बिहार में जातीय समीकरण को साधने में कौन किसपर है भारी, NDA और I.N.D.I.A की है अपनी तैयारी

By अंकित सिंह | Apr 18, 2024

इसमें कोई दो राय नहीं है कि चुनावी मौसम में जातीय समीकरण एक बड़ा मुद्दा रहता है। बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में हर राजनीतिक दलों के लिए जातीय समीकरण को साधना बेहद जरूरी हो जाता है। लोकसभा चुनाव 2024 में भी यह चीज साफ तौर पर दिखाई दे रही है। बिहार की बात करें तो 19 अप्रैल को पहले चरण की वोटिंग है। पहले चरण के उम्मीदवारों को देखें तो कहीं ना कहीं ऐसा लग रहा है कि सभी दलों ने जातिगत समीकरणों को साधते हुए प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है। चुनावी प्रचार में भी हमने देखा कि किस तरीके से राजनीतिक दलों की ओर से जातीय समीकरण को लेकर माइक्रो मैनेजमेंट किया गया है। 

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तेजस्वी यादव का नया फार्मूला

इसमें कोई दो राय नहीं है कि लालू यादव और राजद के लिए हमेशा एमवाई समीकरण महत्वपूर्ण रहा है। एम का मतलब मुस्लिम और वाई का मतलब यादव है। लेकिन अब तेजस्वी यादव ने इसमें बाप भी जोड़ दिया है। यानी की ब से बहुजन, ए से अगड़ा, एक ऐ से आधी आबादी यानी कि महिलाएं और पी से गरीब शामिल हैं। इसके अलावा मुकेश सैहनी के आने से मल्लाह और निषादों को भी साधने की कोशिश राजद की ओर से की गई है। राजद को मुस्लिम और यादव वोट के लिए सोचना नहीं है। लेकिन बाकी समुदाय के वोटो को अपने पास रखने के लिए इस बार लालू यादव ने भूमिहार, राजपूत, कुशवाहा जाति से आने वाले उम्मीदवारों पर अपना दांव लगाया है। लालू यादव ने नीतीश और भाजपा के वोट बैंक के कुशवाहा में सेंध लगाने के लिए चार कुशवाहा जाति की उम्मीदवारों को मैदान में उतार दिया है।

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