद्योग शुरू कर सकें और नौकरीपेशा बन सकें। इस के ऊपर देश की मशहूर हिंदी न्यूज़ चैनल प्रभासाक्षीने इस संस्था के ऊपर एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म भी बनाई है,जिसे सोशल मीडिया पर भी बहुत अच्छा रिस्पॉन्स मिला है जिसके लिए मगनभाई पटेल और इस संस्था के सभी ट्रस्टी उनके आभारी है।इस संस्था के फाउंडर  गर्गभाई शुक्ला (उम्र 88) हैं, जो करीब 30 सालों से इस संस्था के मेन्टली रिटार्डेड बच्चों की सेवा कर रहे हैं और आज उनके परिवार में उनके बेटे पेरिनभाई शुक्ला और बहू आरतीबेन शुक्ला अपनी एग्जीक्यूटिव लेवल की नौकरी छोड़कर इस "चिन्मय" संस्था की ज़िम्मेदारियों को बहुत ईमानदारी से निभा रहे हैं।


यहां एक दिल को छू लेनेवाली कहानी बताना ज़रूरी है कि नवंबर 2025 के समय में इस बिल्डिंग में मजदूरी करनेवाली एक महिला अपने 1.5 साल के बच्चे को चदर ओढ़ाकर सुलाकर काम कर रही थी। यह महिला कुपोषित थी और उसका बच्चा भी कुपोषित होने की वजह से चल नहीं सकता था। जब यह बात मगनभाई पटेल को पता चली,तो उन्होंने तुरंत एक बेबी कैरिज का इंतज़ाम किया और खुद उसे देने गए और बच्चे को अपने हाथों से उठाकर बेबी कैरिज में बिठाया। इस दिन उन्होंने सुबह चांगोदर में स्थित अपनी मती एन.एम. पडलिया फार्मेसी कॉलेज में एक सेमिनार में भाग लिया और वहा से सीधे इस केन्द्र में आए थे और इस दयनीय स्थिति से परेशान होकर इस दिन सिर्फ़ चना और गुड़ खाकर दिन बिताया था। एक महीने बाद,जब मधुभाई शुक्लाने पटेल साहब को बताया कि यह बच्चा अब चलने लगा है, तो वे इस संस्था में फिर से आए और बच्चे को चलता हुआ देखकर बहुत इमोशनल और खुश हुए। उन्होंने कुछ पैसो की मदद भी की ताकि इस बच्चे की मां पौष्टिक खाना खा सके। यहां बताना ज़रूरी है कि मगनभाई पटेल साहबने ऐसी अनगिनत महिलाओं की मदद की है जिनकी सेहत पौष्टिक खाना न मिलने की वजह से ठीक नहीं थी। उन सभी को प्रोटीन पाउडर दिया है। आज इस महिला का बच्चा अपने पैरों पर चल सकता है,जैसा कि तस्वीर में देखा जा सकता है।


मगनभाई पटेलने इस बच्चो के लिए मधुभाई शुक्ल के घर पर 50 से ज़्यादा बचत गल्ले भी रखे हैं,ताकि उनके मां-बाप इस बचत को निकाल न सके। जिसमें आज भी मगनभाई पटेल हर महीने इन बच्चों की सेविंग्स के तौर पर कुछ पैसे दे रहे हैं। इस संस्था में अक्सर आने-जाने के दौरान,मगनभाई पटेल बच्चों के साथ आराम के पल भी बिताते हैं और उनके माता-पिता से भी बात करते हैं और उनसे कहते हैं कि अगर उन्हें कोई फाइनेंशियल या सोशल प्रॉब्लम हो तो वे उनके सेक्रेटरी से कॉन्टैक्ट कर सकते है। यहां बताना ज़रूरी है कि मगनभाई पटेल हर महीने अहमदाबाद के अलग-अलग स्लम एरिया में गरीब परिवारों की विधवा और ज़रूरतमंद महिलाओं को लगभग 5 से 6 सिलाई मशीनें,यानी सालाना 60 से 70 सिलाई मशीनें डोनेट करते हैं। सिलाई मशीनें देने के बाद,वे उनकी मॉनिटरिंग भी करते हैं और रिपोर्ट भी लेते हैं। 


