Bangladesh में नई सरकार और मुख्य विपक्षी पार्टी के इरादे भारत के बारे में नेक नहीं लग रहे हैं

By नीरज कुमार दुबे | Aug 10, 2024

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री रहीं शेख हसीना का भारत में रहना बांग्लादेश की नई सरकार और वहां की मुख्य विपक्षी पार्टी को बिल्कुल नहीं भा रहा है। इसलिए वह भारत को चेतावनी देने में लग गये हैं। हम आपको बता दें कि अपदस्थ शेख हसीना की अवामी लीग पार्टी की कट्टर प्रतिद्वंद्वी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी ने कहा है कि भारत में रहने का पूर्व प्रधानमंत्री का फैसला पूरी तरह से उनका और भारतीय अधिकारियों का है। बीएनपी ने लेकिन आगाह किया कि बांग्लादेश के लोग इसे अच्छे नजरिए से नहीं देखेंगे। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के वरिष्ठ नेता और पार्टी के प्रवक्ता अमीर खसरू महमूद चौधरी ने कहा, ‘‘अभी, वह (हसीना) बांग्लादेश में हत्याओं और लोगों को जबरन गायब करने से लेकर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार जैसे कई अपराधों में सबसे वांछित व्यक्ति हैं।’’ महमूद चौधरी ने कहा कि यह ‘‘खुद हसीना और भारत सरकार का निर्णय है कि उन्हें पड़ोसी देश में रहना चाहिए या नहीं।’’ बीएनपी की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली स्थायी समिति के सदस्य महमूद चौधरी ने कहा, ‘‘फिर भी, बांग्लादेश के लोग सोचते हैं कि भारतीय अधिकारियों को उनकी भावनाओं को ध्यान में रखना चाहिए।’’ महमूद चौधरी ने कहा, ‘‘लोग (बांग्लादेश में) इसे (हसीना के भारत में रहने) को अच्छे नजरिए से नहीं देखेंगे।''

वहीं दूसरी ओर, बांग्लादेश की नवगठित अंतरिम सरकार में विदेश मंत्री की भूमिका में आये तौहीद हुसैन ने ‘बड़े देशों’ के साथ ढाका के संबंधों में ‘संतुलन’ बनाये रखने की आवश्यकता पर जोर दिया है। अंतरिम सरकार में विदेश मामलों के सलाहकार एवं पूर्व विदेश सचिव मोहम्मद तौहीद हुसैन ने संवाददाताओं से कहा कि कानून एवं व्यवस्था बहाल करना इस समय अंतरिम सरकार की प्रमुख प्राथमिकता है तथा पहला लक्ष्य हासिल हो जाने के बाद अन्य कार्य भी हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश को सभी देशों के साथ अच्छे संबंध रखने की जरूरत है। तौहीद हुसैन ने किसी देश का नाम लिए बगैर कहा, ‘‘हम सभी के साथ अच्छे संबंध रखना चाहते हैं। हमें बड़े देशों के साथ संबंधों में संतुलन बनाए रखने की जरूरत है।’’ 

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हम आपको बता दें कि तौहीद हुसैन को भारत के बारे में मिश्रित विचार रखने के लिए जाना जाता है, वे एक तरफ ढाका के लिए भारत के महत्व को स्वीकार करते हैं, लेकिन दूसरी तरफ बांग्लादेश के हितों के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाने का आरोप लगाते हैं। हुसैन ने पिछले साल एक व्याख्यान में कहा था कि पिछले 15 वर्षों में बांग्लादेश के हितों की भारत ने रक्षा नहीं की। उन्होंने कहा था कि यही कारण है कि भारत के साथ संबंध को आदर्श नहीं माना जा सकता। हम आपको बता दें कि भारत वर्षों से कहता रहा है कि बांग्लादेश के साथ उसके द्विपक्षीय संबंध सबके लिए आदर्श की तरह है। तौहीद हुसैन मानते हैं कि बांग्लादेश के संबंध अच्छे तभी होते हैं जब ढाका में खालिदा जिया के नेतृत्व वाली अवामी लीग की सरकार हो और दिल्ली में कांग्रेस की। हम आपको यह भी बता दें कि तौहीद हुसैन को पश्चिमी देशों के समर्थक के रूप में भी देखा जाता है और वह लंबे समय से कहते रहे हैं कि ढाका को पश्चिमी देशों के साथ अपने संबंधों को सुधारने की जरूरत है। इस साल बांग्लादेश में चुनाव से ठीक पहले उन्होंने लिखा था कि भारत के साथ संबंध हमेशा महत्वपूर्ण रहेंगे लेकिन ढाका को रूस और चीन के साथ भी अच्छे संबंध बनाए रखने की जरूरत है।

हम आपको यह भी बता दें कि बांग्लादेश में अंतरिम सरकार के मुखिया बने मोहम्मद यूनुस का भी भारत के प्रति ज्यादा झुकाव नहीं हैं। वह बांग्लादेश में पश्चिमी देशों की कठपुतली बताये जा रहे हैं। उन्होंने हाल ही में हिंदुस्तान से नाराजगी जताते हुए कहा था कि पड़ोसी देश के हालात को देखकर भारत कैसे मुंह मोड़ सकता है। मोहम्मद यूनुस ने कहा था कि वह विशेष रूप से भारत के रुख से निराश थे, जो बांग्लादेश में विरोध प्रदर्शन को एक आंतरिक मामला मानता है। उन्होंने कहा था कि अगर भाई के घर में आग लग गई है, तो मैं कैसे कह सकता हूं कि यह आंतरिक मामला है? जब उनसे बांग्लादेश में हो रहे विरोध प्रदर्शनों पर भारत की प्रतिक्रिया के बारे में पूछा गया था तो उन्होंने हालांकि कहा था कि हम मैत्रीपूर्ण संबंध चाहते हैं। अब जब उनके हाथ में सत्ता आ गयी है तो उन्होंने एक समाचार चैनल को दिये साक्षात्कार में और भी विस्फोटक बात कह दी है। उन्होंने कहा है कि अगर बांग्लादेश में अस्थिरता आती है तो इसका असर म्यांमार के साथ-साथ भारत के उत्तर-पूर्व और पश्चिम बंगाल राज्य पर भी हो सकता है।

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