By अभिनय आकाश | Mar 23, 2026
किसी भी चरण का युद्ध बेहद गंभीर मामला होता है। खासकर जब इसमें इज़राइल और अमेरिका शामिल हों। लेकिन ईरान पर थोपा गया यह युद्ध पिछले 48 घंटों में अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है। अब स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर हो रही है। पिछले 48 घंटों में दो बड़ी घटनाएं घटी हैं, जिनसे पता चलता है कि यह युद्ध पूरी तरह से बेकाबू हो गया है। इसके वैश्विक परिणाम भी अब स्पष्ट हो गए हैं। पहली बात, इस युद्ध में अब परमाणु शब्द का इस्तेमाल होने लगा है। खुद को विजेता घोषित करने के बाद, डोनाल्ड ट्रम्प ने एक और अल्टीमेटम दिया है और यह अल्टीमेटम बेहद हताशा भरा है। अगर ईरान इस अल्टीमेटम को स्वीकार नहीं करता है, तो आप समझ सकते हैं कि अगले 24-48 घंटों में भारी उथल-पुथल मच सकती है।ईरान ने इजराइल के दक्षिणी इलाके में मौजूद डिमोना और अराद में मिसाइल अटैक किया है। 100 लोगों के घायल होने की खबर है। डिमोना वो जगह है जहां से 13 किमी की दूरी पर नेगेव रेगिस्तान है। नेगेव रेगिस्तान जहां पर इजराइल का नेगेव न्यूक्लियर रिसर्च सेंटर है। इस रिसर्च सेंटर को तो कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। लेकिन इस लोकेशन के इतने करीब मिसाइल को इंटरसेप्ट ना कर पाना इजराइल की बड़ी चूक मानी जा रही है। सबसे पहले, परमाणु मुद्दे पर बात करते हैं। इस पर काफी हंगामा मचा हुआ है। अगर आप मीडिया पर गौर करें तो आपको लगेगा कि ईरान ने इज़राइल के परमाणु संयंत्र पर हमला किया है। लेकिन ऐसा नहीं है। हो सकता है कि यह हमला जानबूझकर न किया गया हो। डिमोना के पास स्थित शिमोन पेरेस परमाणु अनुसंधान संयंत्र पर हमला नहीं हुआ है। बल्कि डिमोना शहर पर हमला हुआ है, जहां उस संयंत्र में काम करने वाले लोग रहते होंगे। यह हमला जवाबी कार्रवाई के तौर पर किया गया है... ठीक उसी तरह जैसे अमेरिका ने नतान्ज़ पर फिर से हमला किया। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने इज़राइल के परमाणु संयंत्र के पास स्थित डिमोना शहर पर हमला कर दिया। और यह हमला एक संदेश देने के उद्देश्य से क्यों किया गया? अराद पर भी हमला किया गया है, लेकिन डिमोना पर हुआ यह हमला इतना खास क्यों है? मिसाइल इंटरसेप्ट में हुई चूक पर इजराइल क्या बोला और डेमोना का भारत से क्या ताल्लुक है? इसे लिटिल इंडिया क्यों कहते हैं? आज इसी का एमआरआई स्कैन करेंगे।
अगर किसी परमाणु संयंत्र पर हमला नहीं होता, तो यह इतना खास क्यों है? ज़रा सोचिए, अगर कोई देश आकर हमारे भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र के पास हमला कर दे, तो हमारे देश की क्या प्रतिक्रिया होगी? क्योंकि भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र की तरह ही डिमोना में भी उनका एक परमाणु संयंत्र है। इसी अनुसंधान केंद्र ने इज़राइल को पहले 13 परमाणु हथियार मुहैया कराए थे। वहीं से यूरेनियम का उत्पादन हुआ था और वहीं से, मुझे लगता है 1967 में, इज़राइल को परमाणु हथियार मिले थे। आज जवाबी कार्रवाई के तौर पर उसी संयंत्र के पास एक बम गिराया गया। ईरान का संदेश बिल्कुल स्पष्ट है। कि अगर हमारे परमाणु संयंत्रों पर हमला होता है, तो आपके परमाणु संयंत्र भी हमारी पहुंच से बाहर नहीं हैं।