गरीब एव ज़रूरतमंद बच्चों से अपार प्यार रखनेवाले मगनभाई पटेल को उनके बेटे जतिनभाई पटेलने करीब 15 साल पहले मगनभाई पटेल की 50वीं शादी की सालगिरह के अवसर पर पर 53 लाख रुपये की मर्सिडीज कार गिफ्ट की थी,लेकिन  मगनभाई पटेल के पास पहेले से कई कारे थी और और मर्सिडीज जैसी लग्ज़री कारों की जैसे,उन्हें कोई चाहत न हो,वैसे शुरू में दो साल तक इस्तेमाल नहीं हुई और फिर उन्होंने गुजरात के राजवाला प्राइमरी स्कूल के बच्चों को, जो कभी ट्रेन में भी नहीं बैठे थे,अपनी मर्सिडीज कार में बिठाया,बच्चे बहुत खुश हुए और स्कूल के प्रिंसिपलने मगनभाई पटेल को एक "आभार पत्र " के ज़रिए शुक्रिया अदा किया। जो इस आर्टिकल के साथ सम्मिलित है।


राजवाला प्राइमरी स्कूल का आभार पत्र

दिनांक : 20.07.2019

प्रति,

 मगनभाई एच.पटेल साहब

प्रमुख- सौराष्ट्र पटेल सेवा समाज


विषय- राजवाला प्राइमरी स्कूल की मुलाकात लेकर आपके आर्थिक सहयोग के लिए धन्यवाद।


ऊपर दिए गए विषय अनुसार,आपने दिनांक 18.7.2019 को गुजरात के बावला तालुका के राजवाला प्राइमरी स्कूल का दौरा किया। नलकांठा के अंदरूनी इलाके में इतने छोटे से स्कूल में आने और हमारा उत्साह बढ़ाने के लिए पूरा गांव, स्कूल परिवार और स्कूल SMC आपका धन्यवाद करता है।


आप स्कूल आए और स्कूल के छोटे-छोटे स्टूडेंट्स के साथ समय बिताया, उन्हें स्कूल बैग दिए और उनका हौसला बढ़ाया और स्कूल में चल रही एक्टिविटीज़ को देखकर बच्चों के साथ समय बिताया। यह हमारे लिए बहुत ही रोमांचक बात थी क्योंकि आप बच्चों की ज़रूरतों को जानते थे और हमारा हौसला बढ़ाया। बच्चे आज भी आपके साथ बिताए पलों को याद करते हैं। आपने स्कूल में पेड़ लगाए और हमारे ग्रीन स्कूल, क्लीन स्कूल अप्रोच को बढ़ावा दिया। स्कूल लंच के समय आप बच्चों के साथ बैठकर बातें करते थे, स्कूल की ज़रूरतों और स्कूल के डेवलपमेंट के लिए बहुत कीमती गाइडेंस देते थे,और हां, हमारे बच्चोंने अभी तक रेलवे से सफ़र नहीं किया है,यह जानने के बाद, आपने स्कूल के सभी बच्चों को बारी-बारी से अपनी मर्सिडीज़ कार में सफ़र करवाया, जिसे हमारे बच्चे आज भी याद करते हैं।

आज लोग बड़े-बड़े मंदिरों और बड़े-बड़े स्कूलों को बहुत दान देते हैं। उस समय आप नलकांठा की अंदरूनी में एक छोटे से स्कूल में आए और हमारा उत्साह बढ़ाया इसके लिए पूरा गांव,स्कूल परिवार और स्कूल SMC आपका धन्यवाद करते हैं और चाहते हैं कि आप फिर से स्कूल आएं और हमारा उत्साह बढ़ाएं।


स्कूल परिवार हमेशा बेहतरीन पढ़ाई और नई-नई एक्टिविटीज़ करता रहता है। जिसमें आपका सहयोग अविरत मिलता रहा है। जब आप स्कूल आए थे, तो आपने स्कूल की एक्टिविटीज़ और स्कूल की ज़रूरतों के बारे में लिखने के लिए कहा था। इसके साथ हमने स्कूल का वीडियो और स्कूल विज़िट फ़ाइल भेजी है। फिर से धन्यवाद सर और हमें उम्मीद है कि आप फिर से एकबार स्कूल अवश्य आएंगे।


