By अभिनय आकाश | Mar 09, 2026
राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बीच एक कॉन्फ्रेंस को लेकर विवाद गहरा गया है। बात इतनी बढ़ गई कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ममता बनर्जी को घेरा है। राष्ट्रपति मुर्मू सिलीगुड़ी में एक कॉन्फ्रेंस में शिरकत कर रही थी। उसे लेकर उन्हें ममता दीदी से कुछ शिकायतें थी। इनके जवाब में ममता बनर्जी ने राष्ट्रपति मुर्मू को बीजेपी का एजेंट बता डाला। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे आदिवासी समुदाय की अस्मिता से जोड़ दिया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के दौरे से जुड़ा विवाद केवल कार्यक्रम में व्यवस्था तक सीमित नहीं। यह मामला अब संवैधानिक गरिमा, प्रशासनिक जवाबदेही और चुनावी राजनीति का बन चुका है। राष्ट्रपति का खुद सार्वजनिक रूप से खामियों की ओर इशारा करना भी सामान्य बात नहीं है।
पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में नौवीं अंतरराष्ट्रीय संथाल कॉन्फ्रेंस थी। राष्ट्रपति मुर्मू इसमें शामिल होने आई थी। कॉन्फ्रेंस के वेन्यू को लेकर राष्ट्रपति ने ममता पर कटाक्ष कर दिया। उन्होंने शिकायत की कि वेन्यू बहुत छोटा था और वहां 5000 लोग भी शामिल नहीं हो सकते थे। इस वजह से बहुत सारे संथाल लोग कॉन्फ्रेंस में नहीं आ पाए। वहां का स्थिति थोड़ा इतना मुझे अच्छा नहीं लगा। तो मैंने सोचा जाके देखें यहां तो बहुत अच्छा है। इतना बड़ा फील्ड है। यहां तो इतने सारे लोग आ सकते हैं। लेकिन पता नहीं क्या हुआ। क्या मन में समाया है उनका वो जाने। लेकिन मैं बहुत दुखी हूं लेकिन यहां आके बहुत खुश लगा कि वहां के लोग वहां भी लोग क्योंकि बहुत दूर है वहां नहीं पहुंच पा रहे हैं। शायद उनके मन में था कोई ना आए और प्रेसिडेंट ऐसे ही घूम के चले जाए। आज उनका मन में ऐसा है तो फिर वो भी धन्यवाद है। इस कॉन्फ्रेंस के बाद राष्ट्रपति विधान नगर में एक दूसरे प्रोग्राम में पहुंची। वहां उन्हें जगह ज्यादा बड़ी लगी। इस पर उन्होंने सवाल किया कि यहां अगर कार्यक्रम होता तो 5 लाख लोग भी आ सकते थे। दूसरे कार्यक्रम में जो विधान नगर में था वहां जगह काफी पड़ी थी। वहीं जाकर प्रेसिडेंट ने कार्यक्रम स्थल को लेकर तंज कसे थे। राष्ट्रपति की नाराजगी इस बात पर भी थी कि प्रोटोकॉल को फॉलो नहीं किया गया। उनका स्वागत करने के लिए मुख्यमंत्री या राज्य सरकार के किसी मंत्री को होना चाहिए था। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत रूप से उन्हें इस पर ऐतराज नहीं है लेकिन देश के राष्ट्रपति पद के लिए जो प्रोटोकॉल है उसका पालन किया जाना चाहिए। ममता ने सवाल किया कि क्या यह राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने का प्लान है? क्या इसीलिए राज्यपाल को बदल दिया गया है? उन्होंने आरोप लगाया कि सीवी आनंद बोस को पूर्व उपराष्ट्रपति जयदीप धनकर की तरह डराधमका कर पद से हटा दिया गया है। मुख्यमंत्री ने यह भी चेतावनी दी कि बंगाल चुनाव के बाद उनका टारगेट दिल्ली होगा। अगर उन्हें नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई तो वे सभी बीजेपी शासित राज्यों में जाएंगी और रैलियां कर पार्टी को खत्म कर देंगी।