अराद शहर में ईरानी मिसाइल गिरने के बाद तबाही का भारी मजर देखने को मिला। रिहायशी इमारतो के बीच हुए इस धमाके में कई लोग घायल हो गए। जेरुशलम पोस्ट के मुताबिक, एक व्यक्ति ने बताया, अलर्ट के बाद हम शेल्टर में गए थे। कुछ देर बाद जोरदार धमाका हुआ, पूरा घर हिल गया। बाहर निकलने पर घर के खिड़की दरवाजे उखड़े नजर आए। सामान टूटकर बिखरा मिला। वही, राहतकर्मियों ने बताया, घायलों को अस्पताल भेजा गया, जहां कई की हालत गंभीर बनी हुई है। अधिकारियों के मुताबिक कम से कम तीन इमारतों को भारी नुकसान पहुंचा है।
इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी जो दुनिया भर में न्यूक्लियर प्रोग्राम्स पर नजरें रखती है। उसने अपने पोस्ट में लिखा आईएईए को इजराइल के डिमोना शहर में मिसाइल हमले की जानकारी है। नेगेव न्यूक्लियर रिसर्च सेंटर को किसी भी तरह के नुकसान की कोई खबर नहीं है। आसपास के देशों से मिली जानकारी के मुताबिक रेडिएशन का स्तर सामान्य है और कोई भी एब्नॉर्मल रेडिएशन की सूचना अभी तक हमें नहीं मिली है। इन हालातों पर हमारी बारीकी से नजर है। डायरेक्टर जनरल राफेल ग्रासी ने कहा है कि दोनों पक्षों को सैन्य संयम बरतना चाहिए। खासकर परमाणु केंद्रों के आसपास के इलाके में। जानकारी के लिए बता दें कि डिमोना के पास मौजूद नेगेव न्यूक्लियर रिसर्च सेंटर को डिमोना रिएक्टर नाम से भी जाना जाता है। माना जाता है कि यहां इसराइल ने अपने परमाणु हथियार छिपा रखे हैं। पर यह अनडिक्लेयर्ड है। इसकी पुष्टि नहीं हुई है। आधिकारिक तौर पर यह कहा जाता है कि यहां केवल रिसर्च प्रोग्राम चलता है।
डिमोना इस्राइल का परमाणु केंद्र है। साथ ही भारतीय-यहूदी समुदाय की बड़ी आबादी के चलते इसे लिटिल इंडिया भी कहा जाता है। तुर्किये की अनादोलु न्यूज एजेंसी के अनुसार, ईरान के एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने कहा कि अगर अमेरिका और इस्राइल युद्ध बढ़ाते हैं, तो डिमोना रिएक्टर को निशाना बनाया जाएगा। डिमोना रिएक्टर को शिमोन पेरेस नेगेव न्यूक्लियर रिसर्च सेंटर कहा जाता है। यह इजरायल के परमाणु कार्यक्रम की रीढ़ माना जाता है। यह दक्षिणी इजरायल के नेगेव रेगिस्तान में स्थित है। परिसर करीब 36 वर्ग किलोमीटर में फैला है। करीब 2700 वैज्ञानिक और तकनीशियन काम करते हैं।
