PM Modi ने दस सालों में Indian Navy को कहां से कहां पहुँचा दिया, समुद्र की लहरों पर दौड़ती भारतीय शक्ति को पूरी दुनिया सलाम करती है

By नीरज कुमार दुबे | Jul 11, 2026

भारतीय नौसेना की युद्धक क्षमता को नई ऊंचाई देते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विशाखापत्तनम में स्वदेशी स्टील्थ युद्धपोत आईएनएस महेंद्रगिरि को पूर्वी बेड़े में शामिल किया। प्रोजेक्ट सत्रह ए के तहत निर्मित यह छठा और अंतिम स्टील्थ युद्धपोत सिर्फ एक नया जहाज नहीं, बल्कि समुद्री शक्ति, स्वदेशी रक्षा निर्माण और सामरिक आत्मनिर्भरता का सशक्त प्रतीक है। महेंद्रगिरि के नौसेना में शामिल होने के साथ ही भारत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि वह केवल अपनी समुद्री सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दूरस्थ समुद्री क्षेत्रों में भी अपने हितों की प्रभावी सुरक्षा करने में पूरी तरह सक्षम है।

हम आपको बता दें कि महेंद्रगिरि को ब्लू वाटर युद्धपोत की श्रेणी में रखा गया है। इसका अर्थ है कि यह केवल तटीय सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि हजारों किलोमीटर दूर गहरे समुद्र में कई सप्ताह तक लगातार अभियान चलाने की क्षमता रखता है। खोज और बचाव अभियान, मानवीय सहायता, आपदा राहत, समुद्री सुरक्षा तथा हिंद महासागर क्षेत्र में लंबी तैनाती जैसे दायित्व भी यह समान दक्षता से निभा सकता है। पूर्वी घाट की महेंद्रगिरि पर्वतमाला के नाम पर रखे गए इस युद्धपोत के प्रतीक चिह्न में दर्शाया गया शिकरा पैनी दृष्टि, धैर्य और निर्णायक प्रहार का प्रतीक है, जो इसकी युद्धक भूमिका को भी प्रतिबिंबित करता है।

देखा जाये तो महेंद्रगिरि का सामरिक महत्व केवल इसकी मारक क्षमता तक सीमित नहीं है। हिंद महासागर आज विश्व व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और सामरिक प्रतिस्पर्धा का सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र बन चुका है। ऐसे समय में भारत के पास जितने अधिक आधुनिक और दूर तक अभियान चलाने वाले युद्धपोत होंगे, उतनी ही मजबूत उसकी समुद्री प्रतिरोधक क्षमता होगी। यह युद्धपोत समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा, शत्रु की गतिविधियों पर निगरानी, पनडुब्बियों की खोज और आवश्यकता पड़ने पर त्वरित जवाबी कार्रवाई में निर्णायक भूमिका निभाएगा। इससे हिंद महासागर और हिंद प्रशांत क्षेत्र में भारत की स्थिति एक भरोसेमंद सुरक्षा साझेदार के रूप में और मजबूत होगी।

हम आपको यह भी बता दें कि हाल के महीनों में भारतीय नौसेना का विस्तार अभूतपूर्व गति से हुआ है। 21 जून 2026 को एक साथ तीन महत्वपूर्ण पोत नौसेना में शामिल किए गए थे। इनमें आईएनएस दुनागिरि स्टील्थ युद्धपोत, आईएनएस संशोधक गहरे समुद्र का सर्वेक्षण पोत और आईएनएस अग्रय पनडुब्बी रोधी युद्धपोत शामिल हैं। इसके पहले 31 मार्च 2026 को आईएनएस मालवन को शामिल किया गया, जबकि साल 2025 में बहुउद्देशीय स्टील्थ युद्धपोत आईएनएस तमाल भी नौसेना का हिस्सा बना। अब महेंद्रगिरि के शामिल होने से भारतीय नौसेना की मारक क्षमता, निगरानी शक्ति और समुद्री उपस्थिति पहले से कहीं अधिक सुदृढ़ हो गई है।

यदि दस वर्ष पहले की तुलना करें तो भारतीय नौसेना में उल्लेखनीय परिवर्तन दिखाई देता है। तब अधिकांश प्रमुख युद्धपोतों और हथियार प्रणालियों के लिए विदेशी निर्भरता अधिक थी, जबकि आज स्वदेशी डिजाइन, निर्माण और अत्याधुनिक हथियारों से लैस युद्धपोत तेजी से बेड़े में शामिल हो रहे हैं। विमानवाहक पोत, आधुनिक विध्वंसक, स्टील्थ युद्धपोत, पनडुब्बी रोधी पोत, सर्वेक्षण पोत, उन्नत प्रहारक मिसाइल और स्वदेशी रक्षा प्रणालियों ने नौसेना की शक्ति को कई गुना बढ़ा दिया है। इस तरह अब भारत केवल समुद्री सुरक्षा करने वाला देश नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र में शक्ति संतुलन बनाए रखने वाली महत्वपूर्ण समुद्री ताकत के रूप में उभर चुका है।

साथ ही महेंद्रगिरि का नौसेना में शामिल होना इस बात का प्रमाण है कि आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना अब केवल नारा नहीं, बल्कि समुद्र की लहरों पर दौड़ती वास्तविक शक्ति बन चुकी है। यह युद्धपोत आने वाले वर्षों में भारत की समुद्री सुरक्षा का मजबूत प्रहरी बनने के साथ साथ स्वदेशी रक्षा निर्माण की सफलता का भी सबसे प्रभावशाली उदाहरण साबित होगा।

-नीरज कुमार दुबे

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