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कथित प्रोटोकॉल उल्लंघन को लेकर रविवार को तृणमूल कांग्रेस सरकार पर अपना हमला तेज करते हुए कहा कि राज्य की जागरूक जनता एक महिला आदिवासी नेता और देश की राष्ट्रपति का ‘अपमान’ करने के लिए पार्टी को कभी माफ नहीं करेगी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस सरकार के कारण न केवल आदिवासी समुदाय के कार्यक्रम में कुप्रबंधन देखने को मिला, बल्कि यह राष्ट्रपति, संविधान और देश में लोकतंत्र की महान परंपरा का भी अपमान है। राष्ट्रपति मुर्मू जी संथाल आदिवासी परंपरा के सम्मान में आयोजित एक महत्वपूर्ण समारोह में भाग लेने के लिए बंगाल गई थीं। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस ने इस पवित्र और महत्वपूर्ण कार्यक्रम का बहिष्कार करना चुना, जिसका राष्ट्रपति और आदिवासी समुदाय दोनों के लिए बहुत महत्व है। उधर गृह मंत्रालय ने बंगाल सरकार से राज्य में राष्ट्रपति मुर्मू की यात्रा के दौरान हुए प्रोटोकॉल उल्लंघन के मामले में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
ममता बनर्जी ने ऐसे बयान दिए जिनसे यह संकेत मिला कि राष्ट्रपति के माध्यम से केंद्र सरकार राज्य के मामलों में हस्तक्षेप कर रही है। इससे राजनीतिक तनाव बढ़ गया और राज्य एवं केंद्र के प्रतिनिधियों के बीच तीखी बहस छिड़ गई। राष्ट्रपति के प्रोटोकॉल को लेकर पीएम मोदी के बयान के बाद ममता बनर्जी ने पलटवार करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने पहले ही पत्र लिखकर बताया था कि संबंधित निजी संगठन राष्ट्रपति स्तर का कार्यक्रम आयोजित करने में सक्षम नहीं है, इसके बावजूद राष्ट्रपति ने अपने विवेक से निमंत्रण स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम की व्यवस्था और उसमें आई कमियों के लिए आयोजक और एयरपोर्ट अथॉरिटी जिम्मेदार है, राज्य सरकार नहीं। ममता बनर्जी ने कहा कि प्रधानमंत्री हर चुनाव से पहले बंगाल को निशाना बनाते है और राज्य का अपमान करते है। राष्ट्रपति के कार्यक्रम में कोलकाता के मेयर मौजूद थे, जबकि वह खुद लोगों के अधिकारों को लेकर धरने में शामिल थी। ऐसे में मै वहा से कैसे जा सकती थी? ममता ने कहा कि धरना शुरू होने से पहले मुझे इस कार्यक्रम की जानकारी नहीं थी। मैं यहां लोगो की लड़ाई लड़ रही हूं। पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने पीएम मोदी पर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद का अपमान करने का आरोप लगाया। उन्होंने राष्ट्रपति के प्रोटोकॉल के कथित उल्लंघन को लेकर तृणमूल कांग्रेस सरकार पर किए गए मोदी के हमले का खंडन किया। अपने दावे के समर्थन में बनर्जी ने सीनियर बीजेपी नेता लाल कृष्ण आडवाणी के साथ बैठे हुए पीएम मोदी की एक बड़ी तस्वीर दिखाई, जिसमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु उनके बगल में खड़ी हैं। यह तस्वीर कथित तौर पर मार्च 2024 के उस कार्यक्रम की है, जिसमें राष्ट्रपति मुर्मु ने आडवाणी को उनके घर पर भारत रत्न से सम्मानित किया था। तस्वीर में दिख रहा है कि पीएम बैठे हैं, जबकि राष्ट्रपति खड़ी है। ममता ने कहा, 'हम ऐसा कभी नहीं करते। राष्ट्रपति का अपमान करने की संस्कृति BJP की है, हमारी नहीं।
