By रेनू तिवारी | Jun 08, 2026
देश में ईंधन की बढ़ती कीमतों (Fuel Prices) ने भारतीय ऑटोमोबाइल उपभोक्ताओं की सोच और प्राथमिकताओं को पूरी तरह से बदल दिया है। ईंधन की महंगाई के दबाव में अब लोग पारंपरिक वाहनों के बजाय ईंधन-किफायती (Fuel-efficient) और वैकल्पिक पावरट्रेन (Alternative Powertrain/EV) वाहनों की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं। ऑटोमोबाइल डीलरों के शीर्ष संगठन ‘फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन्स’ (FADA) द्वारा सोमवार को जारी रिपोर्ट में इस बड़े बदलाव की पुष्टि की गई है। दिलचस्प बात यह है कि ईंधन की ऊंची कीमतों, भीषण लू (Heatwave) और पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) के भू-राजनीतिक संकट जैसी चुनौतियों के बावजूद मई 2026 में देश में मोटर वाहनों की कुल खुदरा बिक्री (Retail Sales) में ऐतिहासिक 9.55 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की गई है।
उद्योग निकाय के अनुसार, जून से अगस्त की अवधि के लिए डीलरों का भरोसा मजबूत दिख रहा है, जहां 59.07 प्रतिशत डीलर अब वृद्धि की उम्मीद कर रहे हैं। यह मध्यम अवधि की मांग को लेकर बढ़ते विश्वास का संकेत है, खासकर जब मानसून आगे बढ़ रहा है। यह रुझान दर्शाता है कि खरीफ बुवाई के साथ ग्रामीण आय बढ़ने पर मौसमी सुस्ती खत्म और मांग तेज हो सकती है।
फाडा ने कहा कि ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी, लू की स्थिति और पश्चिम एशिया संघर्ष के बावजूद मई में मोटर वाहनों की खुदरा बिक्री 9.55 प्रतिशत बढ़कर 25,31,067 इकाई हो गई जो पिछले साल इसी महीने 23,10,451 इकाई थी। मई में तिपहिया, यात्री वाहन और ट्रैक्टर श्रेणियों में अब तक की सर्वाधिक खुदरा बिक्री दर्ज की गई जबकि आम तौर पर इस महीने बिक्री कमजोर रहती है।
फाडा के आंकड़ों के अनुसार, यात्री वाहन (पीवी) की खुदरा बिक्री पिछले महीने 23.25 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 4,02,591 इकाई रही जो मई 2025 के 3,26,656 इकाई थी। दोपहिया वाहनों की बिक्री भी 17,15,581 इकाई से 7.54 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 18,44,947 इकाई हो गई। उद्योग निकाय फाडा के अनुसार, तिपहिया वाहनों की बिक्री पिछले महीने 1,11,526 इकाई रही, जो मई 2025 की 1,07,688 इकाइयों से 3.56 प्रतिशत अधिक है।
वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री भी 5.29 प्रतिशत बढ़कर पिछले महीने रिकॉर्ड 83,823 इकाइयों पर पहुंच गई जो मई 2025 में 79,614 इकाई थी। फाडा ने कहा, ‘‘ कुल मिलाकर अगले तीन महीने सतर्क रूप से आशावादी नजर आते हैं। सामान्य से थोड़ा कम मानसून, वित्त वर्ष 2025-26 की 7.7 प्रतिशत आर्थिक वृद्धि और नीतिगत स्थिरता जैसे कारक उद्योग को मौसमी सुस्ती से निकालकर दूसरी तिमाही में मजबूती की ओर ले जा सकते हैं।