1950 के दशक में इजरायल ने परमाणु कार्यक्रम शुरू किया और 1957 में फ्रांस की मदद से रिएक्टर बनाया। 1963 के आसपास यह चालू हुआ। डिमोना में इस्तेमाल हो चुके ईंधन को प्रोसेस कर प्लूटोनियम तैयार किया जाता है, जो परमाणु हथियार बनाने में इस्तेमाल होता है। 1967 तक अमेरिकी रिपोर्ट से संकेत मिल गए थे कि इजरायल के पास परमाणु बम है। 1986 में तकनीशियन मोर्देखाई वनुनु ने इस रिएक्टर से जुड़े कई राज उजागर किए थे। इसके बावजूद इजरायल ने हमेशा अपने परमाणु हथियारों को लेकर अस्पष्ट नीति रखी है। इजरायल ने परमाणु हथियार प्रतिबंध संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। SIPRI के अनुसार, उसके पास 50 से ज्यादा परमाणु हथियार हो सकते हैं। मिडिल ईस्ट में इजराइल इकलौता ऐसा देश है जिसके पास न्यूक्लियर हथियार है। ऐसे में इस लोकेशन के आसपास भी हमला बेहद गंभीर बात है। 21 मार्च को ईरान ने दावा किया था कि अमेरिका और इजराइल ने मिलकर उसके नताज यूरेनियम एनरचमेंट फैसिलिटी पर हमला किया था।
को इजरायल के 'लिटिल इंडिया' के नाम से जाना जाता है, जहां बड़ी संख्या में भारतीय-यहूदी समुदाय रहता है। करीब 30% आबादी भारतीय मूल की है और मराठी भाषा आम बोलचाल में इस्तेमाल होती है। दुकानों में सोनपापड़ी, गुलाब जामुन, पापड़ी चाट और भेलपुरी मिल जाती है।
ईरानी सरकारी मीडिया ने डिमोना में हुए हमले को जवाबी कारवाई के तौर पर पेश किया है। ईरान के संसद में स्पीकर ने चेतावनी तक दी है। पोस्ट में लिखा है कि अगर इजराइल अपने सबसे सुरक्षित इलाके डिमोना में मिसाइल इंटरसेप्ट नहीं कर पा रहा है तो रणनीतिक तौर पर इसका मतलब यह है कि जंग अब नए चरण में पहुंच चुकी है। इजराइल के आसमान में अब कवच नहीं रहा। अब ऐसा लगता है कि पहले से जो हमने प्लान तैयार कर रखा है उसे जमीनी स्तर पर लागू करने का वक्त आ गया है। इजराइली सेना के प्रवक्ता ने बताया कि हमलों के दौरान इजराइल का एयर डिफेंस सिस्टम एक्टिव तो हुआ लेकिन वो कुछ मिसाइलों को रोकने में नाकाम रहा। हैरानी की बात यह है कि यह अलग तरह की मिसाइलें नहीं थी जिन्हें रोका नहीं जा सकता था।
अगर इज़राइल खुद को अलग-थलग नहीं पाता है, तो वह सामरिक बम गिराने के लिए उतड़प उठेगा और यह सारा मामला खत्म हो जाएगा। यहाँ एक गणना, एक विचार प्रक्रिया है जिसे सैमसन ऑप्शन कहा जाता है। वह सैमसन विकल्प क्या है? यह विकल्प यह है कि अगर इज़राइल को लगता है कि उसका अस्तित्व खतरे में है अगर उस पर हमला होता है, तो वह परमाणु जवाबी कार्रवाई का सहारा ले सकता है। इज़राइल परमाणु जवाबी कार्रवाई इसलिए भी करना चाह सकता है क्योंकि लोगों को फिलहाल कोई दूसरा विकल्प नज़र नहीं आता। लेबनान और गाजा में उसने जो क्रूरता बरती है, उससे उसे परमाणु हथियार इस्तेमाल करने का विकल्प मिल सकता है। लेकिन क्या वह इस विकल्प का इस्तेमाल कर सकता है? क्या अंतरराष्ट्रीय समुदाय उसे अलग-थलग कर देगा? शायद इसीलिए अभी इसका इस्तेमाल नहीं हो रहा है। इस हमले का बदला इजरायल कैसे लेगा?