समस्त राजवाला स्कूल परिवार, ता.बावला,जीला.अहमदाबाद,गुजरात


मगनभाई पटेलने अपने एक इंटरव्यू में कहा था कि "जब भी मैं इस कार से किसी गरीब इलाके में किसी समाजसेवा के काम के लिए जाता हूं, तो मेरी आत्मा मुझे वहां जाने से रोकती है और तब से इस कार का इस्तेमाल समाजसेवा के कार्य में कर रहा हु।मैं इसे उन स्कूली बच्चों को दे रहा हूं जो कभी कार में नहीं बैठे और जरूरतमंद युवाओं को शादी के मौकों पर दूल्हे के लिए ड्राइवर के साथ दे रहा हूं।“ ऐसे कई मौके हैं, जिनमें हाल ही में जब मैंने जतिन ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज में काम करनेवाले डिप्लोमा इंजीनियर अजयभाई बारोट की शादी के मौके पर ड्राइवर के साथ यह कार दी,तो अजयभाई बारोट का परिवार बहुत खुश हुआ और उन्होंने मगनभाई पटेल का शुक्रिया अदा किया। अजयभाई बारोट के पिताने अपनी जिंदगी में रिक्शा चलाकर तीन बेटियों की शादी की और चौथे बेटे अजयभाई बारोट को डिप्लोमा इंजीनियर बनाया और उसकी शादी में मर्सिडीज जैसी शानदार कार में देखा तो उन्होंने मगनभाई पटेल को अपनी अंतरात्मा से आशीर्वाद दिया। आज अजयभाई बारोट मगनभाई पटेल के जतिन ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज में 60,000 रुपये प्रति माह की सैलरी पर काम कर रहे हैं और आनेवाले समय में, अजयभाई बारोट के हुनर, मेहनत और लगन के अनुसार 10 लाख रुपये के सालाना पैकेज पर काम कर सकेंगे,जिसमे कोई संदेह नहीं है।


यहां माइक्रो ऑब्ज़र्वेशन की बात है  मगनभाई पटेल साहेबने अपनी ज़िंदगी का ज़्यादातर हिस्सा समाजसेवा के काम में लगाया है और कई संस्थाओं को फिर से ज़िंदा किया है जो खत्म हो चुकी थीं। एक ट्रांसपेरेंट पर्सनैलिटी जिन्होंने कभी किसी पॉलिटिकल पद, इज्जत या पोजीशन की उम्मीद नहीं की, आज देश और दुनिया के लोग उन्हें भामाशा,भीष्म पितामह और दानवीर कर्ण जैसे नाम से नवाजते हैं और आज 84 साल की उम्र में भी उन्होंने अपने खर्चे पर कई संस्थाओं को फाइनेंशियल मदद दी है और वे आज भी 50 से ज़्यादा संस्थाओं में विभिन्न उच्च पदों पर काम कर रहे हैं और समाज से एक भी रुपये की उम्मीद बिना देश की सेवा कर रहे हैं। आज कई संस्थाएं एव लोग मगनभाई पटेल साहब को मिलकर एक ही सवाल पूछते हैं कि " सर,इतनी उम्र में भी आपका टाइम मैनेजमेंट का सीक्रेट क्या है ?आज हमारे देश में किसी भी सामाजिक संगठन,सामाजिक नेता या राजनीतिक नेताने मज़दूर वर्ग के परिवारों की हालात पर ध्यान देने की ज़हमत नहीं उठाई है, जो बहुत दुख की बात है। आज हमारे देश में विकास की बातें सिर्फ़ अख़बार,इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और सोशल मीडिया में ही देखने को मिलती हैं। अगर हम गरीब, मज़दूर और मेहनतकश लोगों के रहन-सहन पर ध्यान नहीं देंगे, तो यह तय है कि विकास की बातें सिर्फ़ कागज़ों तक ही सीमित रहेंगी। यह ज़िम्मेदारी न केवल सरकार की है,बल्कि सामाजिक संगठन,अलग-अलग NGOs,राजनीतिक और सामाजिक नेताओं की भी है। अगर हम इन गरीब और श्रमजीवी परिवारों को रोज़गार देने में मदद करेंगे तो हमारे देश का कायापलट अवश्य हो जाएगा।


"राष्ट्रसेवा" को अपना जीवनमंत्र मानते हुए और सही मायने मे निभाते हुए,समाज के गरीब एव आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों के लिए हमेशा चिंतित मगनभाई पटेल साहब आज 85 साल की उम्र में भी हर दिन करीब 18 घंटे काम कर रहे हैं। हर दिन करीब 5 से 10 राजकीय लोग एव अलग-अलग संगठनों के लोग उनसे मिलने के लिए बेताब रहते हैं और वह सभी को समय देते हैं,सभी मीटिंगों में समय पर पहुंचते हैं।अपने बिज़नेस के साथ-साथ,वह अपने खर्चे पर अपनी सामाजिक ज़िम्मेदारियां भी निभाते है,जिसका श्रेय उनके टाइम मैनेजमेंट और “नेशन फर्स्ट” की भावना को जाता है। 

प्रमुख खबरें

Australian Open: हार के बावजूद बेन शेल्टन को अपने खेल से मिली नई उम्मीद

Industrial Growth ने पकड़ी रॉकेट की रफ्तार, IIP Data 7.8% बढ़ा, दो साल का टूटा रिकॉर्ड

Iran की ओर बढ़ा अमेरिका का USS अब्राहम लिंकन बेड़ा, Trump बोले- मिशन के लिए तैयार

India-EU Deal का बड़ा असर: क्या अब Mercedes, BMW जैसी Luxury Cars होंगी सस्ती?