ऐसे कई मौके रहे है जब मुख्यमंत्री किसी कारण से स्वागत के लिए मौजूद नहीं हो पाए, लेकिन किसी मंत्री को नामित किया। उदाहरण के तौर पर, सितंबर 2025 में राष्ट्रपति मुर्मु के मथुरा दौरे के दौरान न तो राज्यपाल आनंदीबेन पटेल मौजूद थी और न ही मुख्यमंत्री योगी। योगी ने अपने मंत्री को भेजा था। उत्तर प्रदेश में 2014 से 2017 के बीच जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्य के दौरे पर आते थे और तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव उपलब्ध नहीं होते थे तो वे अपने किसी मंत्री को स्वागत के लिए नामित कर देते थे। यही व्यवस्था उस समय के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के दौरों के दौरान भी अपनाई गई थी।
बंगाल में ऐसा उदाहरण कम ही देखने को मिला है जब प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति का स्वागत न तो सीएम ने किया हो और न ही किसी मंत्री ने। मई 2021 में चक्रवात यास के बाद पीएम मोदी के राज्य दौरे के दौरान भले ही ममता बनर्जी ने उनकी अध्यक्षता वाली समीक्षा बैठक में हिस्सा नहीं लिया था, लेकिन वह एयरपोर्ट पर उनका स्वागत करने जरूर पहुंची थी। प्रोटोकॉल से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि ब्लू बुक के नियम काफी सख्त होते है।
राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के दौरे से जुड़ी व्यवस्थाएं गृह मंत्रालय की ब्लू बुक के तहत तय होती हैं। इसी दस्तावेज में वीवीआईपी दौरों के दौरान सुरक्षा, प्रोटोकॉल और स्वागत की पूरी व्यवस्था का उल्लेख होता है। इस दस्तावेज में इन वीवीआईपी के दौरे के दौरान सुरक्षा, प्रोटोकॉल और स्वागत से जुड़े सभी दिशा-निर्देश तय होते हैं। इसकी क्रमांकित प्रतियां संबंधित अधिकारियों को दी जाती हैं और जिला स्तर पर यह जिला मैजिस्ट्रेट और पुलिस प्रमुख के पास रहती है। प्रोटोकॉल के अनुसार, आम तौर पर राज्यपाल और मुख्यमंत्री इन गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत करते हैं। यदि मुख्यमंत्री उपलब्ध न हों, तो वे अपने किसी मंत्री को इसके लिए नामित करते हैं।
इस घटना से जुड़ा एक राजनीतिक एंगल भी है। राज्य में जल्द ही विधानसभा चुनाव होने हैं और मुख्य टक्कर बीजेपी व सत्ताधारी टीएमसी के बीच मानी जा रही। चुनावी मैदान की यही तल्खी अब संवैधानिक परंपराओं में दिख रही है। टीएमसी ने केंद्र पर राष्ट्रपति पद के राजनीतिक इस्तेमाल का आरोप लगाया है। सीएम ममता बनर्जी कह रही हैं कि कोई प्रोटोकॉल नहीं टूटा। यह कार्यक्रम संथाल आदिवासियों से जुड़ा था। राष्ट्रपति खुद इस समुदाय से ताल्लुक रखती है। लेकिन, अब ध्यान मुख्य मुद्दे से हटकर इस विवाद की ओर चला गया। इस मामले से यह भी पता चलता है कि देश में कई बार बड़े आयोजनों तक की तैयारी आखिरी वक्त तक चलती रहती है। अगर राष्ट्रपति के दौरे से जुड़े सारे इंतजाम पहले ही पूरे होते, तो शायद यह विवाद खड़ा ही नहीं होता।